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इलाज के अभाव में  मजदूर की मौैत

Sun, 01 May 2016 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Sun, 01 May 2016 11:34 PM IST
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In the absence of treatment Muat worker
बंद पड़ी सीएचसी। - फोटो : pilibhit, beureu
गरीबी और मुफलिसी से जूझ रहे 58 वर्षीय मजदूर मतलूम शाह की मजदूर दिवस के मौके पर सीएचसी के बाहर इलाज के अभाव में तड़फ-तड़फ कर मौत हो गई। करीब एक घंटे तक सीएचसी पर वह मौत जिंदगी से जूझता रहा, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ के न होने से उसे इलाज नहीं मिल सका। घरवालों के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह कहीं प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर उसका इलाज कराते या फिर वाहन की व्यवस्था कर जिला अस्पताल ले जाते। तीमारदार सीएचसी पर मौजूद 108 एंबुलेंस के चालक के हाथ पैर जोड़ता रहा। काफी ना नुकुर के बाद जब उसका चालक उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिला अस्पताल के डाक्टरों ने उसे ब्राडडेड घोषित कर दिया।
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गांव शराफतनगर निवासी आमीना बेगम ने बताया कि उसके तीन पुत्र और छह लड़कियां हैं। एक पुत्री परवीन मानसिक रोगी है। पुत्र अलग रहते हैं। पांच पुत्रियों की शादी हो चुकी है। पति मतलूम शाह शारीरिक रूप से भी काफी कमजोर थे। फिर भी मेहनत मजदूर कर परिवार की गाड़ी किसी तरह खींच रहे थे। शनिवार की रात करीब दस बजे उनके पति की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने इसकी जानकारी अलग रह रहे पुत्रों को दी। पुत्रों के आने पर वह एंबुलेंस 108 से पति को लेकर रात करीब 10 बजे सीएचसी पहुंची, लेकिन न तो वहां डॉक्टर मौजूद थे और न ही अन्य कोई कर्मचारी। वहां पर चौकीदार का सिर्फ बेटा मौजूद था। आमीना बेगम के मुताबिक जब उन्होंने चौकीदार के बेटे से डॉक्टर के बारे में पूछा तो उसने बताया कि डॉक्टर नहीं हैं। मरीज को जिला अस्पताल ले जाओ। उसने अस्पताल में मौजूद एक युवक के मोबाइल से वार्ड व्याय शाकिर कुरैशी को कॉल कराई और डॉक्टर का नंबर पूछा, लेकिन वार्ड व्याव ने मोबाइल नंबर देने से इंकार कर दिया। यह सब करते एक घंटे से अधिक का समय बीत चुका था। सारे जतन करने के बाद असहाय हुए घरवालों ने एंबुलेंस के चालक से जिला अस्पताल ले चलने के लिए हाथ-पैर जोड़े। एंबुलेंस चालक ने बिना रेफर कराए मरीज को जिला अस्पताल ले जाने में असमर्थता जताई। काफी खुशामद के बाद एंबुलेंस चालक उसे जिला अस्पताल लाया, जहां डॉक्टरों ने मतलूम शाह को मृत घोषित कर दिया। 
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रविवार को भी लटकता रहा ताला 
रविवार को भी सीएचसी की आपातकालीन सेवाएं ठप रहीं। इलाज के अभाव में दम तोड़ने की खबर के संबंध में सीएचसी अधीक्षक का पक्ष जानने के लिए अमर उजाला संवाददाता सीएचसी पहुंचा तो वहां ताला लटका मिला। चौकीदार भी नदारद था। कस्बावासियों ने बताया कि रात के समय सीएचसी पर डॉक्टर से लेकर कर्मचारी तक, कोई भी नहीं रुकते हैं। इससे लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 
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मैं लखनऊ मीटिंग में आया हूं। मुझे मामले की जानकारी नहीं हैं। सीएचसी में रात की इमरजेंसी ड्यूटी रहती है। वापस लौटने के बाद मैं मामले की जांच करूंगा। 
- ओपी सिंह, सीएमओ 
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