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मॉडल नहीं बन सके मॉडल स्कूल 19-31-07
Updated Wed, 02 Aug 2017 07:42 PM IST
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मॉडल नहीं बन सके मॉडल स्कूल
रिटायर्ड टीचरों के भरोसे थी संचालन की तैयारी, अब इस साल नहीं होगी पढ़ाई
सितंबर माह से पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू करने का विभाग ने किया था दावा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिले के सात ब्लाकों मेें करोड़ों की लागत से तैयार मॉडल स्कूलों में इस शिक्षासत्र में भी पठन-पाठन नहीं हो सकेगा। चालू शिक्षासत्र में राजकीय इंटर कॉलेजों के अवकाश प्राप्त शिक्षकों द्वारा पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू कराए जाने की तैयारी थी, मगर विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश से बच्चों के मॉडल स्कूल में पढ़ने की हसरतों पर पानी फिर गया है। अब मॉडल स्कूलों का संचालन शिक्षासत्र 2018-19 से ही होगा।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार लाने की दृष्टि से नजीर के तौर जिले को सात मॉडल स्कूलों की सौगात मिली थी। जिले के कालाकांकर, बाबागंज, संग्रामगढ़, शिवगढ़, पट्टी, संडवाचंद्रिका, देवसरा ब्लॉक में 2011 में मॉडल स्कूलों के निर्माण के लिए तीन करोड़ से अधिक की धनराशि मिली और कार्य शुरू हुआ। मॉडल स्कूलों में 2015 में पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू किए जाने का निर्देश था। मगर लचर कार्यप्रणाली के चलते मॉडल स्कूलों का निर्माण कई महीनों तक ठप पड़ा रहा। इस बीच निर्माण कार्य में अनियमितता को लेकर कई बार शिकायत होने पर निर्माण कार्य की जांच भी कराई गई। निर्धारित समय सीमा से दो वर्ष विलंब होने के बाद किसी तरह मॉडल स्कूल बनकर तैयार हुए तो लकदक इमारतों एवं अंदर की व्यवस्था को देखकर क्षेत्रीय लेागों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई इस आवासीय विद्यालय में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए लालायित था। सभी को इंतजार था कि जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैश मॉडल स्कूलों का संचालन शुरू हो, मगर शिक्षकोें की कमी के साथ ही तमाम औपचारिकताओं की दरकार के चलते लकदक करते मॉडल स्कूल में ताला लटकता रहा। इधर, शिक्षासत्र 2017- 2018 में विभाग ने राजकीय विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा मॉडल स्कूलों के संचालन का निर्णय लिया। 12 जुलाई तक इच्छुक शिक्षकों से आवेदन मांगा गया। विभागीय अधिकारियों की मानें तो सितंबर माह से पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशक लखनऊ के आदेश ने मॉडल स्कूलों में पढ़ने की हसरत रखने वाले बच्चों के अरमानों पर पानी फेर दिया। उन्होंने निर्देश दिया है कि चालू शिक्षासत्र में मॉडल स्कूलों का संचालन नहीं होगा। आगामी सत्र 2018-2019 से पठन-पाठन शुरू किया जाएगा। ऐसे में लंबे समय से मॉडल स्कूलों में पढ़ने की हसरत रखने वाले बच्चों की उम्मीदें अधूरी रह गईं। अब देखना यह है कि आगामी शिक्षासत्र में क्या मॉडल स्कूलों का संचालन हो सकेगा या फिर इसी तरह के विभागीय फैसलों से लोगों को दो-चार होना होगा।
वर्जन-
इस सत्र में जल्दबाजी में मॉडल स्कूलों के संचालन का निर्णय लिया गया था। समयाभाव के चलते ढंग से प्रचार-प्रसार न हो पाता। इसे देखते हुए विभाग के उच्च अधिकारियों ने अगले सत्र से मॉडल स्कूलों में पठन-पाठन शुरू करने का निर्णय लिया है।
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डॉ.बृजेश मिश्रा, डीआईओएस।
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रिटायर्ड टीचरों के भरोसे थी संचालन की तैयारी, अब इस साल नहीं होगी पढ़ाई
सितंबर माह से पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू करने का विभाग ने किया था दावा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिले के सात ब्लाकों मेें करोड़ों की लागत से तैयार मॉडल स्कूलों में इस शिक्षासत्र में भी पठन-पाठन नहीं हो सकेगा। चालू शिक्षासत्र में राजकीय इंटर कॉलेजों के अवकाश प्राप्त शिक्षकों द्वारा पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू कराए जाने की तैयारी थी, मगर विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश से बच्चों के मॉडल स्कूल में पढ़ने की हसरतों पर पानी फिर गया है। अब मॉडल स्कूलों का संचालन शिक्षासत्र 2018-19 से ही होगा।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार लाने की दृष्टि से नजीर के तौर जिले को सात मॉडल स्कूलों की सौगात मिली थी। जिले के कालाकांकर, बाबागंज, संग्रामगढ़, शिवगढ़, पट्टी, संडवाचंद्रिका, देवसरा ब्लॉक में 2011 में मॉडल स्कूलों के निर्माण के लिए तीन करोड़ से अधिक की धनराशि मिली और कार्य शुरू हुआ। मॉडल स्कूलों में 2015 में पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू किए जाने का निर्देश था। मगर लचर कार्यप्रणाली के चलते मॉडल स्कूलों का निर्माण कई महीनों तक ठप पड़ा रहा। इस बीच निर्माण कार्य में अनियमितता को लेकर कई बार शिकायत होने पर निर्माण कार्य की जांच भी कराई गई। निर्धारित समय सीमा से दो वर्ष विलंब होने के बाद किसी तरह मॉडल स्कूल बनकर तैयार हुए तो लकदक इमारतों एवं अंदर की व्यवस्था को देखकर क्षेत्रीय लेागों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई इस आवासीय विद्यालय में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए लालायित था। सभी को इंतजार था कि जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैश मॉडल स्कूलों का संचालन शुरू हो, मगर शिक्षकोें की कमी के साथ ही तमाम औपचारिकताओं की दरकार के चलते लकदक करते मॉडल स्कूल में ताला लटकता रहा। इधर, शिक्षासत्र 2017- 2018 में विभाग ने राजकीय विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा मॉडल स्कूलों के संचालन का निर्णय लिया। 12 जुलाई तक इच्छुक शिक्षकों से आवेदन मांगा गया। विभागीय अधिकारियों की मानें तो सितंबर माह से पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशक लखनऊ के आदेश ने मॉडल स्कूलों में पढ़ने की हसरत रखने वाले बच्चों के अरमानों पर पानी फेर दिया। उन्होंने निर्देश दिया है कि चालू शिक्षासत्र में मॉडल स्कूलों का संचालन नहीं होगा। आगामी सत्र 2018-2019 से पठन-पाठन शुरू किया जाएगा। ऐसे में लंबे समय से मॉडल स्कूलों में पढ़ने की हसरत रखने वाले बच्चों की उम्मीदें अधूरी रह गईं। अब देखना यह है कि आगामी शिक्षासत्र में क्या मॉडल स्कूलों का संचालन हो सकेगा या फिर इसी तरह के विभागीय फैसलों से लोगों को दो-चार होना होगा।
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इस सत्र में जल्दबाजी में मॉडल स्कूलों के संचालन का निर्णय लिया गया था। समयाभाव के चलते ढंग से प्रचार-प्रसार न हो पाता। इसे देखते हुए विभाग के उच्च अधिकारियों ने अगले सत्र से मॉडल स्कूलों में पठन-पाठन शुरू करने का निर्णय लिया है।
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डॉ.बृजेश मिश्रा, डीआईओएस।