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Pilibhit News: सरहदों पर ठहरी दोस्ती... इंतजार है फिर से खुलने वाली राहों का
Wed, 10 Sep 2025 11:53 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 10 Sep 2025 11:53 PM IST
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फखरूल इस्लाम
पीलीभीत। सरहदें भले ही कागजों पर देशों को बांटती हों, लेकिन भारत-नेपाल की सीमा पर बसे गांवों में यह फर्क कभी नहीं दिखा। बरसों से दोनों ओर के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साझेदारी निभाते रहे हैं। मगर नेपाल में बिगड़े हालात और सीमा पर लगी रोक ने इस दोस्ती की सहज राहों पर पहरा बैठा दिया है। अब जनपद सीमा से सटे गांवों के अलावा नेपाल के बाबाथान और आसपास के गांवों के लोग भारतीय सीमा में प्रवेश की अनुमति का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जनपद में पिलर संख्या 17 से 22 तक फैले इलाके में भारतीय गांव सुंदरनगर, नौजल्हा नंबर एक और दो बसे हैं। इनसे सटे नेपाल के बाबाथान के नागरिक रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए वर्षों से भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं। उनके लिए अपने देश के बाजार जाना न केवल दूर है बल्कि महंगा भी पड़ता है। यही कारण है कि वे भारतीय दुकानों से सामान लाना ही सुविधाजनक मानते थे।
भारतीय सीमावर्ती गांवों के लोग भी घरेलू सामान की फेरी लेकर नेपाल जाते रहे हैं। इस तरह दोनों ओर के लोगों में आत्मीय रिश्ते भी पनपे। दुकानदार बताते हैं कि नेपाली नागरिकों से लेन-देन नकद और उधार-दोनों तरह से होता था। संबंध इतने गहरे थे कि सब एक-दूसरे को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे।
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लेकिन हाल के दिनों में नेपाल के भीतर बढ़ते विवाद और तनाव ने हालात बदल दिए। एहतियातन सीमा पार आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी। एसएसबी और पुलिस ने चौकसी और कड़ी कर दी है। इसके चलते नेपाली नागरिकों की आवाजाही थम गई है और अब वे दूरस्थ बाजारों पर निर्भर हैं। स्थानीय गांवों के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हालात जल्द सुधरेंगे और फिर से सरहद की इन राहों पर पहले जैसी रौनक लौटेगी, जब रिश्तों की डोर सरहद की लकीरों से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ करती थी।
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भारतीय दुकानदारों से रखते हैं दोस्ताना व्यवहार
भारतीय क्षेत्र में आकर रोजमर्रा का सामान खरीदने वाले नेपाली नागरिकों से भारतीय क्षेत्र के दुकानदार दोस्ताना व्यवहार करते हैं। दुकानदार सुशांत विवेक का कहना है कि पिछले कई साल से नेपाल के नागरिक हमारे यहां कर सामान खरीदते थे। हम सब उनसे पारिवारिक सदस्य की तरह व्यवहार रखते हैं। कभी नकद तो कभी उधार देकर लेनदेन चलते थे। मगर, इन दिनों मतभेद के चलते सब बंद है।
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नेपाल ने बनवा दिए दो झूला पुल
नोमैंस लैंड और उससे सटे बाबाथान की सीमा के वार्ड में रहने वाले नेपाल के नागरिकों को घरेलू सामान खरीदने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके चलते नेपाली नागरिक अपने क्षेत्र में न जाकर नजदीक पड़ने वाले भारतीय क्षेत्र में ही सामान खरीदने आ जाते हैं। आवागमन का कोई स्थायी रास्ता न होने के चलते नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों की सुविधा के लिए कई साल पहले भारतीय क्षेत्र के सुंदरनगर और नौजल्हा के पास नेपाल क्षेत्र में दो झूला पुल बनवाए थे। इससे दोनों देशों के नागरिकों को एक दूसरे देश के आवागमन में सुविधा हो गई।
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पीलीभीत। सरहदें भले ही कागजों पर देशों को बांटती हों, लेकिन भारत-नेपाल की सीमा पर बसे गांवों में यह फर्क कभी नहीं दिखा। बरसों से दोनों ओर के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साझेदारी निभाते रहे हैं। मगर नेपाल में बिगड़े हालात और सीमा पर लगी रोक ने इस दोस्ती की सहज राहों पर पहरा बैठा दिया है। अब जनपद सीमा से सटे गांवों के अलावा नेपाल के बाबाथान और आसपास के गांवों के लोग भारतीय सीमा में प्रवेश की अनुमति का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
जनपद में पिलर संख्या 17 से 22 तक फैले इलाके में भारतीय गांव सुंदरनगर, नौजल्हा नंबर एक और दो बसे हैं। इनसे सटे नेपाल के बाबाथान के नागरिक रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए वर्षों से भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं। उनके लिए अपने देश के बाजार जाना न केवल दूर है बल्कि महंगा भी पड़ता है। यही कारण है कि वे भारतीय दुकानों से सामान लाना ही सुविधाजनक मानते थे।
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भारतीय सीमावर्ती गांवों के लोग भी घरेलू सामान की फेरी लेकर नेपाल जाते रहे हैं। इस तरह दोनों ओर के लोगों में आत्मीय रिश्ते भी पनपे। दुकानदार बताते हैं कि नेपाली नागरिकों से लेन-देन नकद और उधार-दोनों तरह से होता था। संबंध इतने गहरे थे कि सब एक-दूसरे को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे।
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लेकिन हाल के दिनों में नेपाल के भीतर बढ़ते विवाद और तनाव ने हालात बदल दिए। एहतियातन सीमा पार आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी। एसएसबी और पुलिस ने चौकसी और कड़ी कर दी है। इसके चलते नेपाली नागरिकों की आवाजाही थम गई है और अब वे दूरस्थ बाजारों पर निर्भर हैं। स्थानीय गांवों के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हालात जल्द सुधरेंगे और फिर से सरहद की इन राहों पर पहले जैसी रौनक लौटेगी, जब रिश्तों की डोर सरहद की लकीरों से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ करती थी।
भारतीय दुकानदारों से रखते हैं दोस्ताना व्यवहार
भारतीय क्षेत्र में आकर रोजमर्रा का सामान खरीदने वाले नेपाली नागरिकों से भारतीय क्षेत्र के दुकानदार दोस्ताना व्यवहार करते हैं। दुकानदार सुशांत विवेक का कहना है कि पिछले कई साल से नेपाल के नागरिक हमारे यहां कर सामान खरीदते थे। हम सब उनसे पारिवारिक सदस्य की तरह व्यवहार रखते हैं। कभी नकद तो कभी उधार देकर लेनदेन चलते थे। मगर, इन दिनों मतभेद के चलते सब बंद है।
नेपाल ने बनवा दिए दो झूला पुल
नोमैंस लैंड और उससे सटे बाबाथान की सीमा के वार्ड में रहने वाले नेपाल के नागरिकों को घरेलू सामान खरीदने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके चलते नेपाली नागरिक अपने क्षेत्र में न जाकर नजदीक पड़ने वाले भारतीय क्षेत्र में ही सामान खरीदने आ जाते हैं। आवागमन का कोई स्थायी रास्ता न होने के चलते नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों की सुविधा के लिए कई साल पहले भारतीय क्षेत्र के सुंदरनगर और नौजल्हा के पास नेपाल क्षेत्र में दो झूला पुल बनवाए थे। इससे दोनों देशों के नागरिकों को एक दूसरे देश के आवागमन में सुविधा हो गई।