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बाघों के लिए मुफीद है पीलीभीत टाइगर रिजर्व, लगातार बढ़ रही संख्या 16-46-30
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ीलीभीत टाइगर रिजर्व में विचरण करता बाघ। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तराई के जंगल को आठ साल पहले टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। वन्यजीवों के लिए यहां का वातावरण मुफीद साबित हो रहा है। इसीलिए टाइगर रिजर्व में संसाधनों की कमी के बावजूद 2014-2018 के बीच बाघों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हुई। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड भी मिला। चीतल, सांभर, भालू, बारहसिंघा का कुनबा भी बढ़ रहा है।
जनपद का जंगल वैसे तो शिकार के मामले में ब्रिटिश काल से ही सुर्खियों में रहा है। पीलीभीत वन प्रभाग वर्ष 1805 में स्थापित हुआ। इसे टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया वर्ष 2008 में शुरू की गई। वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। वर्ष 2014 में बाघों की संख्या मात्र 25 थी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार काम हुए। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2018 में बाघों की संख्या बढ़कर 65 हो गई। इस उपलब्धि के लिए पूरे विश्व में पीलीभीत टाइगर रिजर्व की चर्चा हुई।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) में पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता के प्रमुख मिस मिंडोरी पैक्सटन की ओर से नवंबर 2020 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर का टाइगर एक्स टू अवार्ड दिया गया। विश्व के 13 ऐसे देश हैं, जहां टाइगर पाया जाता है। इन देशों में सिर्फ भारत के पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघों की संख्या बढ़ाने पर यह अवार्ड मिला था।
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एक बार फिर बाघों की गणना हुई है। इसके परिणाम इस वर्ष के अंत तक आएंगे। उम्मीद है कि बाघों की संख्या और बढ़ेगी। बाघों की बढ़ती संख्या के चलते पर्यटक यहां खासकर बाघ को करीब से देखने की आस लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के जंगल की खूबसूरती, जंगल के बीच नदियों के जाल व शारदा डैम के पास बनाया गया चूका बीच पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है। खास बात यह भी है कि बाघ के साथ-साथ तेंदुए का कुनबा भी बढ़ रहा है।
बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही तेंदुए जंगल छोड़ बाहर के इलाकों में पनाह ले लेते हैं। इसके संकेत भी लगातार मिल रहे हैं। जंगल से बाहर निकले कई तेंदुओं को पिंजरें में कैद कर जंगल क्षेत्र के सुरक्षित स्थानों में छोड़ा जा चुका है। तेंदुओं की रिहायशी इलाकों में बढ़ती चहलकदमी भी बाघ और तेंदुओं की बढ़ती संख्या की ओर इशारा करती है।
फैक्ट फाइल
- 73024.98 हेक्टेयर में फैला है पीलीभीत टाइगर रिजर्व
- पीटीआर के क्षेत्र को पांच वन रेंज में बांटा गया है
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- वर्ष 2013 से 2016 तक बढ़े वन्यजीवों की संख्या पर नजर
- चीतल - 3814- 5776
- सांभर - 78- 255
- जंगली सुअर - 4309- 5800
- भालू- 103 से 113
- बाहर सिंघा - 340 - 945
वर्ष 2016 के बाद गणना नहीं हो सकी
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विलुप्त प्रजाति चैसिंगा भी बढ़ा रही जंगल की खूबसूरती
तराई के इस जंगल में चैसिंगा की मौजूदगी को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ आश्चर्य मानते हैं। उनका मानना है कि चैसिंगा खासकर राजस्थान जैसे सूखे और खुले क्षेत्रों में पाया जाता है। वर्ष 2010 में यहां सबसे पहले चैसिंगा देखा गया। उसके बाद कई बार इसकी मौजूदगी बाघों की गणना के लिए लगाए गए कैमरों व जंगल भ्रमण के दौरान वनकर्मियों को देखने को मिलती है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2016 तक पीलीभीत के जंगल में चैसिंगा की संख्या 14 है।
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हिरन की पांच प्रजातियां हैं मौजूद
पीलीभीत के जंगल में हिरन प्रजाति की संख्या भी बेहतर है। हिरन की पांच प्रजाति टाइगर रिजर्व में पाई जाती हैं। इनमें सांभर, बारहसिंगा, चीतल, पाढ़ा और कांकड़ शामिल हैं। यह पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।
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तृणभोजी वन्यजीवों में हो रहा इजाफा
बाघ, तेंदुए के साथ-साथ पीलीभीत के जंगल में तृणभोजी वन्यजीवों की संख्या में भी खासा इजाफा हुआ है। भालू व हिरन प्रजाति के वन्यजीवों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। साल 2021 तक एनटीसीए द्वारा वन्यजीवों की गणना में भी यह तथ्य उभर कर सामने आए हैं। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल भी पीलीभीत के जंगल में तृणभोजी वन्यजीवों के कुनबे के लगातार बढ़ने की बात स्वीकार करते हैं। लेकिन उनका कहना है कि कई वर्ष से गणना नहीं हुई है। इसलिए ताजा आंकड़े नहीं हैं।
बंगाल फ्लोरिकन बर्ड की भी है यहां
पीलीभीत के जंगल में विलुप्त प्रजाति में शुमार बंगाल फ्लोरिकन बर्ड, स्पीड हेयर व शर्मीले वन्यजीव में शुमार कब्र बिज्जू भी यहां के जंगल में मौजूद हैं। इनकी भी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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ऊदबिलाव बताते हैं कितना स्वच्छ है जल
पीटीआर क्षेत्र में पांच रेंज हैं और पांचों रेंज में ऊदबिलाव पाए जाते हैं। ऊदबिलाव की खास बात यह है कि यह स्वच्छ जल ही पीते हैं और इनकी मौजूदगी इस क्षेत्र में होना जाहिर करता है कि पीटीआर क्षेत्र स्वच्छ जल से भरपूर है।
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जनपद का जंगल वैसे तो शिकार के मामले में ब्रिटिश काल से ही सुर्खियों में रहा है। पीलीभीत वन प्रभाग वर्ष 1805 में स्थापित हुआ। इसे टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया वर्ष 2008 में शुरू की गई। वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। वर्ष 2014 में बाघों की संख्या मात्र 25 थी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार काम हुए। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2018 में बाघों की संख्या बढ़कर 65 हो गई। इस उपलब्धि के लिए पूरे विश्व में पीलीभीत टाइगर रिजर्व की चर्चा हुई।
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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) में पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता के प्रमुख मिस मिंडोरी पैक्सटन की ओर से नवंबर 2020 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर का टाइगर एक्स टू अवार्ड दिया गया। विश्व के 13 ऐसे देश हैं, जहां टाइगर पाया जाता है। इन देशों में सिर्फ भारत के पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघों की संख्या बढ़ाने पर यह अवार्ड मिला था।
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एक बार फिर बाघों की गणना हुई है। इसके परिणाम इस वर्ष के अंत तक आएंगे। उम्मीद है कि बाघों की संख्या और बढ़ेगी। बाघों की बढ़ती संख्या के चलते पर्यटक यहां खासकर बाघ को करीब से देखने की आस लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के जंगल की खूबसूरती, जंगल के बीच नदियों के जाल व शारदा डैम के पास बनाया गया चूका बीच पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है। खास बात यह भी है कि बाघ के साथ-साथ तेंदुए का कुनबा भी बढ़ रहा है।
बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही तेंदुए जंगल छोड़ बाहर के इलाकों में पनाह ले लेते हैं। इसके संकेत भी लगातार मिल रहे हैं। जंगल से बाहर निकले कई तेंदुओं को पिंजरें में कैद कर जंगल क्षेत्र के सुरक्षित स्थानों में छोड़ा जा चुका है। तेंदुओं की रिहायशी इलाकों में बढ़ती चहलकदमी भी बाघ और तेंदुओं की बढ़ती संख्या की ओर इशारा करती है।
फैक्ट फाइल
- 73024.98 हेक्टेयर में फैला है पीलीभीत टाइगर रिजर्व
- पीटीआर के क्षेत्र को पांच वन रेंज में बांटा गया है
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- वर्ष 2013 से 2016 तक बढ़े वन्यजीवों की संख्या पर नजर
- चीतल - 3814- 5776
- सांभर - 78- 255
- जंगली सुअर - 4309- 5800
- भालू- 103 से 113
- बाहर सिंघा - 340 - 945
वर्ष 2016 के बाद गणना नहीं हो सकी
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विलुप्त प्रजाति चैसिंगा भी बढ़ा रही जंगल की खूबसूरती
तराई के इस जंगल में चैसिंगा की मौजूदगी को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ आश्चर्य मानते हैं। उनका मानना है कि चैसिंगा खासकर राजस्थान जैसे सूखे और खुले क्षेत्रों में पाया जाता है। वर्ष 2010 में यहां सबसे पहले चैसिंगा देखा गया। उसके बाद कई बार इसकी मौजूदगी बाघों की गणना के लिए लगाए गए कैमरों व जंगल भ्रमण के दौरान वनकर्मियों को देखने को मिलती है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2016 तक पीलीभीत के जंगल में चैसिंगा की संख्या 14 है।
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हिरन की पांच प्रजातियां हैं मौजूद
पीलीभीत के जंगल में हिरन प्रजाति की संख्या भी बेहतर है। हिरन की पांच प्रजाति टाइगर रिजर्व में पाई जाती हैं। इनमें सांभर, बारहसिंगा, चीतल, पाढ़ा और कांकड़ शामिल हैं। यह पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।
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तृणभोजी वन्यजीवों में हो रहा इजाफा
बाघ, तेंदुए के साथ-साथ पीलीभीत के जंगल में तृणभोजी वन्यजीवों की संख्या में भी खासा इजाफा हुआ है। भालू व हिरन प्रजाति के वन्यजीवों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। साल 2021 तक एनटीसीए द्वारा वन्यजीवों की गणना में भी यह तथ्य उभर कर सामने आए हैं। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल भी पीलीभीत के जंगल में तृणभोजी वन्यजीवों के कुनबे के लगातार बढ़ने की बात स्वीकार करते हैं। लेकिन उनका कहना है कि कई वर्ष से गणना नहीं हुई है। इसलिए ताजा आंकड़े नहीं हैं।
बंगाल फ्लोरिकन बर्ड की भी है यहां
पीलीभीत के जंगल में विलुप्त प्रजाति में शुमार बंगाल फ्लोरिकन बर्ड, स्पीड हेयर व शर्मीले वन्यजीव में शुमार कब्र बिज्जू भी यहां के जंगल में मौजूद हैं। इनकी भी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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ऊदबिलाव बताते हैं कितना स्वच्छ है जल
पीटीआर क्षेत्र में पांच रेंज हैं और पांचों रेंज में ऊदबिलाव पाए जाते हैं। ऊदबिलाव की खास बात यह है कि यह स्वच्छ जल ही पीते हैं और इनकी मौजूदगी इस क्षेत्र में होना जाहिर करता है कि पीटीआर क्षेत्र स्वच्छ जल से भरपूर है।