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सिल्ट निकालने के नाम पर ठिकाने लगाए दस करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 19 May 2016 11:25 PM IST
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हरदोई नहर में सिल्ट निकालने के नाम पर दस करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए गए, लेकिन जब नहर बंद की गई तो उसमें सिल्ट साफ दिखाई देने लगी। वजह, जो सिल्ट मशीनों से नहर के किनारे पानी के बहाव वाले इलाके में डाली थी, वह पानी छोड़ने से पुन: नहर में चली गई। यही हाल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये के खूंटे लगाने और पिचिंग मरम्मत का भी रहा।
प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई को पानी देने वाली हरदोई ब्रांच में पानी की क्षमता बढ़ाने को सिल्ट सफाई के लगभग दस करोड़ और नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने को छह करोड़ से अधिक धनराशि आवंटित की गई थी। यह कार्य सिंचाई विभाग द्वारा कार्य कराया था। इसमें नहर के भीतरी हिस्से से जो सिल्ट निकाली गई थी, वह नहर के दोनों ओर पानी के बहाव वाले किनारे से सटाकर डाली गई। नहर के अधिकांश स्थानों पर पटरियों व नहर को चौड़ा करने को मशीनों से जो मिट्टी काटकर बाहर फेंकी गई थी, वहां सिल्ट निकालने का कार्य दर्शा दिया गया। इधर जब नहर में पानी छोड़ा गया तो बहाव वाले किनारों से सटी रेत पुन: नहर में चली गई। उधर, जब एक सप्ताह बाद नहर बंद की गई तो जहां से रेत निकालना दर्शाया गया था, वहां पुन: रेत के ढेर दिखाई देने लगे। माधोटांडा से बाइफरकेशन जाने वाले मार्ग से डगा गांव के सामने एवं जंगल क्षेत्र में नहर के भीतरी हिस्से में रेत साफ दिखाई दे रही है। इसके अलावा करोड़ों रुपया नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने के नाम पर बांस के खूंटे लगा दिए गए, जबकि इतनी धनराशि से स्थाई कार्य कराए जा सकते थे।
किसान नेता ने की जांच कराने की मांग
भाकियू के जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने हरदोई नहर में हुई सिल्ट सफाई व मरम्मत की जांच कराने की मांग को लेकर डीएम व मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। बताया कि इसी सप्ताह प्रदेश के मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव सिंचाई से मिलकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
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नहर में पर्याप्त मात्रा में सिल्ट सफाई कराई गई है ताकि नहर में सिंचाई की क्षमता बढ़ाई जा सके। नहर की सिल्ट सफाई पर जो रेत बाहर डाली गई है, उसमें कुछ स्थानों पर मामूली कुछ पौध क्षतिग्रस्त हुई है, लेकिन मरम्मत के लिए रेत को निकाला जाना जरूरी थी।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता हेड वर्क्स खंड
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प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई को पानी देने वाली हरदोई ब्रांच में पानी की क्षमता बढ़ाने को सिल्ट सफाई के लगभग दस करोड़ और नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने को छह करोड़ से अधिक धनराशि आवंटित की गई थी। यह कार्य सिंचाई विभाग द्वारा कार्य कराया था। इसमें नहर के भीतरी हिस्से से जो सिल्ट निकाली गई थी, वह नहर के दोनों ओर पानी के बहाव वाले किनारे से सटाकर डाली गई। नहर के अधिकांश स्थानों पर पटरियों व नहर को चौड़ा करने को मशीनों से जो मिट्टी काटकर बाहर फेंकी गई थी, वहां सिल्ट निकालने का कार्य दर्शा दिया गया। इधर जब नहर में पानी छोड़ा गया तो बहाव वाले किनारों से सटी रेत पुन: नहर में चली गई। उधर, जब एक सप्ताह बाद नहर बंद की गई तो जहां से रेत निकालना दर्शाया गया था, वहां पुन: रेत के ढेर दिखाई देने लगे। माधोटांडा से बाइफरकेशन जाने वाले मार्ग से डगा गांव के सामने एवं जंगल क्षेत्र में नहर के भीतरी हिस्से में रेत साफ दिखाई दे रही है। इसके अलावा करोड़ों रुपया नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने के नाम पर बांस के खूंटे लगा दिए गए, जबकि इतनी धनराशि से स्थाई कार्य कराए जा सकते थे।
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किसान नेता ने की जांच कराने की मांग
भाकियू के जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने हरदोई नहर में हुई सिल्ट सफाई व मरम्मत की जांच कराने की मांग को लेकर डीएम व मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। बताया कि इसी सप्ताह प्रदेश के मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव सिंचाई से मिलकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
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नहर में पर्याप्त मात्रा में सिल्ट सफाई कराई गई है ताकि नहर में सिंचाई की क्षमता बढ़ाई जा सके। नहर की सिल्ट सफाई पर जो रेत बाहर डाली गई है, उसमें कुछ स्थानों पर मामूली कुछ पौध क्षतिग्रस्त हुई है, लेकिन मरम्मत के लिए रेत को निकाला जाना जरूरी थी।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता हेड वर्क्स खंड