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ऐतिहासिक टीले पर दहाड़ रही जेसीबी
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 21 Apr 2016 10:52 PM IST
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अवैध खनन।
- फोटो : pilibhit, beureu
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जहानाबाद क्षेत्र के गांव बिलईखेड़ा स्थित ऐतिहासिक टीले और उसके आसपास कुछ लोग पुरातत्व विभाग की रोक के बाद भी जेसीबी से खुदाई कर मिट्टी का खनन कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों व आसपास के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों के मुताबिक दिन में कम रात के अंधेरे में जेसीबी से टीलों की खुदाई की जाती है, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अफसर जान बूझकर आंखें बंद किए हैं।
बिलईखेड़ा ढेर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। किदवंती है कि पांचाल राज्य की राजधानियों में बिलईखेड़ा भी था। सम्राट राजा वेन के किले के अवशेष एक टीले के रूप में अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीणों के मुताबिक किले के इस टीले पर खुदाई कर अवैध खनन पर पुरातत्व विभाग ने रोक लगा रखी है। बावजूद इसके कुछ लोग जेसीबी से टीले की खुदाई कर खनन कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं, लेकिन अधिकारी सफेदपोश नेताओं के दबाव में आकर चुप्पी साधे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अक्सर बरसात के दिनों में टीले पर जब लोग जानवर चराने आते हैं तो उन्हें सोने और चांदी के सिक्के ऊपर ही पड़े मिल जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिन में कभी कभार, लेकिन अधिकतर रात के अंधेरे में टीले की खुदाई जेसीबी से की जाती है। इससे लोगों में रोष है।
एसओ भोला सिंह ने बताया कि यह सही है कि टीले की खुदाई पर पुरातत्व विभाग ने रोक लगा रखी है। खुदाई होने की उन्हें जानकारी मिली थी, लेकिन जब पता किया गया तो कुछ पता नहीं चला।
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बिलईखेड़ा ढेर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। किदवंती है कि पांचाल राज्य की राजधानियों में बिलईखेड़ा भी था। सम्राट राजा वेन के किले के अवशेष एक टीले के रूप में अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीणों के मुताबिक किले के इस टीले पर खुदाई कर अवैध खनन पर पुरातत्व विभाग ने रोक लगा रखी है। बावजूद इसके कुछ लोग जेसीबी से टीले की खुदाई कर खनन कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं, लेकिन अधिकारी सफेदपोश नेताओं के दबाव में आकर चुप्पी साधे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अक्सर बरसात के दिनों में टीले पर जब लोग जानवर चराने आते हैं तो उन्हें सोने और चांदी के सिक्के ऊपर ही पड़े मिल जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिन में कभी कभार, लेकिन अधिकतर रात के अंधेरे में टीले की खुदाई जेसीबी से की जाती है। इससे लोगों में रोष है।
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एसओ भोला सिंह ने बताया कि यह सही है कि टीले की खुदाई पर पुरातत्व विभाग ने रोक लगा रखी है। खुदाई होने की उन्हें जानकारी मिली थी, लेकिन जब पता किया गया तो कुछ पता नहीं चला।
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