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डीजल की बढ़ी कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, रोजमर्रा की चीजों पर बढ़ी महंगाई
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पीलीभीत। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब बाजारों में भी नजर आने लगा है। मालभाड़ा बढ़ने की वजह से रोजमर्रा की जरूरत वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी कीमतें बढ़ने का दौर शुरू हो गया है। आटा हो या तेल, सभी के दाम बढ़ गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक यह तो अभी शुरूआत है। अगर, डीजल के दाम कम नहीं हुए तो आने वाले दिनों में आम लोगों को महंगाई का बड़ा झटका झेलना पड़ सकता है।
पिछले एक पखवाड़े में डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक जून को डीजल के दाम 64.18 रुपये प्रति लीटर थे, वहीं 28 जून को वहीं डीजल 72.72 रुपये प्रति लीटर कर दर से बेचा गया। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही ट्रांसपोर्टरों ने अपना मालभाड़ा भी बढ़ा दिया। ट्रकों के भाड़े में 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि कर दी गई। इसका सबसे ज्यादा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। तेल, आटा, दाल जैसी जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतें बाजार में बढ़ गई हैं। किराना कारोबारी राजेश लोधी के मुताबिक डीजल की कीमतें जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ेगी। कोरोना संकट से जूझ रहे लोगों को घर का खर्च चलाना मुश्किल होगा।
इन खाद्य सामग्रियों के बढ़े दाम
खाद्य सामग्री दाम 15 दिन पहले (प्रति किलो) अब
खुला आटा 20 रुपये किलो 22-23 रुपये
ब्रांडेड आटा 26 रुपये किलो 27 रुपये
रिफाइंड 90 रुपये लीटर 95 रुपये
सरसों का तेल 100 रुपये लीटर 130 रुपये
मैदा 25 रुपये किलो 27-28 रुपये
सूजी 27 रुपये किलो 30-32 रुपये
अरहर दाल 90 रुपये किलो 95 रुपये
मूंगा दाल 100 रुपये किलो 110 रुपये
चना 50 रुपये किलो 55 रुपये
चना दाल 55 रुपये किलो 60-65 रुपये
चावल 35 रुपए किलो 40 रुपए किलो
नोट- चावल के रेट अलग-अलग हैं। मोटा चावल, इंद्रासन, मंसूरी और बांसमती, कभी की कीमतों में प्रतिकिलो पांच से आठ रुपये का अंतर है।
पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन में परेशान रहे। अब खाने-पीने के सामान पर महंगाई इस कदर बढ़ने लगी है कि पूछो मत। सब्जियों के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ते रहे हैं। रसोई का बजट बिगड़ चुका है। - प्रभा गुप्ता, गृहिणी
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यदि महंगाई को कम करना है तो डीजल-पेट्रोल के दामों को कम करना होगा। सिर्फ खाद्य सामग्री ही महंगी नहीं हो रही है, रोजमर्रा से जुड़ी हर वस्तु के दाम बढ़ते जा रहे हैं। समझ में नहीं आता कि आगे सब कुछ कैसे चलेगा। - प्रियंका कौशिक, गृहिणी
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पिछले एक पखवाड़े में डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक जून को डीजल के दाम 64.18 रुपये प्रति लीटर थे, वहीं 28 जून को वहीं डीजल 72.72 रुपये प्रति लीटर कर दर से बेचा गया। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही ट्रांसपोर्टरों ने अपना मालभाड़ा भी बढ़ा दिया। ट्रकों के भाड़े में 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि कर दी गई। इसका सबसे ज्यादा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। तेल, आटा, दाल जैसी जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतें बाजार में बढ़ गई हैं। किराना कारोबारी राजेश लोधी के मुताबिक डीजल की कीमतें जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ेगी। कोरोना संकट से जूझ रहे लोगों को घर का खर्च चलाना मुश्किल होगा।
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इन खाद्य सामग्रियों के बढ़े दाम
खाद्य सामग्री दाम 15 दिन पहले (प्रति किलो) अब
खुला आटा 20 रुपये किलो 22-23 रुपये
ब्रांडेड आटा 26 रुपये किलो 27 रुपये
रिफाइंड 90 रुपये लीटर 95 रुपये
सरसों का तेल 100 रुपये लीटर 130 रुपये
मैदा 25 रुपये किलो 27-28 रुपये
सूजी 27 रुपये किलो 30-32 रुपये
अरहर दाल 90 रुपये किलो 95 रुपये
मूंगा दाल 100 रुपये किलो 110 रुपये
चना 50 रुपये किलो 55 रुपये
चना दाल 55 रुपये किलो 60-65 रुपये
चावल 35 रुपए किलो 40 रुपए किलो
नोट- चावल के रेट अलग-अलग हैं। मोटा चावल, इंद्रासन, मंसूरी और बांसमती, कभी की कीमतों में प्रतिकिलो पांच से आठ रुपये का अंतर है।
पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन में परेशान रहे। अब खाने-पीने के सामान पर महंगाई इस कदर बढ़ने लगी है कि पूछो मत। सब्जियों के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ते रहे हैं। रसोई का बजट बिगड़ चुका है। - प्रभा गुप्ता, गृहिणी
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यदि महंगाई को कम करना है तो डीजल-पेट्रोल के दामों को कम करना होगा। सिर्फ खाद्य सामग्री ही महंगी नहीं हो रही है, रोजमर्रा से जुड़ी हर वस्तु के दाम बढ़ते जा रहे हैं। समझ में नहीं आता कि आगे सब कुछ कैसे चलेगा। - प्रियंका कौशिक, गृहिणी