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Pilibhit News: तृणभोजी वन्यजीवों की सबसे बड़ी शरणस्थली बनी माला रेंज, 25 हजार से अधिक की हुई गणना
Thu, 28 Aug 2025 12:02 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:02 AM IST
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की माला रेंज तृणभोजी वन्यजीवों की मौजूदगी के लिहाज से सबसे समृद्ध साबित हुई है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक माला रेंज में अकेले 25,294 तृणभोजी वन्यजीव दर्ज किए गए हैं। इनमें चीतल और वनरोज की मौजूदगी विशेष तौर पर उल्लेखनीय है।
पीटीआर का विस्तार करीब 73 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है और यह पांच वनरेंजों माला, महोफ, बराही, दियोरिया और हरीपुर में विभाजित है। बेहतर ग्रासलैंड और पर्याप्त जलस्रोतों के चलते यहां वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि पीटीआर में न केवल तृणभोजी प्रजातियां तेजी से पनप रही हैं, बल्कि बाघों की संख्या भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बनी हुई है। पूर्व में हुई गणना के अनुसार रिजर्व में 72 बाघ दर्ज किए गए थे, लेकिन वर्तमान में संख्या और अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।
इधर, तृणभोजी वन्यजीवों के कुनबे में भी इजाफा होने की बात सामने आई है। पूर्व में हुई गणना के ताजा आकलन में सामने आया है कि पीटीआर में कुल मिलाकर एक लाख से अधिक तृणभोजी वन्यजीव मौजूद हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या माला रेंज में दर्ज की गई, जो इसे तृणभोजी जीवों के लिए सबसे सुरक्षित और अनुकूल आवास सिद्ध करती है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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दियोरिया में तृणभोजी की संख्या सबसे कम
पीटीआर में तृणभोजी संख्या की बात करें तो माला में 25,294 के साथ इनकी संख्या सबसे अधिक हैं। इसके बाद महोफ में 24,193, बराही में 23,214 तृणभोजी की मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं हरीपुर में संख्या घटना 17,872 व दियोरिया रेंज में 10,628 दर्ज की गई है। विशेषज्ञों की मानें तो जंगल का दायरा और वातावरण के आधार पर तृणभोजी अपने क्षेत्र को चिह्नित कर लेते हैं।
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ये हैं तृणभोजी वन्यजीव
पीटीआर में तृणभोजी वन्यजीवों में चीतल, वनरोज, चौसिंघा, पाड़ा, सांभर, बारहसिंघा, काकड़, सियार, मोर, वन गाय आदि पाए जाते हैं। इसमें सर्वाधिक संख्या चीतल की दर्ज की गई। इसमें विलुप्त प्रजाति के चौसिंघा की संख्या भी 117 दर्ज की गई है। जो की सुखद संदेश है।
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पीटीआर का विस्तार करीब 73 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है और यह पांच वनरेंजों माला, महोफ, बराही, दियोरिया और हरीपुर में विभाजित है। बेहतर ग्रासलैंड और पर्याप्त जलस्रोतों के चलते यहां वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि पीटीआर में न केवल तृणभोजी प्रजातियां तेजी से पनप रही हैं, बल्कि बाघों की संख्या भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बनी हुई है। पूर्व में हुई गणना के अनुसार रिजर्व में 72 बाघ दर्ज किए गए थे, लेकिन वर्तमान में संख्या और अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।
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इधर, तृणभोजी वन्यजीवों के कुनबे में भी इजाफा होने की बात सामने आई है। पूर्व में हुई गणना के ताजा आकलन में सामने आया है कि पीटीआर में कुल मिलाकर एक लाख से अधिक तृणभोजी वन्यजीव मौजूद हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या माला रेंज में दर्ज की गई, जो इसे तृणभोजी जीवों के लिए सबसे सुरक्षित और अनुकूल आवास सिद्ध करती है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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दियोरिया में तृणभोजी की संख्या सबसे कम
पीटीआर में तृणभोजी संख्या की बात करें तो माला में 25,294 के साथ इनकी संख्या सबसे अधिक हैं। इसके बाद महोफ में 24,193, बराही में 23,214 तृणभोजी की मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं हरीपुर में संख्या घटना 17,872 व दियोरिया रेंज में 10,628 दर्ज की गई है। विशेषज्ञों की मानें तो जंगल का दायरा और वातावरण के आधार पर तृणभोजी अपने क्षेत्र को चिह्नित कर लेते हैं।
ये हैं तृणभोजी वन्यजीव
पीटीआर में तृणभोजी वन्यजीवों में चीतल, वनरोज, चौसिंघा, पाड़ा, सांभर, बारहसिंघा, काकड़, सियार, मोर, वन गाय आदि पाए जाते हैं। इसमें सर्वाधिक संख्या चीतल की दर्ज की गई। इसमें विलुप्त प्रजाति के चौसिंघा की संख्या भी 117 दर्ज की गई है। जो की सुखद संदेश है।