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झांसा नहीं दे पाएंगे एंबुलेंस चालक, मोबाइल एप से होगी निगरानी 18-38-54
Updated Mon, 04 Sep 2017 07:07 PM IST
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प्रतापगढ़। एंबुलेंस सेवा में लगातार गड़बड़ी की शिकायत को देखते हुए प्रदेश सरकार ने रेडियो टैक्सी कीतर्ज पर इसकी निगरानी करने की तैयारी कर ली है। शासन की ओर से पॉयलट मोबाइल एप सेवा तैयार की गई। जो सभी पॉयलट के मोबाइल पर स्टॉल की जाएगी। जीपीएस से लखनऊ में बैठे अफसर इसकी निगरानी करते रहेंगे। मोबाइल के जरिए उनकी लोकेशन अफसरों को मिलती रहेेगी।
108 व 102 एंबुलेंस चालक सूचना के बाद भी समय से नहीं पहुंच पाते थे। इतना ही नहीं, वह बगैर मरीज को भर्ती कराए ही उन्हें भर्ती दिखाकर अपनी नौकरी चलाते थे। ज्यादा चालक अपनी गाड़ी को कहीं ले जाकर खड़ी कर देते थे। बीच में इसका खुलासा हुआ तो प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में इसकी जांच कराई। जांच में चालक और ईएमटी की पोल खुल गई। इसको देखते हुए शासन ने रेडियो टैक्सी की तर्ज पर अब एंबुलेंस चालक और ईएमटी की निगरानी करने की तैयारी कर ली हेै। शासन के निर्देश पर 108 व 102 एंबुलेंस संस्था अब मोबाइल एप तैयार करवा कर सभी चालकों के मोबाइल में इंस्टाल कराने जा रही है। इसके बाद जीपीएस के जरिए एंबुलेंस की निगरानी की जाएगी। चालक को मीटर रीडिंग की फोटो खींचकर एप पर अपलोड करनी होगी। कॉलर के फोन के बाद लखनऊ कंट्रोल में बैठे एंबुलेंस विभाग के अफसर एप के जरिए यह पता कर लेंगे कि कौन सी एंबुलेंस किस स्थान पर है। चल रही है या फिर खड़ी है। कितनी रफ्तार से चल रही है, कितनी देर पहले पॉयलट ने हार्न बजाया था और वर्तमान लोकेशन क्या है, सब पता चल जाएगा। फिलहाल अभी शुरुआती दौर में 102 एंबुलेंस में यह व्यवस्था शुरू होने जा रही है। सबकुछ ठीक रहा तो 108 एंबुलेंस को भी जल्द ही इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
प्रोग्राम मैनेजर, एंबुलेंस सेवा सतेंद्रु शुक्ला का कहना है कि रेडियो टैक्सी कीतर्ज पर इसकी निगरानी की तैयारी की गई है। शासन की ओर से पॉयलट मोबाइल एप सेवा तैयार की जा रही है। जल्द ही पॉयलटों के मोबाइल पर इंस्टॉल किया जाएगा। सीएमओ डॉ. राजकुमार नैय्यर का कहना है कि बेल्हा में भी कुछ एंबुलेंस चालक की मनमानी सामने आई थी। शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। रेडियो टैक्सी की तर्ज पर एंबुलेंस की निगरानी करने की तैयारी से लोगों की परेशानी कम हो जाएगी। वे समय से अस्पताल पहुंच जाएंगे।
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108 व 102 एंबुलेंस चालक सूचना के बाद भी समय से नहीं पहुंच पाते थे। इतना ही नहीं, वह बगैर मरीज को भर्ती कराए ही उन्हें भर्ती दिखाकर अपनी नौकरी चलाते थे। ज्यादा चालक अपनी गाड़ी को कहीं ले जाकर खड़ी कर देते थे। बीच में इसका खुलासा हुआ तो प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में इसकी जांच कराई। जांच में चालक और ईएमटी की पोल खुल गई। इसको देखते हुए शासन ने रेडियो टैक्सी की तर्ज पर अब एंबुलेंस चालक और ईएमटी की निगरानी करने की तैयारी कर ली हेै। शासन के निर्देश पर 108 व 102 एंबुलेंस संस्था अब मोबाइल एप तैयार करवा कर सभी चालकों के मोबाइल में इंस्टाल कराने जा रही है। इसके बाद जीपीएस के जरिए एंबुलेंस की निगरानी की जाएगी। चालक को मीटर रीडिंग की फोटो खींचकर एप पर अपलोड करनी होगी। कॉलर के फोन के बाद लखनऊ कंट्रोल में बैठे एंबुलेंस विभाग के अफसर एप के जरिए यह पता कर लेंगे कि कौन सी एंबुलेंस किस स्थान पर है। चल रही है या फिर खड़ी है। कितनी रफ्तार से चल रही है, कितनी देर पहले पॉयलट ने हार्न बजाया था और वर्तमान लोकेशन क्या है, सब पता चल जाएगा। फिलहाल अभी शुरुआती दौर में 102 एंबुलेंस में यह व्यवस्था शुरू होने जा रही है। सबकुछ ठीक रहा तो 108 एंबुलेंस को भी जल्द ही इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
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प्रोग्राम मैनेजर, एंबुलेंस सेवा सतेंद्रु शुक्ला का कहना है कि रेडियो टैक्सी कीतर्ज पर इसकी निगरानी की तैयारी की गई है। शासन की ओर से पॉयलट मोबाइल एप सेवा तैयार की जा रही है। जल्द ही पॉयलटों के मोबाइल पर इंस्टॉल किया जाएगा। सीएमओ डॉ. राजकुमार नैय्यर का कहना है कि बेल्हा में भी कुछ एंबुलेंस चालक की मनमानी सामने आई थी। शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। रेडियो टैक्सी की तर्ज पर एंबुलेंस की निगरानी करने की तैयारी से लोगों की परेशानी कम हो जाएगी। वे समय से अस्पताल पहुंच जाएंगे।
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