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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Then SDM and DFO There have been also victims of Kbjedaron

तत्कालीन एसडीएम और डीएफओ  भी हो चुके हैं कब्जेदारों के शिकार

Mon, 06 Jun 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Mon, 06 Jun 2016 11:03 PM IST
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तराई क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गांवों में सैकड़ों एकड़ भूमि बरसों से अवैध कब्जेदारों के हाथों में है। तराई की इस हरित पट्टी में इतने बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण में सरकारी मशीनरी की लापरवाही रही है जो कभी भी देर सवेर संघर्ष को जन्म दे सकती हैं। बरसों पूर्व एक एसडीएम असीदुल्ला खां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में बरुआ कुठारा में घायल हो चुके हैं, जबकि गत वर्ष बूंदीभूड़ में कब्जा हटवाने गए डीएफओ कैलाश प्रकाश समेत उनकी टीम को ऐसी ही घटना का सामना करना पड़ा था।
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जनपद की हरित पट्टी के रुप में प्रसिद्ध तराई इलाके के अधिकांश गांवों में ग्राम समाज व वन विभाग की सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जेदार काबिज हैं। हरित पट्टी की कस्टोडियन भूमि पर भी कब्जे हैं। ऐसी सभी भूमि पर कब्जों की शुरूआत धीरे-धीरे शुरू हुई थी। ऐसी भूमि पर कब्जा करने वाले गरीब भूमिहीन ही थे। इस कारण शुरूआती दौर में जेबें गरम कर उन्हें जमीन पर अवैध तरीके से बैठने को मौका दे दिया गया। जो अब नासूर बनता जा रहा है। 
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बरुआ कुठारा में आज तक नहीं हटे कब्जेदार 
बराही जंगल से सटे बरुआ कुठारा में पूर्व में जबरन लोगों ने जमीनें हथिया ली थीं। वन विभाग भूमि कब्जा नहीं हटा सका था, तो विभागीय केस काट दिए गए। उसके बाद तत्कालीन एसडीएम हसीदुल्ला खां के नेतृत्व में जब वन व पुलिस विभाग की टीम कब्जा हटाने गई तो महिलाओं ने ईंट पत्थर और मृत पशुओं की हड्डियां फेंककर उनको घायल कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी आज तक कब्जा नहीं लिया जा सका। 
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टाइगर रिजर्व की सैकड़ों एकड़ भूमि अतिक्रमित
राजपुर ताल्लुके महराजपुर, बैल्हा, गुन्हान, रमनगरा तथा लग्गाभग्गा का पूर्वी भाग में टाइगर रिजर्व की सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे कर खेती की जा रही है। बावजूद इसके वन और राजस्व विभाग के नंबरों व नक्शों में आज तक मिलान नहीं हो सका और इसी का फायदा अतिक्रमणकारी उठाते आ रहे हैं।

यहां भी कब्जे हटाने पर हो सकता है बड़ा विवाद 
वर्ष 1965 से 70 तक यहां आए पुनर्वासित बंगाली परिवारों को रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, गभिया सहराई, नौजल्हा नंबर एक व दो में पुनर्वासन विभाग की ओर से पांच-पांच एकड़ भूमि और आवास देकर बसाया गया था। यहां कई विभागों के कार्यालय और सरकारी स्कूल भी हैं, लेकिन वर्ष 1999 में गभिया सहराई को छोड़ शेष समूची भूमि राजस्व अभिलेखों में वन भूमि दर्ज कर दी गई। ऐसे में यदि कभी वन विभाग इन्हें हटाता है तो यहां भी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। 

बूंदीभूड़ में भी मुंह की खानी पड़ी वन महकमे को
गत वर्ष नौजल्हा के 48 परिवार भूमि कटने पर उन्हें बूंदीभूड़ के कुछ नेताओं ने अपनी ग्राम समाज की भूमि बताते हुए ऐसे इलाके में बिठा दिया, जिसको टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश अपने टाइगर रिजर्व का कोर एरिया बता रहे थे। सीमांकन के दौरान राजस्व व वन विभाग के अभिलेख में तालमेल नहीं बैठा। डीएफओ पुलिस को लेकर कब्जे हटाने पहुंचे तो महिलाओं ने सभी पर डंडे बरसाकर खदेड़ दिया था। 


बराही क्षेत्र में जहां भी टाइगर रिजर्व की भूमि पर अतिक्रमण है। वहां कई बार हटाने के प्रयास किए जा चुके हैं। कोर्ट की भी शरण ली गई है, ताकि टाइगर रिजर्व की भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जा सके।
- अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, बराही 
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