{"_id":"580511634f1c1b562c702eab","slug":"5092-villages-still-waiting-for-diwali","type":"story","status":"publish","title_hn":"5092 बस्तियाें में कब आएगी 'दिवाली'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
5092 बस्तियाें में कब आएगी 'दिवाली'
प्रतापगढ़
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:44 PM IST
विज्ञापन
electricity price increases
- फोटो : Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
केंद्र सरकार की विद्युतीकरण की तीन महत्वपूर्ण योजनाएं भी जिले की 5092 बस्तियों (सौ और तीन सौ आबादी वाली) में छाया अंधेरा दूर नहीं कर सकीं। आजादी के इतने वर्ष बाद भी सौ और तीन सौ की आबादी वाली बस्तियों के हजारों घरों का अंधेरा मिटाने में बिजली विभाग पूरी तरह से असफल रहा। दीपावली पर बस्ती के बाशिंदों को चिराग की रोशनी में त्योहार मनाना पड़ेगा।
सरकार्रें आइं नेताओं ने अपने लंबे चौड़े भाषण में जिले को विद्युतीकरण से संतृप्त करने का वायदा किया। इसी वायदे के बल पर पांच साल तक राज किया। इस बीच जनता से किये वायदे वे भूल गये। उसके बाद दूसरी सरकार आई उसने भी वही किया। इस तरह से जिले में विद्युतीकरण को लेकर चलाई गई 11वीं, 12वीं राजीव गांधी के बाद इस सरकार में शुरू की गई दीनदयाल ग्राम ज्योति विद्युतीकरण योजना भी जिले की 5092 बस्तियों जिसमें एक सौ आबादी वाली 4600 और तीन सौ की आबादी वाली 592 बस्तियां शामिल हैं, का कल्याण नहीं कर पाईं।
बिजली के अधिकारी लाख विद्युतीकरण के दावे कर रहे हैं, मगर सही मायने में जिले का कोई भी ब्लाक ऐसा नहीं है जो विद्युतीकरण से पूरी तरह से संतृप्त हो। पट्टी, लालगंज, कुुंडा, सदर, रानीगंज तहसीलों के भैसोना, विष्णुपुर, इटौला, चांदीपुर, यादव बस्ती जैसी कई ऐसी बस्तियां हैं जहां पर विद्युतीकरण नहीं हुआ है। यहां के हजारों ग्रामीण उपभोक्ता अभी भी बिजली की सुविधा से वंचित हैं। उनको आशा थी कि इस बाद दीपावली पर शायद उनके घर में उजियारा हो जाए, मगर उनकी उम्मीद इस वर्ष भी पूरा नहीं हो सकेगी। जिले में टाटा और आरकेईसी कंपनियां विद्युतीकरण का कार्य कर रही है। जिसमें टाटा के जिम्मे तीन सौ आबादी वाले 592 और आरकेईसी के जिम्मे सौ की आबादी वाले 4500 बस्तियों का विद्युतीकरण है।
सरकार्रें आइं नेताओं ने अपने लंबे चौड़े भाषण में जिले को विद्युतीकरण से संतृप्त करने का वायदा किया। इसी वायदे के बल पर पांच साल तक राज किया। इस बीच जनता से किये वायदे वे भूल गये। उसके बाद दूसरी सरकार आई उसने भी वही किया। इस तरह से जिले में विद्युतीकरण को लेकर चलाई गई 11वीं, 12वीं राजीव गांधी के बाद इस सरकार में शुरू की गई दीनदयाल ग्राम ज्योति विद्युतीकरण योजना भी जिले की 5092 बस्तियों जिसमें एक सौ आबादी वाली 4600 और तीन सौ की आबादी वाली 592 बस्तियां शामिल हैं, का कल्याण नहीं कर पाईं।
विज्ञापन
बिजली के अधिकारी लाख विद्युतीकरण के दावे कर रहे हैं, मगर सही मायने में जिले का कोई भी ब्लाक ऐसा नहीं है जो विद्युतीकरण से पूरी तरह से संतृप्त हो। पट्टी, लालगंज, कुुंडा, सदर, रानीगंज तहसीलों के भैसोना, विष्णुपुर, इटौला, चांदीपुर, यादव बस्ती जैसी कई ऐसी बस्तियां हैं जहां पर विद्युतीकरण नहीं हुआ है। यहां के हजारों ग्रामीण उपभोक्ता अभी भी बिजली की सुविधा से वंचित हैं। उनको आशा थी कि इस बाद दीपावली पर शायद उनके घर में उजियारा हो जाए, मगर उनकी उम्मीद इस वर्ष भी पूरा नहीं हो सकेगी। जिले में टाटा और आरकेईसी कंपनियां विद्युतीकरण का कार्य कर रही है। जिसमें टाटा के जिम्मे तीन सौ आबादी वाले 592 और आरकेईसी के जिम्मे सौ की आबादी वाले 4500 बस्तियों का विद्युतीकरण है।
विज्ञापन