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Pilibhit News: कॉरिडोर पर कब्जे से भटक गए हाथी, दो माह से जंगल से आबादी तक मचा रहे उत्पात
Sun, 16 Nov 2025 11:18 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 16 Nov 2025 11:18 PM IST
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उससे सटे जंगलों में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। प्राकृतिक कॉरिडोर पर बढ़ते मानव अतिक्रमण के कारण दिशा भटक चुके हाथी दो माह से जंगल से लेकर आबादी क्षेत्रों तक पहुंचकर फसलों, झोपड़ियों और जनजीवन को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाल ही में शारदा पार हाथी ने एक ग्रामीण को कुचलकर मार डाला था।
नेपाल सीमा से सटे पीलीभीत के जंगलों का हाथियों की आवाजाही से एक पुराना और प्राकृतिक रिश्ता रहा है। बराही, माला, गुन्हान, रमनगरा और ढकिया ताल्लुके महाराजपुर का इलाका कभी हाथियों का सुरक्षित कॉरिडोर माना जाता था। नेपाल स्थित शुक्लाफांटा सेंचुरी से निकलने वाले हाथी यहां आकर विचरण करते, कुछ समय रुकते और फिर अपने मार्ग से वापस लौट जाते थे लेकिन पिछले दो दशकों में मानव आबादी के विस्तार, बसावट और खेती के बढ़ते दायरे ने इस पूरे प्राकृतिक मार्ग को तोड़कर रख दिया है। वनभूमि और कॉरिडोर के बड़े हिस्सों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। इससे हाथियों का पारंपरिक मार्ग बाधित हो गया है। यही वजह है कि अब हाथी जंगल के बजाय गांवों, खेतों और आबादी क्षेत्रों में भटककर पहुंच रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं।
पिछले दो माह से बराही, महोफ और माला रेंज के जंगलों में दो नेपाली हाथी डेरा जमाए हुए हैं और लगातार फसलों और झोपड़ियों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। पूर्व में शारदा पार नेपाली हाथियों का एक और झुंड यहां आ पहुंचा जिसने खेतों में खड़ी फसलों को रौंदने के साथ कई घरों में भी नुकसान पहुंचाया। एक ग्रामीण की मौत हो गई जिससे दहशत और बढ़ गई है।
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शारदा पार भूमि पर अतिक्रमण बढ़ा संकट
शारदा नदी के पार वन विभाग और सिंचाई विभाग की जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जे बने हुए हैं। पट्टों की आड़ में हजारों एकड़ भूमि खेती के उपयोग में लाई जा रही है। जहां कभी घना जंगल था, वहां आज पूरी तरह बस्तियां और कृषि कार्य हो रहे हैं। यही वजह है कि हाथी नदी पार भटककर गांवों के करीब आ रहे हैं। पिछले वर्षों में इन घटनाओं में कई ग्रामीणों की मौत भी हो चुकी है।
डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि हाथियों को किसी निर्धारित स्थान पर रोक पाना आसान नहीं है। इनके नियमित मूवमेंट पर निगरानी ही सबसे बड़ा उपाय है। सक्रियता को देखते हुए विभाग ने बाघ मित्रों की टीम को भी लगातार मॉनिटरिंग के लिए लगाया है। मौजूदा स्थिति वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। भटके हाथियों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने और कॉरिडोर को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाना अब जरूरी हो गया है।
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नेपाल सीमा से सटे पीलीभीत के जंगलों का हाथियों की आवाजाही से एक पुराना और प्राकृतिक रिश्ता रहा है। बराही, माला, गुन्हान, रमनगरा और ढकिया ताल्लुके महाराजपुर का इलाका कभी हाथियों का सुरक्षित कॉरिडोर माना जाता था। नेपाल स्थित शुक्लाफांटा सेंचुरी से निकलने वाले हाथी यहां आकर विचरण करते, कुछ समय रुकते और फिर अपने मार्ग से वापस लौट जाते थे लेकिन पिछले दो दशकों में मानव आबादी के विस्तार, बसावट और खेती के बढ़ते दायरे ने इस पूरे प्राकृतिक मार्ग को तोड़कर रख दिया है। वनभूमि और कॉरिडोर के बड़े हिस्सों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। इससे हाथियों का पारंपरिक मार्ग बाधित हो गया है। यही वजह है कि अब हाथी जंगल के बजाय गांवों, खेतों और आबादी क्षेत्रों में भटककर पहुंच रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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पिछले दो माह से बराही, महोफ और माला रेंज के जंगलों में दो नेपाली हाथी डेरा जमाए हुए हैं और लगातार फसलों और झोपड़ियों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। पूर्व में शारदा पार नेपाली हाथियों का एक और झुंड यहां आ पहुंचा जिसने खेतों में खड़ी फसलों को रौंदने के साथ कई घरों में भी नुकसान पहुंचाया। एक ग्रामीण की मौत हो गई जिससे दहशत और बढ़ गई है।
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शारदा पार भूमि पर अतिक्रमण बढ़ा संकट
शारदा नदी के पार वन विभाग और सिंचाई विभाग की जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जे बने हुए हैं। पट्टों की आड़ में हजारों एकड़ भूमि खेती के उपयोग में लाई जा रही है। जहां कभी घना जंगल था, वहां आज पूरी तरह बस्तियां और कृषि कार्य हो रहे हैं। यही वजह है कि हाथी नदी पार भटककर गांवों के करीब आ रहे हैं। पिछले वर्षों में इन घटनाओं में कई ग्रामीणों की मौत भी हो चुकी है।
डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि हाथियों को किसी निर्धारित स्थान पर रोक पाना आसान नहीं है। इनके नियमित मूवमेंट पर निगरानी ही सबसे बड़ा उपाय है। सक्रियता को देखते हुए विभाग ने बाघ मित्रों की टीम को भी लगातार मॉनिटरिंग के लिए लगाया है। मौजूदा स्थिति वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। भटके हाथियों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने और कॉरिडोर को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाना अब जरूरी हो गया है।