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Pilibhit News: धरातल पर नहीं कागजों पर काम, स्मार्ट पालिका की राह में रोड़े तमाम
Tue, 26 Aug 2025 11:41 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 26 Aug 2025 11:41 PM IST
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पीलीभीत। नगर पालिका पीलीभीत भले ही खुद को स्मार्ट पालिका बनाने की कवायद में जुटी है। मगर धरातल पर कई अड़चनें हैं। डिजिटल लाइब्रेरी, संग्रहालय, कंप्यूटर लैब आदि के काम तो शुरू हो गए हैं। लेकिन पानी, प्रकाश और साफ-सफाई की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों पर ही चकाचक हैं। शहर की सड़कों पर दोपहर तक गंदगी, कूड़ा खाते छुट्टा जानवर और चोक नाली-नाले नजर आ रहे हैं। शौचालयों में ताला लगा रहता है। एफएसटीपी का संचालन भी कागजों पर ही दौड़ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की जिला मुख्यालय की नगर पालिकाओं को स्मार्ट पालिका में बदलने की घोषणा की है। चार से दस करोड़ तक की धनराशि भी स्वीकृत करने की बात कही जा रही है। इसको लेकर जिला मुख्यालय की नगर पालिका को डिजिटल बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। पूर्व में दो सदस्यीय टीम ने आकर स्थलीय निरीक्षण भी किया है। नगर पालिका के सामने पूर्व में संचालित मैस्टन पब्लिक स्कूल के मैदान में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए दो मंजिला इमारत का निर्माण भी शुरू किया जा चुका है। मगर शहर को स्मार्ट पालिका का नाम देने के लिए नगर पालिका अभी काफी दूर है।
कहीं ताला तो किसी शौचालय में गंदगी ने डेरा डाला
शहर में स्टेशन से लेकर बाजार तक सिर्फ दो सार्वजनिक शौचालय बने हैं। इसमें गंदगी इस कदर है कि आमजन जाने से कतराते हैं। वहीं एकता सरोवर पार्क के पास बने पिंक टॉयलेट में भी गंदगी का डेरा है। जाना तो दूर पास से निकलना भी दूभर होता है। शहर में दोपहर तक डलावघरों से कूड़ा नहीं उठाया जाता है। गोहनिया चौराहे के पास बना ई-शौचालय संचालित ही नहीं हुआ है। डिग्री कॉलेज चौराहे के समीप बने शौचालय में अधिकांश समय ताला ही लगा रहता है।
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कचरे में भोजन तलाशते हैं छुट्टा गोवंश
शहर के प्रमुख मार्गों के साथ ही गली-मोहल्लों की सड़कों पर छुट्टा पशु विचरण करते नजर आते हैं। सुबह के समय जानवरों का झुंड डलावघरों और सड़क पर लगे कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते दिखता हैं। गोहनिया चौराहे से स्टेडियम जाने वाली सड़क के डलावघर में जानवरों का झुंड पूरे समय नजर आता है। इसके अलावा सुनगढ़ी थाने से छतरी चौराहा मार्ग, राम इंटर कॉलेज मार्ग, मुख्य बाजार में कई स्थानों पर छुट्टा जानवर घूमते दिखते हैं। कान्हा गोशाला का निर्माण अभी अधूरा है।
प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर दुरुस्त
शहर में प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर ही चकाचक है। रात के समय प्रमुख मार्गों के अलावा बाजार में कई स्थानों पर अंधेरा रहता है। नगरपालिका का जलकल विभाग शहर में जगह-जगह लीक पेयजल पाइपलाइन को दुरुस्त नहीं कर सका है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति बाधित होने का खेल तो कई महीने से जारी है।
इन समस्याओं का समाधान निकले तब बने बात
- शहर की सफाई व्यवस्था और डलावघरों से कूड़ा उठाए जाने की व्यवस्था में सुधार हो।
- नालों में जमा गंदगी और जलनिकासी के प्रबंध कागजों के बजाय धरातल पर बेहतर करने होंगे।
- अतिक्रमण से कराहती शहर की सड़कों पर भी नगरपालिका को ध्यान देना होगा।
- आए दिन ठप होती पेयजल आपूर्ति में सुधार भी आवश्यक है। प्रकाश व्यवस्था को भी सुधार की दरकार है।
- शौचालयों के संचालन के प्रति जिम्मेदारों को सजगता दिखानी होगी। लटकते ताले दावों की पोल खोलते हैं।
- वेडिंग जोन का निर्माण कराया जाए।
वर्जन
कूड़ाघरों से नियमित कूड़ा उठाया जा रहा है। सफाई नायकों को वार्ड में भी सफाई के निर्देश लगातार दिए जा रहे हैं। कूड़ा जलाने की बात कही सामने नहीं आई है।
संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की जिला मुख्यालय की नगर पालिकाओं को स्मार्ट पालिका में बदलने की घोषणा की है। चार से दस करोड़ तक की धनराशि भी स्वीकृत करने की बात कही जा रही है। इसको लेकर जिला मुख्यालय की नगर पालिका को डिजिटल बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। पूर्व में दो सदस्यीय टीम ने आकर स्थलीय निरीक्षण भी किया है। नगर पालिका के सामने पूर्व में संचालित मैस्टन पब्लिक स्कूल के मैदान में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए दो मंजिला इमारत का निर्माण भी शुरू किया जा चुका है। मगर शहर को स्मार्ट पालिका का नाम देने के लिए नगर पालिका अभी काफी दूर है।
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कहीं ताला तो किसी शौचालय में गंदगी ने डेरा डाला
शहर में स्टेशन से लेकर बाजार तक सिर्फ दो सार्वजनिक शौचालय बने हैं। इसमें गंदगी इस कदर है कि आमजन जाने से कतराते हैं। वहीं एकता सरोवर पार्क के पास बने पिंक टॉयलेट में भी गंदगी का डेरा है। जाना तो दूर पास से निकलना भी दूभर होता है। शहर में दोपहर तक डलावघरों से कूड़ा नहीं उठाया जाता है। गोहनिया चौराहे के पास बना ई-शौचालय संचालित ही नहीं हुआ है। डिग्री कॉलेज चौराहे के समीप बने शौचालय में अधिकांश समय ताला ही लगा रहता है।
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कचरे में भोजन तलाशते हैं छुट्टा गोवंश
शहर के प्रमुख मार्गों के साथ ही गली-मोहल्लों की सड़कों पर छुट्टा पशु विचरण करते नजर आते हैं। सुबह के समय जानवरों का झुंड डलावघरों और सड़क पर लगे कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते दिखता हैं। गोहनिया चौराहे से स्टेडियम जाने वाली सड़क के डलावघर में जानवरों का झुंड पूरे समय नजर आता है। इसके अलावा सुनगढ़ी थाने से छतरी चौराहा मार्ग, राम इंटर कॉलेज मार्ग, मुख्य बाजार में कई स्थानों पर छुट्टा जानवर घूमते दिखते हैं। कान्हा गोशाला का निर्माण अभी अधूरा है।
प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर दुरुस्त
शहर में प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर ही चकाचक है। रात के समय प्रमुख मार्गों के अलावा बाजार में कई स्थानों पर अंधेरा रहता है। नगरपालिका का जलकल विभाग शहर में जगह-जगह लीक पेयजल पाइपलाइन को दुरुस्त नहीं कर सका है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति बाधित होने का खेल तो कई महीने से जारी है।
इन समस्याओं का समाधान निकले तब बने बात
- शहर की सफाई व्यवस्था और डलावघरों से कूड़ा उठाए जाने की व्यवस्था में सुधार हो।
- नालों में जमा गंदगी और जलनिकासी के प्रबंध कागजों के बजाय धरातल पर बेहतर करने होंगे।
- अतिक्रमण से कराहती शहर की सड़कों पर भी नगरपालिका को ध्यान देना होगा।
- आए दिन ठप होती पेयजल आपूर्ति में सुधार भी आवश्यक है। प्रकाश व्यवस्था को भी सुधार की दरकार है।
- शौचालयों के संचालन के प्रति जिम्मेदारों को सजगता दिखानी होगी। लटकते ताले दावों की पोल खोलते हैं।
- वेडिंग जोन का निर्माण कराया जाए।
वर्जन
कूड़ाघरों से नियमित कूड़ा उठाया जा रहा है। सफाई नायकों को वार्ड में भी सफाई के निर्देश लगातार दिए जा रहे हैं। कूड़ा जलाने की बात कही सामने नहीं आई है।
संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद