{"_id":"60296e348ebc3ee9276a194b","slug":"wild-animal-pilibhit-news-bly4372705124","type":"story","status":"publish","title_hn":"आबादी में सालों से रहने वाले बाघों के स्वभाव का अध्ययन करेगी टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आबादी में सालों से रहने वाले बाघों के स्वभाव का अध्ययन करेगी टीम
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पीलीभीत। मानव आबादी के बीच आठ सालों से डेरा जमाए 10 से अधिक बाघों के स्वभाव का अध्ययन वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के विशेषज्ञ करेंगे। यह कवायद अमरिया के रिहायशी इलाके में रह रहे बाघों को पकड़कर अन्य जगह शिफ्टिंग को लेकर शुरू की गई है। जल्द ही विशेषज्ञों की टीम यहां पहुंचने वाली है। हालांकि टीम केवल बाघों के स्वभाव का अध्ययन करेगी। बाघों की गतिविधियों को परखने के बाद डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेजेंगे। बाघों की शिफ्टिंग का अंतिम निर्णय एनटीसीए ही करेगा।
रुहेलखंड के एक मात्र सघन जंगल, जिसे अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के नाम से जाना जाता है। करीब 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले इस जंगल में 65 से अधिक बाघ है। पीटीआर घोषित होने के बाद यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। यहां मुद्दा सिर्फ इंसानी जिंदगी पर मंडरा रहे खतरे का नहीं है, बल्कि बाघ की अस्मिता पर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे ज्यादा खतरा अमरिया क्षेत्र में पिछले आठ साल से जंगल से बाहर घूम रहे 10 से अधिक बाघों पर है। वर्ष 2012 में जंगल से आई एक बाघिन और दो शावक अमरिया क्षेत्र के शुक्ला फार्म पहुंचे थे। एक बाघिन और दो शावकों से शुरू हुआ सिलसिला आज आठ साल में 10 से अधिक बाघों तक पहुंच चुका है। करीब साल भर पहले प्रदेश के तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव सुनील पांडे ने इन बाघों को सुरक्षित प्राकृतिक स्थान उपलब्ध कराने को शिफ्टिंग की कवायद शुरू की थी। उन्होंने डब्ल्यूआईआई को पत्र भेजकर बाघों की शिफ्टिंग के लिए अनुमति और मदद का आग्रह किया। इस बीच एनटीसीए के एक अफसर यहां दौरा भी कर चुके है, मगर मामला ठंडा पड़ता जा रहा था।
डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट पर होगी बाघों की शिफ्टिंग
मानव आबादी में रहने वाले 10 से अधिक बाघों की शिफ्टिंग को लेकर साल भर बाद प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। वन अफसरों के मुताबिक वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों की टीम अमरिया पहुंचकर बाघों के बदलते स्वभाव का अध्ययन करेगी। इसके बाद विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजेंगे। फिलहाल यह सबकुछ डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर निर्भर करता है। बाघों की शिफ्टिंग का अंतिम फैसला एनटीसीए की ओर से लिया जाएगा। हालांकि डब्ल्यूआईआई की टीम कुछ माह पूर्व यहां आ चुकी है, मगर वन अफसरों से बाघों की जानकारी लेने के बाद लौट गई थी।
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इंसानों पर हमलावर नहीं हुए अमरिया के बाघ
अमरिया क्षेत्र में बाघों को 10 से अधिक बाघों का कुनबा पिछले आठ सालों से आबादी क्षेत्र में ही प्रवास कर रहा है। खास बात यह है कि इन आठ सालों में यह बाघ कभी इंसानों पर हमलावर नहीं हुए। साल बीतने के साथ स्थानीय ग्रामीणों के भीतर से बाघों का डर जाता रहा। बाघों का मूवमेंट विशनपुर, गजरौला फार्म, शुक्ला फार्म, पैरी फार्म, कटैइया बढ़नी के आसपास रहता है। अब डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों की टीम यहां आकर बाघों के बदले स्वभाव और उनके प्रवास आदि के बारे में अध्ययन करेगी। यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट के बाद एनटीसीए आबादी में रहने वाले इन बाघों को जंगल में शिफ्ट करने की इजाजत दे सकता है।
अमरिया क्षेत्र में 10 से अधिक बाघ जंगल क्षेत्र से बाहर घूम रहे हैं। इन बाघों की अन्य जगह पर शिफ्टिंग को लेकर वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक टीम यहां आकर बाघों के स्वभाव का अध्ययन करेगी। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजेगी।
- संजीव कुमार, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग
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रुहेलखंड के एक मात्र सघन जंगल, जिसे अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के नाम से जाना जाता है। करीब 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले इस जंगल में 65 से अधिक बाघ है। पीटीआर घोषित होने के बाद यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। यहां मुद्दा सिर्फ इंसानी जिंदगी पर मंडरा रहे खतरे का नहीं है, बल्कि बाघ की अस्मिता पर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे ज्यादा खतरा अमरिया क्षेत्र में पिछले आठ साल से जंगल से बाहर घूम रहे 10 से अधिक बाघों पर है। वर्ष 2012 में जंगल से आई एक बाघिन और दो शावक अमरिया क्षेत्र के शुक्ला फार्म पहुंचे थे। एक बाघिन और दो शावकों से शुरू हुआ सिलसिला आज आठ साल में 10 से अधिक बाघों तक पहुंच चुका है। करीब साल भर पहले प्रदेश के तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव सुनील पांडे ने इन बाघों को सुरक्षित प्राकृतिक स्थान उपलब्ध कराने को शिफ्टिंग की कवायद शुरू की थी। उन्होंने डब्ल्यूआईआई को पत्र भेजकर बाघों की शिफ्टिंग के लिए अनुमति और मदद का आग्रह किया। इस बीच एनटीसीए के एक अफसर यहां दौरा भी कर चुके है, मगर मामला ठंडा पड़ता जा रहा था।
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डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट पर होगी बाघों की शिफ्टिंग
मानव आबादी में रहने वाले 10 से अधिक बाघों की शिफ्टिंग को लेकर साल भर बाद प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। वन अफसरों के मुताबिक वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों की टीम अमरिया पहुंचकर बाघों के बदलते स्वभाव का अध्ययन करेगी। इसके बाद विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजेंगे। फिलहाल यह सबकुछ डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर निर्भर करता है। बाघों की शिफ्टिंग का अंतिम फैसला एनटीसीए की ओर से लिया जाएगा। हालांकि डब्ल्यूआईआई की टीम कुछ माह पूर्व यहां आ चुकी है, मगर वन अफसरों से बाघों की जानकारी लेने के बाद लौट गई थी।
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इंसानों पर हमलावर नहीं हुए अमरिया के बाघ
अमरिया क्षेत्र में बाघों को 10 से अधिक बाघों का कुनबा पिछले आठ सालों से आबादी क्षेत्र में ही प्रवास कर रहा है। खास बात यह है कि इन आठ सालों में यह बाघ कभी इंसानों पर हमलावर नहीं हुए। साल बीतने के साथ स्थानीय ग्रामीणों के भीतर से बाघों का डर जाता रहा। बाघों का मूवमेंट विशनपुर, गजरौला फार्म, शुक्ला फार्म, पैरी फार्म, कटैइया बढ़नी के आसपास रहता है। अब डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों की टीम यहां आकर बाघों के बदले स्वभाव और उनके प्रवास आदि के बारे में अध्ययन करेगी। यदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट के बाद एनटीसीए आबादी में रहने वाले इन बाघों को जंगल में शिफ्ट करने की इजाजत दे सकता है।
अमरिया क्षेत्र में 10 से अधिक बाघ जंगल क्षेत्र से बाहर घूम रहे हैं। इन बाघों की अन्य जगह पर शिफ्टिंग को लेकर वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक टीम यहां आकर बाघों के स्वभाव का अध्ययन करेगी। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजेगी।
- संजीव कुमार, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग