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233 ग्राम पंचायतों को नहीं मिलेगी दूसरी किस्त
Updated Wed, 13 Sep 2017 07:11 PM IST
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प्रतापगढ़। जिले के 233 ग्राम पंचायतों को चौदहवें वित्त आयोग की दूसरी किस्त का भुगतान नहीं होगा। इन ग्राम पंचायतों ने रुपये निकालकर बंदरबांट तो कर लिया, मगर किस मद में रुपये खर्च हुए हैं, उसका बिल ऑनलाइन नहीं किया गया है। शासन से इसी माह के अंत तक दूसरी किस्त आनी है।
इस वर्ष चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि सिर्फ ग्राम पंचायतों को दी गई है। बताया जाता है कि चालू वित्तीय वर्ष में पहली किस्त के रूप में प्रधानों को इतनी धनराशि मिल गई कि वे हिसाब रखना ही भूल गए। जिले के 1255 ग्राम पंचायतों में 233 ग्राम पंचायतों ऐेसी हैं, जिन्होंने विकास के नाम पर रुपये तो लगभग छह माह पहले ही निकाल लिया है, मगर खर्च विवरण ऑनलाइन करने से किनारा काटा जा रहा है। भारत सरकार ने इस वर्ष प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिवों पर शिकंजा कसते हुए खर्च की गई धनराशि का विवरण ऑनलाइन करने और बिल आदि अपलोड करने को कहा था।
जिले के तकरीबन 1022 ग्राम प्रधानों ने ऑनलाइन फीडिंग करा दी, लेकिन लगभग 233 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अभी खर्च रुपये का हिसाब नहीं पेश किया गया है। चौहदवें वित्त आयोग की दूसरी किस्त इसी माह के अंत में ग्राम पंचायतों में भेजी जानी है। मगर दूसरी किस्त का भुगतान उन्हीं ग्राम पंचायतों में होगा, जिन्होंने ऑनलाइन फीडिंग का कार्य पूरा कर लिया है। डीपीआरओ शशिकांत पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन फीडिंग में ग्राम पंचायतें बहुत ही लापरवाही बरत रही हैं। प्रधान और सचिव ने रुपये तो निकाल लिए हैं, लेकिन बिल आदि देने से कतरा रहे हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों की मानीटरिंग प्रतिदिन हो रही है।
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इस वर्ष चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि सिर्फ ग्राम पंचायतों को दी गई है। बताया जाता है कि चालू वित्तीय वर्ष में पहली किस्त के रूप में प्रधानों को इतनी धनराशि मिल गई कि वे हिसाब रखना ही भूल गए। जिले के 1255 ग्राम पंचायतों में 233 ग्राम पंचायतों ऐेसी हैं, जिन्होंने विकास के नाम पर रुपये तो लगभग छह माह पहले ही निकाल लिया है, मगर खर्च विवरण ऑनलाइन करने से किनारा काटा जा रहा है। भारत सरकार ने इस वर्ष प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिवों पर शिकंजा कसते हुए खर्च की गई धनराशि का विवरण ऑनलाइन करने और बिल आदि अपलोड करने को कहा था।
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जिले के तकरीबन 1022 ग्राम प्रधानों ने ऑनलाइन फीडिंग करा दी, लेकिन लगभग 233 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अभी खर्च रुपये का हिसाब नहीं पेश किया गया है। चौहदवें वित्त आयोग की दूसरी किस्त इसी माह के अंत में ग्राम पंचायतों में भेजी जानी है। मगर दूसरी किस्त का भुगतान उन्हीं ग्राम पंचायतों में होगा, जिन्होंने ऑनलाइन फीडिंग का कार्य पूरा कर लिया है। डीपीआरओ शशिकांत पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन फीडिंग में ग्राम पंचायतें बहुत ही लापरवाही बरत रही हैं। प्रधान और सचिव ने रुपये तो निकाल लिए हैं, लेकिन बिल आदि देने से कतरा रहे हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों की मानीटरिंग प्रतिदिन हो रही है।
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