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यशवंतरी देवी मंदिर : आस्था का स्वागत करती अव्यवस्था
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यशवंतरी देवी मंदिर परिसर के सरोवर के पास पड़ी गंदगी । संवाद
पीलीभीत। जिले की आध्यात्मिक पहचान के प्रतीक यशवंतरी देवी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था का स्वागत अव्यवस्थाएं करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभा के मंच से बड़ी श्रद्धा के साथ इस मंदिर का नाम लिया, लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इसकी सुध नहीं है।
चैत्र नवरात्र चल रहे हैं। मंदिर परिसर में गंदगी की भरमार है। परिसर में लगे नलों से गंदा पानी निकल रहा है। मंदिर आने वाली सड़कों की हालत खराब है। उबड़-खाबड़ परिसर को समतल कराना भी जरूरी नहीं समझा गया है। मंदिरों के सुंदरीकरण के लिए चलाई गईं प्रदेश सरकार की योजनाओं का पिटारा भी मंदिर के लिए नहीं खुला है। (संवाद)
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परिसर में लगे छह नल, तीन से निकलता है बदबूदार पानी
मंदिर परिसर में छह नल लगे हैं। मंदिर के ठीक पास वाले नल का पानी पीने लायक नहीं है। इसी तरह दो अन्य नलों के पानी से भी बदबू आती है। पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि तीन नलों से बदबूदार पानी आ रहा है। कुछ नल, रिबोर लायक हैं। पालिका में इसकी सूचना भी दी जा चुकी है।
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गंदगी इतनी कि खड़ा होना भी मुश्किल
मंदिर के मुख्य भाग को छोड़ दें तो पूरे परिसर में सिर्फ गंदगी ही नजर आती है। बताया जा रहा है कि नवरात्र से पहले परिसर की सफाई ही नहीं कराई गई। मंदिर के जगदंबा तालाब के किनारे भी गंदगी और गंदे पानी का जमाव दिखता है। हैंडपंप के पास भी गंदगी की भरमार हैं।
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दोनों मार्गों में सिर्फ गड्ढे
टनकपुर हाईवे से दो मार्ग यशवंतरी मंदिर के लिए जाते हैं। मुख्य मार्ग के बीच का हिस्सा धंसा हुआ है। जगह-जगह गड्ढे भी हैं। यही हाल दूसरे मार्ग का है। इस मार्ग पर भी जगह-जगह गड्ढे नजर आते हैं। आस्था के इस केंद्र की अव्यवस्थाओं को दूर कराए जाने को प्रशासन भी संजीदा नहीं है।
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अमृत सरोवर नहीं बन सका जगदंबा तालाब
मंदिर परिसर में प्राचीन तालाब को जगदंबा तालाब के नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर के इस तालाब में गंदे पानी का नाला भी गिरता है। प्रदेश सरकार की पुराने और महत्वपूर्ण स्थलों के तालाब को अमृत सरोवर बनाए जाने की योजना से भी यहां पानी को स्वच्छ करने का प्रयास नहीं किया गया है। पालिका और जिला पंचायत दोनों ही मौन हैं। पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि मंदिर परिसर में किसी भी योजना से काम नहीं हो सका है। प्राचीन मंदिर को वंदन योजना में शामिल करने पर भी जोर नहीं दिया गया है।
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मंदिर की आय से कराए जा रहे काम
पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि परिसर में टाइल्स लगवाए जा रहे हैं। बरामदा भी बनाया जाएगा। अन्य काम भी कराए जा रहे हैं। मंदिर में कराए जाने वाले कामों की रूपरेखा बना ली गई है, चुनाव के बाद मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास करेंगे। मंदिर परिसर में जो भी काम कराए जा रहे हैं, वह मंदिर को होने वाली आय से हो रहे हैं।
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नगरपालिका परिषद को साफ-सफाई और नल सही कराए जाने के लिए निर्देश दिया जाएगा। जांच कराएंगे, अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
- संजय कुमार सिंह, डीएम
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चैत्र नवरात्र चल रहे हैं। मंदिर परिसर में गंदगी की भरमार है। परिसर में लगे नलों से गंदा पानी निकल रहा है। मंदिर आने वाली सड़कों की हालत खराब है। उबड़-खाबड़ परिसर को समतल कराना भी जरूरी नहीं समझा गया है। मंदिरों के सुंदरीकरण के लिए चलाई गईं प्रदेश सरकार की योजनाओं का पिटारा भी मंदिर के लिए नहीं खुला है। (संवाद)
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परिसर में लगे छह नल, तीन से निकलता है बदबूदार पानी
मंदिर परिसर में छह नल लगे हैं। मंदिर के ठीक पास वाले नल का पानी पीने लायक नहीं है। इसी तरह दो अन्य नलों के पानी से भी बदबू आती है। पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि तीन नलों से बदबूदार पानी आ रहा है। कुछ नल, रिबोर लायक हैं। पालिका में इसकी सूचना भी दी जा चुकी है।
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गंदगी इतनी कि खड़ा होना भी मुश्किल
मंदिर के मुख्य भाग को छोड़ दें तो पूरे परिसर में सिर्फ गंदगी ही नजर आती है। बताया जा रहा है कि नवरात्र से पहले परिसर की सफाई ही नहीं कराई गई। मंदिर के जगदंबा तालाब के किनारे भी गंदगी और गंदे पानी का जमाव दिखता है। हैंडपंप के पास भी गंदगी की भरमार हैं।
दोनों मार्गों में सिर्फ गड्ढे
टनकपुर हाईवे से दो मार्ग यशवंतरी मंदिर के लिए जाते हैं। मुख्य मार्ग के बीच का हिस्सा धंसा हुआ है। जगह-जगह गड्ढे भी हैं। यही हाल दूसरे मार्ग का है। इस मार्ग पर भी जगह-जगह गड्ढे नजर आते हैं। आस्था के इस केंद्र की अव्यवस्थाओं को दूर कराए जाने को प्रशासन भी संजीदा नहीं है।
अमृत सरोवर नहीं बन सका जगदंबा तालाब
मंदिर परिसर में प्राचीन तालाब को जगदंबा तालाब के नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर के इस तालाब में गंदे पानी का नाला भी गिरता है। प्रदेश सरकार की पुराने और महत्वपूर्ण स्थलों के तालाब को अमृत सरोवर बनाए जाने की योजना से भी यहां पानी को स्वच्छ करने का प्रयास नहीं किया गया है। पालिका और जिला पंचायत दोनों ही मौन हैं। पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि मंदिर परिसर में किसी भी योजना से काम नहीं हो सका है। प्राचीन मंदिर को वंदन योजना में शामिल करने पर भी जोर नहीं दिया गया है।
मंदिर की आय से कराए जा रहे काम
पुजारी योगेश बाजपेयी ने बताया कि परिसर में टाइल्स लगवाए जा रहे हैं। बरामदा भी बनाया जाएगा। अन्य काम भी कराए जा रहे हैं। मंदिर में कराए जाने वाले कामों की रूपरेखा बना ली गई है, चुनाव के बाद मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास करेंगे। मंदिर परिसर में जो भी काम कराए जा रहे हैं, वह मंदिर को होने वाली आय से हो रहे हैं।
नगरपालिका परिषद को साफ-सफाई और नल सही कराए जाने के लिए निर्देश दिया जाएगा। जांच कराएंगे, अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
- संजय कुमार सिंह, डीएम
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यशवंतरी देवी मंदिर परिसर के सरोवर के पास पड़ी गंदगी । संवाद