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शासन ने तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 31 Mar 2016 11:29 PM IST
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शासन ने स्वास्थ्य विभाग में तैनात तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह को गंभीर आरोपों के चलते निलंबित कर दिया। शासन ने वाहन और टाइप फोर आवास के आवंटन की रिपोर्ट भी तलब की है।
स्वास्थ्य विभाग में तैनात तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह को कुछ माह पूर्व रामपुर स्थानांतरण हो गया था। जनपद में तैनाती के दौरान तत्कालीन सीएमओ ने उनके कार्यप्रणाली की शिकायत शासन से की थी। जिसकी जांच अपर निदेशक मुरादाबाद को सौंपी गई थी। अपर निदेशक मुरादाबाद ने 26 दिसंबर को जांच आख्या प्रस्तुत कर कार्रवाई का आग्रह किया था। विशेष सचिव ने स्थानांतरण आदेश को अनुपालन न करने, अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, राजकीय वाहन व आवास पर अनाधिकृत रुप से कब्जा करने के गंभीर आरोपों के चलते उसे निलंबित कर दिया। विशेष सचिव द्वारा निदेशक परिवार कल्याण को भेजे गए पत्र में कहा गया कि आरोपी के विरुद्ध उप्र सरकारी सेवक नियमावली 1999 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई कर संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण को जांच अधिकारी नामित करें। निलंबन अवधि के दौरान आरोपी कार्यालय अपर निदेशक मुरादाबाद से संबद्ध रखा जाए। पत्र में तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी द्वारा वर्ष 2012 से सरकारी वाहन किसके द्वारा आवंटित किया गया? वाहन वापस न करने पर संबंधित सीएमओ ने कार्रवाई क्यों नहीं की? टाइप फोर के आवास को आवंटित करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई व धन वापसी की क्या कार्रवाई हुई या नहीं? इसकी रिपोर्ट सात अप्रैल तक शासन को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के निलंबन की प्रति उनको उपलब्ध कराई गई है। इसी के माध्यम से उन्हें इसकी जानकारी हुई है।
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स्वास्थ्य विभाग में तैनात तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह को कुछ माह पूर्व रामपुर स्थानांतरण हो गया था। जनपद में तैनाती के दौरान तत्कालीन सीएमओ ने उनके कार्यप्रणाली की शिकायत शासन से की थी। जिसकी जांच अपर निदेशक मुरादाबाद को सौंपी गई थी। अपर निदेशक मुरादाबाद ने 26 दिसंबर को जांच आख्या प्रस्तुत कर कार्रवाई का आग्रह किया था। विशेष सचिव ने स्थानांतरण आदेश को अनुपालन न करने, अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, राजकीय वाहन व आवास पर अनाधिकृत रुप से कब्जा करने के गंभीर आरोपों के चलते उसे निलंबित कर दिया। विशेष सचिव द्वारा निदेशक परिवार कल्याण को भेजे गए पत्र में कहा गया कि आरोपी के विरुद्ध उप्र सरकारी सेवक नियमावली 1999 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई कर संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण को जांच अधिकारी नामित करें। निलंबन अवधि के दौरान आरोपी कार्यालय अपर निदेशक मुरादाबाद से संबद्ध रखा जाए। पत्र में तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी द्वारा वर्ष 2012 से सरकारी वाहन किसके द्वारा आवंटित किया गया? वाहन वापस न करने पर संबंधित सीएमओ ने कार्रवाई क्यों नहीं की? टाइप फोर के आवास को आवंटित करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई व धन वापसी की क्या कार्रवाई हुई या नहीं? इसकी रिपोर्ट सात अप्रैल तक शासन को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि तत्कालीन स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के निलंबन की प्रति उनको उपलब्ध कराई गई है। इसी के माध्यम से उन्हें इसकी जानकारी हुई है।
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