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सपा प्रत्याशी की घेराबंदी को एकजुट हुए विरोधी
पीलीभीत
Updated Mon, 25 Jan 2016 11:07 PM IST
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ब्लाक प्रमुख चुनाव में सपा प्रत्याशी को हराने के लिए सारे विरोधी प्रत्याशी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने इसके लिए संयुक्त मोर्चा का गठन किया है। सोमवार को हुई मोर्चा की बैठक मेें सपा प्रत्याशी के खिलाफ साझा प्रत्याशी मैदान में उतारने और उसे हर कीमत पर भारी मतों से जिताने का निर्णय लिया गया।
सपा से कोई भी प्रत्याशी घोषित होता, विरोध होना तो पहले ही तय हो चुका था। वजह अपने परिवार की महिला को सपा का प्रत्याशी घोषित कराने को सपा के एक पूर्व जिला जिलाध्यक्ष सहित कई लोग लाइन में लगे थे। सपा का प्रत्याशी घोषित होते ही पार्टी से टिकट की लाइन में लगे लोगों ने उसी दिन से विरोध शुरू कर दिया था। विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ने का मूड बना चुके सभी प्रत्याशी एक बैनर के नीचे आ गए हैं। इन लोगों की रविवार को एक वकील के आवास पर बैठक की। सोमवार को सहकारी गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मीकांत भारद्वाज के आवास पर हुई बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इसमें संयुक्त मोर्चा का गठन कर तय हुआ कि संयुक्त मोर्चा की ओर से लक्ष्मीकांत भारद्वाज की पत्नी और असलम कुरैशी की पुत्री का ब्लाक प्रमुख पद के लिए नामांकन कराया जाएगा। नामांकन पत्रों की जांच के बाद इसमें से एक प्रत्याशी का नाम वापस ले लिया जाएगा। सपा के घोषित प्रत्याशी के विरोध में चुनाव लड़ने वाले एक प्रत्याशी को सभी लोग चुनाव जिताने को जुटेंगे। बैठक के बाद इसकी जानकारी लक्ष्मीकांत भारद्वाज, असलम कुरैशी, मंजीत सिंह ने मोबाइल पर दी। बैठक में उक्त लोगों के अलावा अतेंद्र पाल सिंह, रंजीत सिंह, जलालुद्दीन आदि थे।
सपा में 2005 में भी हुआ था घमासान
ब्लाक प्रमुख के वर्ष 2005 के चुनाव में भी सपा में घमासान हुआ था। एक झंडा, बैनर लेकर दो लोग अपने को सपा का प्रत्याशी बताकर चुनाव प्रचार में उतरे थे। हालांकि तब सपा ने अधिकृत रूप से अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया था। प्रत्याशी के विवाद को लेकर ही तब तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष गोपाल कृष्ण सक्सेना के आवास में प्रधान राजू पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस चुनाव में पूर्व ब्लाक प्रमुख और भाजपा समर्थित प्रत्याशी नवीन सिंह की पत्नी शोभा सिंह की जीत हुई थी।
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रेट बढने पर खुश है बीडीसी सदस्य
ब्लाक प्रमुख चुनाव किसी हाल में भी जीतने को लेकर प्रत्याशियों ने क्षेत्र पंचायत सदस्य का परिणाम घोषित होते ही मतदाताओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे। कुछ प्रत्याशियों ने तो कई बीडीसी सदस्यों के जीत प्रमाण पत्र जमा कर उनसे पूरी डील भी तय कर ली थी। सूत्र बताते हैं कि संयुक्त मोर्चा गठन की जानकारी पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों के भाव बढ गए हैं।
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सपा से कोई भी प्रत्याशी घोषित होता, विरोध होना तो पहले ही तय हो चुका था। वजह अपने परिवार की महिला को सपा का प्रत्याशी घोषित कराने को सपा के एक पूर्व जिला जिलाध्यक्ष सहित कई लोग लाइन में लगे थे। सपा का प्रत्याशी घोषित होते ही पार्टी से टिकट की लाइन में लगे लोगों ने उसी दिन से विरोध शुरू कर दिया था। विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ने का मूड बना चुके सभी प्रत्याशी एक बैनर के नीचे आ गए हैं। इन लोगों की रविवार को एक वकील के आवास पर बैठक की। सोमवार को सहकारी गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मीकांत भारद्वाज के आवास पर हुई बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इसमें संयुक्त मोर्चा का गठन कर तय हुआ कि संयुक्त मोर्चा की ओर से लक्ष्मीकांत भारद्वाज की पत्नी और असलम कुरैशी की पुत्री का ब्लाक प्रमुख पद के लिए नामांकन कराया जाएगा। नामांकन पत्रों की जांच के बाद इसमें से एक प्रत्याशी का नाम वापस ले लिया जाएगा। सपा के घोषित प्रत्याशी के विरोध में चुनाव लड़ने वाले एक प्रत्याशी को सभी लोग चुनाव जिताने को जुटेंगे। बैठक के बाद इसकी जानकारी लक्ष्मीकांत भारद्वाज, असलम कुरैशी, मंजीत सिंह ने मोबाइल पर दी। बैठक में उक्त लोगों के अलावा अतेंद्र पाल सिंह, रंजीत सिंह, जलालुद्दीन आदि थे।
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सपा में 2005 में भी हुआ था घमासान
ब्लाक प्रमुख के वर्ष 2005 के चुनाव में भी सपा में घमासान हुआ था। एक झंडा, बैनर लेकर दो लोग अपने को सपा का प्रत्याशी बताकर चुनाव प्रचार में उतरे थे। हालांकि तब सपा ने अधिकृत रूप से अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया था। प्रत्याशी के विवाद को लेकर ही तब तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष गोपाल कृष्ण सक्सेना के आवास में प्रधान राजू पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस चुनाव में पूर्व ब्लाक प्रमुख और भाजपा समर्थित प्रत्याशी नवीन सिंह की पत्नी शोभा सिंह की जीत हुई थी।
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रेट बढने पर खुश है बीडीसी सदस्य
ब्लाक प्रमुख चुनाव किसी हाल में भी जीतने को लेकर प्रत्याशियों ने क्षेत्र पंचायत सदस्य का परिणाम घोषित होते ही मतदाताओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे। कुछ प्रत्याशियों ने तो कई बीडीसी सदस्यों के जीत प्रमाण पत्र जमा कर उनसे पूरी डील भी तय कर ली थी। सूत्र बताते हैं कि संयुक्त मोर्चा गठन की जानकारी पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों के भाव बढ गए हैं।