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Pilibhit News: बाहर रहने वाले एक भी लाभार्थी का नहीं बन सका आयुष्मान
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बीसलपुर। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दूसरे शहरों में रहने वाले सीएचसी क्षेत्र के 70 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के लाभार्थियों को बुलाकर उनके आयुष्मान गोल्डन कार्ड नहीं बनवा सके हैं। इन्हें बुलाने की जिम्मेदारी एक साल पहले आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई थी। इस वजह से सीएचसी क्षेत्र के बुजुर्ग लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पिछले वित्तीय वर्ष में नगर व ब्लॉक क्षेत्र के 70 वर्ष या इससे अधिक उम्र के 18 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य मिला था। इनकी सूची भी मिल गई थी। सूची मिलते ही विभाग की टीम ने आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने शुरू कर दिए थे। कार्ड बनाने से पहले इस अभियान में लगे कर्मचारियों ने सूचीबद्ध सभी लाभार्थियों का घर-घर जाकर सत्यापन भी किया था।
सत्यापन में पता चला था कि 18 हजार में से दो हजार लाभार्थी मृतक हैं। एक हजार लाभार्थी अपने परिजनों के साथ बाहर दूसरे शहरों में रह रहे हैं। टीम ने 15 हजार लाभार्थियों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड 31 मार्च तक बना दिए थे। बाहर रह रहे लाभार्थियों के बारे में तय किया गया कि उन्हें बुलाकर उनके आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। यह निर्णय करीब एक वर्ष पूर्व लिया गया था। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग एक वर्ष में बाहर रह रहे एक हजार में से एक भी लाभार्थी को बुला नहीं सका है।
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इन स्थानों पर रह रहे हैं प्रवासी लाभार्थी
सीएचसी क्षेत्र के यह लाभार्थी दिल्ली, रुद्रपुर, पानीपत, मुंबई, बरेली, मेरठ, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, खटीमा, सितारगंज, जम्मू कश्मीर, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों में रहते हैं।
इन स्थानों के रहने वाले है प्रवासी लाभार्थी
लाभार्थी नगर समेत रसिया खानपुर, अमृता खास, टिकरी माफी, मीरपुर वाहनपुर, सफोता, गोवल, मंडरा सुमन, पतिपुरा, नवदिया, सितारगंज, पहाड़गंज, अभयपुर, महादेवा, खनका और शिवपुरी नवदिया आदि गांवों के रहने वाले हैं।
आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है जिम्मेदारी
आयुष्मान गोल्डन कार्ड योजना के करीब एक हजार लाभार्थियों को फोन कर बुलाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंप गई है।
- सुशील कुमार, पटल प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीसलपुर
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पिछले वित्तीय वर्ष में नगर व ब्लॉक क्षेत्र के 70 वर्ष या इससे अधिक उम्र के 18 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य मिला था। इनकी सूची भी मिल गई थी। सूची मिलते ही विभाग की टीम ने आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने शुरू कर दिए थे। कार्ड बनाने से पहले इस अभियान में लगे कर्मचारियों ने सूचीबद्ध सभी लाभार्थियों का घर-घर जाकर सत्यापन भी किया था।
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सत्यापन में पता चला था कि 18 हजार में से दो हजार लाभार्थी मृतक हैं। एक हजार लाभार्थी अपने परिजनों के साथ बाहर दूसरे शहरों में रह रहे हैं। टीम ने 15 हजार लाभार्थियों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड 31 मार्च तक बना दिए थे। बाहर रह रहे लाभार्थियों के बारे में तय किया गया कि उन्हें बुलाकर उनके आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। यह निर्णय करीब एक वर्ष पूर्व लिया गया था। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग एक वर्ष में बाहर रह रहे एक हजार में से एक भी लाभार्थी को बुला नहीं सका है।
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इन स्थानों पर रह रहे हैं प्रवासी लाभार्थी
सीएचसी क्षेत्र के यह लाभार्थी दिल्ली, रुद्रपुर, पानीपत, मुंबई, बरेली, मेरठ, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, खटीमा, सितारगंज, जम्मू कश्मीर, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों में रहते हैं।
इन स्थानों के रहने वाले है प्रवासी लाभार्थी
लाभार्थी नगर समेत रसिया खानपुर, अमृता खास, टिकरी माफी, मीरपुर वाहनपुर, सफोता, गोवल, मंडरा सुमन, पतिपुरा, नवदिया, सितारगंज, पहाड़गंज, अभयपुर, महादेवा, खनका और शिवपुरी नवदिया आदि गांवों के रहने वाले हैं।
आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है जिम्मेदारी
आयुष्मान गोल्डन कार्ड योजना के करीब एक हजार लाभार्थियों को फोन कर बुलाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंप गई है।
- सुशील कुमार, पटल प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीसलपुर