{"_id":"57278be44f1c1bf9435ccef2","slug":"opd-daily-80-percent-of-asthma-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओपीडी में रोजाना ही 80 फीसदी मरीज अस्थमा के","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओपीडी में रोजाना ही 80 फीसदी मरीज अस्थमा के
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 02 May 2016 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में धुंए, धूल के साथ बढ़ते प्रदूषण के चलते अस्थमा रोगियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सवाल सांसों का है, यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह रोग जानलेवा भी साबित हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक जिले में प्रदूषण, धूल व धूम्रपान इसके प्रमुख कारक हैं।
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां ओपीडी में हर रोज करीब 80 प्रतिशत मरीज अकेले अस्थमा रोग से जुड़े ही पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जिले में उड़ती धूल, धुंआ, प्रदूषण अस्थमा के प्रमुख कारण बन रहे हैं। इसके अलावा धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति, धूल के उठते गुबार, औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण भी अस्थमा रोगियों की संख्या में इजाफा कर रहा है। इन कारणों से हवा में घुलती कार्बन डाईआक्साइड व सल्फर डाईआक्साइड सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ावा देती है और व्यक्ति को अस्थमा का रोगी बना देती है।
ऐसे करें बचाव
- धूम्रपान न करें, स्वच्छ वातावरण में रहें।
- जॉगिंग के साथ व्यायाम व स्वीमिंग करें।
- श्वसन संबंधी बीमारी होने पर ठंडे व खट्टे भोजन से परहेज करें।
- धूल, धुआं, प्रदूषण से बचने को मास्क का प्रयोग करें।
- नियमित रूप से जांच कराएं।
जागरूकता की कमी से बढ़ रहा अस्थमा
जिले में धूल, धुआं, प्रदूषण व धूम्रपान अस्थमा के प्रमुख कारण हैं। औद्योगिक इकाइयों के आसपास काम करने वाले अधिकतर लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जागरूकता की कमी के चलते अस्थमा रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
विज्ञापन
- डॉ. सीबी चौरसिया, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां ओपीडी में हर रोज करीब 80 प्रतिशत मरीज अकेले अस्थमा रोग से जुड़े ही पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जिले में उड़ती धूल, धुंआ, प्रदूषण अस्थमा के प्रमुख कारण बन रहे हैं। इसके अलावा धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति, धूल के उठते गुबार, औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण भी अस्थमा रोगियों की संख्या में इजाफा कर रहा है। इन कारणों से हवा में घुलती कार्बन डाईआक्साइड व सल्फर डाईआक्साइड सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ावा देती है और व्यक्ति को अस्थमा का रोगी बना देती है।
विज्ञापन
ऐसे करें बचाव
- धूम्रपान न करें, स्वच्छ वातावरण में रहें।
- जॉगिंग के साथ व्यायाम व स्वीमिंग करें।
- श्वसन संबंधी बीमारी होने पर ठंडे व खट्टे भोजन से परहेज करें।
- धूल, धुआं, प्रदूषण से बचने को मास्क का प्रयोग करें।
- नियमित रूप से जांच कराएं।
जागरूकता की कमी से बढ़ रहा अस्थमा
जिले में धूल, धुआं, प्रदूषण व धूम्रपान अस्थमा के प्रमुख कारण हैं। औद्योगिक इकाइयों के आसपास काम करने वाले अधिकतर लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जागरूकता की कमी के चलते अस्थमा रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
विज्ञापन
- डॉ. सीबी चौरसिया, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल