{"_id":"6102fcee8ebc3e585935a6f9","slug":"health-pilibhit-news-bly454760538","type":"story","status":"publish","title_hn":"रात को माने, सुबह फिर हड़ताल पर गए एंबुलेंस कर्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रात को माने, सुबह फिर हड़ताल पर गए एंबुलेंस कर्मचारी
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पीलीभीत। समायोजन को लेकर चल हड़ताल एंबुलेंस कर्मचारियों ने बुधवार देर रात प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने वार्ता करने के बाद खत्म कर दी थी। मगर गुरुवार को किसी भी एंबुलेंस का संचालन नहीं किया गया। पदाधिकारियों का कहना है कि उन पर दबाव बनाकर पत्र लिखवा लिया गया था। जबकि कोई भी एंबुलेंस कर्मचारी वाहन चलाने को तैयार नहीं है। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीज को विषम परिस्थितियों में निजी वाहन या फिर प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा। पूरे दिन अफसर संगठन के लोगों से वार्ता करने में लगे रहे, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका।
जिले में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 26 जुलाई को एंबुलेंस सेवा ठप कर जिला अस्पताल पार्क में धरने पर बैठे गए थे। एंबुलेंस सेवा ठप होने से स्वास्थ्य सेवा बिगड़ती देखकर शासन ने एंबुलेंस का संचालन करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देश दिए थे। इस पर बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह, एसडीएम अविनाश चंद्र मौर्या, सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल और सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम संगठन के लोगों से वार्ता करने के लिए पहुंचे थे। जहां पूरे दिन चली वार्ता के बाद जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108 और 102 के जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष गुड्डू, सिंह, जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार और जिला मीडिया प्रभारी मोहित कुमार ने देर रात आठ बजे डीएम को एंबुलेंस संचालन करने का लिखित पत्र दिया था। इसके बाद सभी एंबुलेंस जिला अस्पताल में खड़ी सभी एंबुलेंस को उनके प्वॉइंट पर भेज दिया गया। लेकिन गुरुवार को पूरे जिले में कोई एंबुलेंस का संचालन नहीं किया गया। संचालन न होने की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य और प्रशासन के अफसरों में खलबली मच गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन्होंने समस्त प्वॉइंट पर चालक और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था कर दी है। अगर कोई एंबुलेंस कर्मचारी केस पर जाने से मना करता है, तो उसे चाबी लेकर दूसरे चालक को भेजकर मरीज को अस्पताल पहुंचा रहे हैं, लेकिन धरातल पर किसी भी मरीज को एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीज और उनके तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। ऐसे में तीमारदार मरीजों को बाइक, रिक्शा, टेंपो और प्राइवेट एंबुलेंस इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
एंबुलेंस आई नहीं, तो निजी वाहन बना सहारा
गुरुवार को बेटी की तबीयत और बिगड़ गई। एंबुलेंस के न आने पर 12 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव से सीएचसी तक अपने बीमार पुत्र को निजी वाहन से लेकर पहुंचे। - मुनेंद्र सिंह गांव खनंका
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बुग्गी से बीमार बच्चे को सीएचसी लाना पड़ा
बेटे की अचानक हालत बिगड़ गई थी। इस पर एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस पर वह बुग्गी से अपने बीमार पुत्र को सीएचसी लेकर पहुंचे। संजीव तिवारी, गांव भैनपुरा
गर्भवती पत्नी को लाने के लिए ई रिक्शा बना एंबुलेंस
पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर 102 एंबुलेंस को कॉल किया। लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर गर्भवती पत्नी को ई-रिक्शा से लेकर उसे सीएचसी पहुंचे। अमन गांव मकरंदपुर
पदाधिकारी बोले... दबाव बनाकर लिखाया गया समझौतानामा
108 और 102 के जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि यह हड़ताल पर प्रदेश आह्वान पर चल रहा है। जिले में अफसरों ने दबाव बनाकर उनसे लिखित समझौतानामा लिखवा लिया था, लेकिन कोई भी कर्मचारी मांग पूरी न होने तक ड्यूटी पर जाने को तैयार नहीं है। मगर संगठन की ओर से मरीजों की समस्या को देखते हुए इमरजेंसी के तौर पर पांच गाड़ी चल रही है, अगर जरूरत पड़ती। तो और भी एंबुलेंस का संचालन करा देते। फिलहाल हड़ताल जारी है।
सीएमओ बोली : कॉल पर नहीं जाते हैं अगर एंबुलेंस कर्मी, तो करें कार्रवाई
108 और 102 के एंबुलेंस कर्मचारियों ने बुधवार को लिखित एंबुलेंस चलने का समझौता दिया था, मगर अब वह कॉल पर जाने से मना कर रहे हैं। इसके लिए सभी एमओआईसी को निर्देश दिया जा चुका है। अगर कोई कॉल पर जाने से मना करता है, तो उसे चाबी लेकर तत्काल वहां मौजूद वैकल्पिक चालक और पैरामेडिकल स्टाफ को भेजकर अटेंड कराए और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करें। डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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जिले में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 26 जुलाई को एंबुलेंस सेवा ठप कर जिला अस्पताल पार्क में धरने पर बैठे गए थे। एंबुलेंस सेवा ठप होने से स्वास्थ्य सेवा बिगड़ती देखकर शासन ने एंबुलेंस का संचालन करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देश दिए थे। इस पर बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह, एसडीएम अविनाश चंद्र मौर्या, सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल और सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम संगठन के लोगों से वार्ता करने के लिए पहुंचे थे। जहां पूरे दिन चली वार्ता के बाद जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108 और 102 के जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष गुड्डू, सिंह, जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार और जिला मीडिया प्रभारी मोहित कुमार ने देर रात आठ बजे डीएम को एंबुलेंस संचालन करने का लिखित पत्र दिया था। इसके बाद सभी एंबुलेंस जिला अस्पताल में खड़ी सभी एंबुलेंस को उनके प्वॉइंट पर भेज दिया गया। लेकिन गुरुवार को पूरे जिले में कोई एंबुलेंस का संचालन नहीं किया गया। संचालन न होने की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य और प्रशासन के अफसरों में खलबली मच गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन्होंने समस्त प्वॉइंट पर चालक और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था कर दी है। अगर कोई एंबुलेंस कर्मचारी केस पर जाने से मना करता है, तो उसे चाबी लेकर दूसरे चालक को भेजकर मरीज को अस्पताल पहुंचा रहे हैं, लेकिन धरातल पर किसी भी मरीज को एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीज और उनके तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। ऐसे में तीमारदार मरीजों को बाइक, रिक्शा, टेंपो और प्राइवेट एंबुलेंस इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
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एंबुलेंस आई नहीं, तो निजी वाहन बना सहारा
गुरुवार को बेटी की तबीयत और बिगड़ गई। एंबुलेंस के न आने पर 12 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव से सीएचसी तक अपने बीमार पुत्र को निजी वाहन से लेकर पहुंचे। - मुनेंद्र सिंह गांव खनंका
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बुग्गी से बीमार बच्चे को सीएचसी लाना पड़ा
बेटे की अचानक हालत बिगड़ गई थी। इस पर एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस पर वह बुग्गी से अपने बीमार पुत्र को सीएचसी लेकर पहुंचे। संजीव तिवारी, गांव भैनपुरा
गर्भवती पत्नी को लाने के लिए ई रिक्शा बना एंबुलेंस
पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर 102 एंबुलेंस को कॉल किया। लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर गर्भवती पत्नी को ई-रिक्शा से लेकर उसे सीएचसी पहुंचे। अमन गांव मकरंदपुर
पदाधिकारी बोले... दबाव बनाकर लिखाया गया समझौतानामा
108 और 102 के जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि यह हड़ताल पर प्रदेश आह्वान पर चल रहा है। जिले में अफसरों ने दबाव बनाकर उनसे लिखित समझौतानामा लिखवा लिया था, लेकिन कोई भी कर्मचारी मांग पूरी न होने तक ड्यूटी पर जाने को तैयार नहीं है। मगर संगठन की ओर से मरीजों की समस्या को देखते हुए इमरजेंसी के तौर पर पांच गाड़ी चल रही है, अगर जरूरत पड़ती। तो और भी एंबुलेंस का संचालन करा देते। फिलहाल हड़ताल जारी है।
सीएमओ बोली : कॉल पर नहीं जाते हैं अगर एंबुलेंस कर्मी, तो करें कार्रवाई
108 और 102 के एंबुलेंस कर्मचारियों ने बुधवार को लिखित एंबुलेंस चलने का समझौता दिया था, मगर अब वह कॉल पर जाने से मना कर रहे हैं। इसके लिए सभी एमओआईसी को निर्देश दिया जा चुका है। अगर कोई कॉल पर जाने से मना करता है, तो उसे चाबी लेकर तत्काल वहां मौजूद वैकल्पिक चालक और पैरामेडिकल स्टाफ को भेजकर अटेंड कराए और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करें। डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ