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छुटपुट विवाद सुलझाने को भारत-नेपाल मिलकर सीमा पर लगाएंगे 169 नए पिलर
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पीलीभीत। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर लगने वाले नए पिलर का मामला सुर्खियों में आने के बाद भारत सरकार की एजेंसी सर्वे ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते को साफ किया। सर्वे ऑफ इंडिया ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच दोस्ताना संबंध हैं। उसमें सीमा पर छुटपुट विवादों को हमेशा निपटाने के लिए दोनों देशों की एजेंसियां मिलकर नए पिलर लगा रही हैं।
भारत में उत्तराखंड के चंपावत और ऊधम सिंह नगर से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से लेकर लखीमपुर खीरी तक 169 नए पिलर लगाकर सीमा को कवर किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह से उठने वाले छुटपुट विवादों पर लगाम लगाई जा सके। इसमें कुछ जमीन पर सीमा विवाद है तो उसके अभिलेखों के रिकॉर्ड देखकर इधर से उधर आदान-प्रदान भी किया जाएगा। मगर, सीमा विवाद में ऐसा नहीं है कि भारत की जमीन का कोई बड़ा हिस्सा नेपाल या नेपाल की जमीन का कोई बड़ा हिस्सा भारत में शामिल होगा।
सर्वे ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर एसएस प्रसाद ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर पिलर लगाने का काम किसी विवाद का हिस्सा नहीं है। यह दोनों देशों की सहमति से चल रहा है। अब तक सीमा पर नेपाल ने दो और भारत ने तीन पिलर लगाए हैं। उत्तराखंड के चंपावत और ऊधम सिंह नगर से लेकर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और लखीमपुर खीरी तक भारत-नेपाल सीमा पर कुल 169 पिलर लगाए जाने हैं। यह 811 नंबर से 750 नंबर तक बनाए जाएंगे। 15 मई तक पिलर निर्माण का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रोजेक्ट ऑफीसर के अनुसार भारत सरकार की एजेंसी सर्वे ऑफ इंडिया और नेपाल सरकार की एजेंसी सर्वे ऑफ नेपाल मिलकर नए पिलर लगाने का काम रही हैं। नेपाल की एजेंसी विषम अंक वाले पिलर जबकि भारत सरकार की एजेंसी सम अंक वाले पिलर लगाएगी। इंडो-नेपाल सीमा पर जहां कहीं विवाद हैं, वहां पर नापजोख भी की जा रही है। जिन किसानों को आपत्ति है कि उनकी खेती नेपाल सीमा में चली जाएगी तो वह अपने अभिलेख सर्वे ऑफ इंडिया को दिखा सकते हैं। हालांकि ऐसा कुछ नहीं है। सर्वे ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर ने बताया कि नए पिलर बनने के बाद दोनों देशों का सीमा पर छुटपुट विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे।
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तहसीलदार भी जांच करने पहुंचे
उधर, एसडीएम कलीनगर के निर्देश पर तहसीलदार भी भारत-नेपाल सीमा पर लगने वाले पिलर निर्माण की जानकारी करने राजस्व टीम लेकर पहुंचे। उन्होंने सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों से भी इस संबंध में बात की। सर्वे ऑफ इंडिया से जानकारी करने के बाद तहसीलदार की टीम वापस लौट आई।
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भारत में उत्तराखंड के चंपावत और ऊधम सिंह नगर से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से लेकर लखीमपुर खीरी तक 169 नए पिलर लगाकर सीमा को कवर किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह से उठने वाले छुटपुट विवादों पर लगाम लगाई जा सके। इसमें कुछ जमीन पर सीमा विवाद है तो उसके अभिलेखों के रिकॉर्ड देखकर इधर से उधर आदान-प्रदान भी किया जाएगा। मगर, सीमा विवाद में ऐसा नहीं है कि भारत की जमीन का कोई बड़ा हिस्सा नेपाल या नेपाल की जमीन का कोई बड़ा हिस्सा भारत में शामिल होगा।
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सर्वे ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर एसएस प्रसाद ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर पिलर लगाने का काम किसी विवाद का हिस्सा नहीं है। यह दोनों देशों की सहमति से चल रहा है। अब तक सीमा पर नेपाल ने दो और भारत ने तीन पिलर लगाए हैं। उत्तराखंड के चंपावत और ऊधम सिंह नगर से लेकर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और लखीमपुर खीरी तक भारत-नेपाल सीमा पर कुल 169 पिलर लगाए जाने हैं। यह 811 नंबर से 750 नंबर तक बनाए जाएंगे। 15 मई तक पिलर निर्माण का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रोजेक्ट ऑफीसर के अनुसार भारत सरकार की एजेंसी सर्वे ऑफ इंडिया और नेपाल सरकार की एजेंसी सर्वे ऑफ नेपाल मिलकर नए पिलर लगाने का काम रही हैं। नेपाल की एजेंसी विषम अंक वाले पिलर जबकि भारत सरकार की एजेंसी सम अंक वाले पिलर लगाएगी। इंडो-नेपाल सीमा पर जहां कहीं विवाद हैं, वहां पर नापजोख भी की जा रही है। जिन किसानों को आपत्ति है कि उनकी खेती नेपाल सीमा में चली जाएगी तो वह अपने अभिलेख सर्वे ऑफ इंडिया को दिखा सकते हैं। हालांकि ऐसा कुछ नहीं है। सर्वे ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट ऑफिसर ने बताया कि नए पिलर बनने के बाद दोनों देशों का सीमा पर छुटपुट विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे।
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तहसीलदार भी जांच करने पहुंचे
उधर, एसडीएम कलीनगर के निर्देश पर तहसीलदार भी भारत-नेपाल सीमा पर लगने वाले पिलर निर्माण की जानकारी करने राजस्व टीम लेकर पहुंचे। उन्होंने सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों से भी इस संबंध में बात की। सर्वे ऑफ इंडिया से जानकारी करने के बाद तहसीलदार की टीम वापस लौट आई।