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सिर्फ बड़े लोगों’ के लिए होता है ट्रैफिक कंट्रोल
Updated Sun, 08 Oct 2017 09:07 PM IST
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प्रतापगढ़। शहर का यातायात नियंत्रित करने की किसी को फिक्र नहीं है। शहर में कहां जाम लग रहा है, किस चौराहे पर नियमों की अनदेखी से दुर्घटना हो रही है। इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। चौराहों पर सिपाही तो लगाए जाते हैं लेकिन उनकी सीटियां अधिकारियों की गाड़ियां आने पर ही बजती हैं।
शहर का यातायात अनियंत्रित है। हर चौराहे पर नियमों की धज्जियां उड़ाते वाहन सवार आगे निकलने की होड़ में जाम लगा देते हैं। कभी-कभी यातायात को नियंत्रित करने के लिए चौराहों पर होमागार्ड तो कभी यातायात के सिपाही लगा दिए जाते हैं। बावजूद इसके सिपाहियों का ड्यूटी करना न करना बेकार ही रहता है। उसका कारण है कि सिपाही की सीटी तभी बजती है जब किसी अधिकारी का वाहन दिखाई पड़ता है। कई तरह से बजने वाली इस सीटी का मतलब तो आम लोग समझते भी नहीं हैं और न ही उन्हें इसे समझाने का प्रयास ही किया जाता है। यातायात नियंत्रित न करने का ही नतीजा है कि शहर के हर चौराहे और सड़क पर जाम ही लगा रहता है। यदि किसी वीआईपी या फिर जिले के आला कमान को किसी रूट से गुजरना होता है तो उस पर पडने वाले चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही सक्रिय हो जाते हैं। इनके गुजरने के दौरान वह काफी चुस्त दुुरुस्त नजर आते हैं लेकिन गाडिय़ों का काफिला गुजरते ही वह लम्बी सांस लेते हैं और सड़क किनारे रखी अपनी कुर्सियों को उठाकर चल देते हैं।
शहर में तमाम चौराहों पर ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कराया जा पा रहा है। चौराहों के साथ ही सड़कों पर वाहन सवार आगे निकलने की होड़ में ट्रैफिक नियम को तार-तार कर रहे हैं। हर सड़क पर इन दिनों जाम का झाम नजर आता है। इसके चलते दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बावजूद इसके इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसका असर है कि शहर की हर सड़क पर जाम लगा रहता है। शहर के किसी चौराहे पर यदि कोई सिपाही हाथ के इशारे से एक तरफ के ट्रैफिक को रुकने को कहता है तो उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया जाता। साथ खड़े उसके साथी भी इसमें उसकी मदद नहीं करते। ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नियमों की अनदेखी करने वालों पर विभाग के लोग कार्रवाई भी नहीं करते। इसके चलते इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। ऐसे में लोग इसे पुलिस की दिनचर्या समझ लेते हैं। सीओ सिटी का कहना है कि शहर में जाम की समस्या न पैदा हो इसके लिए यातायात के सिपाहियों के साथ ही होमगार्डों की ड्यूटी लगाई जाती है। सिपाहियों के मनमानी की शिकायत मिल रही है। सभी को ड्यूटी के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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शहर का यातायात अनियंत्रित है। हर चौराहे पर नियमों की धज्जियां उड़ाते वाहन सवार आगे निकलने की होड़ में जाम लगा देते हैं। कभी-कभी यातायात को नियंत्रित करने के लिए चौराहों पर होमागार्ड तो कभी यातायात के सिपाही लगा दिए जाते हैं। बावजूद इसके सिपाहियों का ड्यूटी करना न करना बेकार ही रहता है। उसका कारण है कि सिपाही की सीटी तभी बजती है जब किसी अधिकारी का वाहन दिखाई पड़ता है। कई तरह से बजने वाली इस सीटी का मतलब तो आम लोग समझते भी नहीं हैं और न ही उन्हें इसे समझाने का प्रयास ही किया जाता है। यातायात नियंत्रित न करने का ही नतीजा है कि शहर के हर चौराहे और सड़क पर जाम ही लगा रहता है। यदि किसी वीआईपी या फिर जिले के आला कमान को किसी रूट से गुजरना होता है तो उस पर पडने वाले चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही सक्रिय हो जाते हैं। इनके गुजरने के दौरान वह काफी चुस्त दुुरुस्त नजर आते हैं लेकिन गाडिय़ों का काफिला गुजरते ही वह लम्बी सांस लेते हैं और सड़क किनारे रखी अपनी कुर्सियों को उठाकर चल देते हैं।
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शहर में तमाम चौराहों पर ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कराया जा पा रहा है। चौराहों के साथ ही सड़कों पर वाहन सवार आगे निकलने की होड़ में ट्रैफिक नियम को तार-तार कर रहे हैं। हर सड़क पर इन दिनों जाम का झाम नजर आता है। इसके चलते दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बावजूद इसके इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसका असर है कि शहर की हर सड़क पर जाम लगा रहता है। शहर के किसी चौराहे पर यदि कोई सिपाही हाथ के इशारे से एक तरफ के ट्रैफिक को रुकने को कहता है तो उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया जाता। साथ खड़े उसके साथी भी इसमें उसकी मदद नहीं करते। ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नियमों की अनदेखी करने वालों पर विभाग के लोग कार्रवाई भी नहीं करते। इसके चलते इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। ऐसे में लोग इसे पुलिस की दिनचर्या समझ लेते हैं। सीओ सिटी का कहना है कि शहर में जाम की समस्या न पैदा हो इसके लिए यातायात के सिपाहियों के साथ ही होमगार्डों की ड्यूटी लगाई जाती है। सिपाहियों के मनमानी की शिकायत मिल रही है। सभी को ड्यूटी के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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