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भ्रष्टाचार मिटाएं, बैकिंग सेवाएं बढ़ाएं तो सफल होगा नोटबंदी का मकसद

Sun, 07 Nov 2021 11:48 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 11:48 PM IST
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note bandi
पीलीभीत। टैक्स चोरी और कालेधन पर लगाम लगाने के उद्देश्य से नोटबंदी का निर्णय 2016 में सरकार ने लिया। सरकार के इस फैसले को आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। मगर कमजोर इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता की कमी के चलते कैशलेस भुगतान व्यवस्था सौ फीसदी लागू नहीं हो सकी है। अधिकतर लोग नकद ही लेनदेन करते हैं। अगर कैशलैस इकोनॉमी को लागू करना है तो भ्रष्टाचार को खत्म करते हुए बैकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर गांव से गली मोहल्लों तक उपलब्ध कराना होगा। सर्विस चार्ज के नाम पर बैंकों की सेवाओं को महंगा करने से रोकना होगा। यह सुझाव अलग-अलग वर्ग से हुई बातचीत में सामने आए हैं।
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नोटबंदी जिस मकसद से की गई थी वह पूरा नहीं हुआ। न भ्रष्टाचार खत्म हो सका और कैशलेस इकोनॉमी बन पाई। अलबत्ता लोग ऑनलाइन लेनदेन की ओर बढ़े हैं। - अनूप अग्रवाल, जिला अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
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मुझे कोचिंग के लिए रोज बरेली जाना पड़ता है लेकिन बस टिकट के लिए कैश ही चलता है। बस कंडक्टर के पास कैशलेस भुगतान के लिए कोई भी सुविधा नहीं होती है। इससे कई बार असुविधा हो जाती है।
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हर्ष , छात्र
कैशलेस इंडिया एक अच्छी पहल है लेकिन शहर के बाजार में अधिकतर जगहों पर कैशलेस भुगतान की सुविधा नहीं है। रोजमर्रा की जरूरतों के भुगतान के लिए कैश का चलन बंद करने के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित करना जरूरी है।
नेहा, छात्रा
हजारों लोग ऐसे हैं जिनके पास डेबिट और क्रेडिट कार्ड नहीं है। लोग कैश का उपयोग करते हैं बहुत ही कम ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करते हैं, छोटा शहर होने की वजह से यहां कैशलेस व्यवस्था का चलन में नहीं है। - विवेक त्रिवेदी
व्यापारी
नोटबंदी से बाद ऑनलाइन बैंकिंग तो बढ़ी है। खाताधारक भी बढ़े है। बैकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है। इसलिए कैशलैस इकोनॉमी की ओर हमारे कदम अग्रसर हो रहे हैं। - शुभ्रत दत्ता, डीजीएम, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)

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कब-कब हुई नोटबंदी
पहली बार अंग्रेज सरकार ने 1946 में नोटबंदी की थी।
आजाद भारत में 1978 में भी पहली नोटबंदी की गई थी।
8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी।
गांवों में युवा करने लगे हैं ऑनलाइन लेनदेन
गुन्हान, कुतिया कवर, सुंदर नगर, लौहरपुरा, टांडा छत्रपति, बसंतपुर नौनेर, देवीपुर ककरुआ समेत ऐसे 100 से अधिक गांव हैं जहां पर बैंकिंग सेवाओं का अभाव है लेकिन इन गांवों में नई पीढ़ी के युवा मोबाइल से ऑनलाइन पेमेंट करना सीख गए हैं। मतलब साफ है कि हम बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन दिक्कत तब आती है जब इंटरनेट की कनेक्टिविटी पूरी नहीं मिल पाती।
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