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Pilibhit News: पीटीआर के जंगल प्रहरियों को मिलेगा सुरक्षा कवच
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पीलीभीत। घने जंगलों में जान जोखिम में डालकर बाघों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फ्रंट लाइन वर्करों के लिए राहत भरी खबर है। अब ड्यूटी के दौरान किसी हादसे या वन्यजीव हमले का शिकार होने पर उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने ऐसे फ्रंट लाइन वर्करों को तीन लाख रुपये तक की सहायता देने की पहल की है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही योजना को लागू कर दिया जाएगा।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पांचों रेंजों में तैनात वन वॉचर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। घने जंगलों में लगातार गश्त करना, बाघों और अन्य वन्यजीवों की मॉनिटरिंग करना, अवैध गतिविधियों पर नजर रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों से निपटना इनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। इस दौरान हर समय उन पर जंगली जानवरों के हमले और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। अब तक ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी का शिकार होने वाले वन वॉचरों के लिए मुआवजे की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।
ऐसे में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की यह पहल फील्ड स्टाफ के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। प्रस्ताव के तहत यदि कोई फ्रंट लाइन वर्कर जंगल में ड्यूटी के दौरान हादसे, वन्यजीव हमले या अन्य दुर्घटना का शिकार होता है तो उसे तीन लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तैयार इस प्रस्ताव को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा गया है। अब शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार अनुमति मिलते ही योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे दो सौ कर्मचारियों को लाभ मिल सकेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि तैयार किए गए प्रस्ताव को शासन में भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद यह योजना लागू की जाएगी। संवाद
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पांचों रेंजों में तैनात वन वॉचर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। घने जंगलों में लगातार गश्त करना, बाघों और अन्य वन्यजीवों की मॉनिटरिंग करना, अवैध गतिविधियों पर नजर रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों से निपटना इनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। इस दौरान हर समय उन पर जंगली जानवरों के हमले और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। अब तक ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी का शिकार होने वाले वन वॉचरों के लिए मुआवजे की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।
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ऐसे में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की यह पहल फील्ड स्टाफ के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। प्रस्ताव के तहत यदि कोई फ्रंट लाइन वर्कर जंगल में ड्यूटी के दौरान हादसे, वन्यजीव हमले या अन्य दुर्घटना का शिकार होता है तो उसे तीन लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तैयार इस प्रस्ताव को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा गया है। अब शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार अनुमति मिलते ही योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे दो सौ कर्मचारियों को लाभ मिल सकेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि तैयार किए गए प्रस्ताव को शासन में भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद यह योजना लागू की जाएगी। संवाद