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महंगाई से किसानों की कमर तोड़ने की तैयारी

Tue, 12 Apr 2016 11:07 PM IST
ब्यूरो  पीलीभीत/माधोटांडा।
ब्यूरो  पीलीभीत/माधोटांडा। Updated Tue, 12 Apr 2016 11:07 PM IST
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Farmers preparing to break the back of inflation
जल संसाधन - फोटो : अमर उजाला

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प्रदेश सरकार ने सिंचाई मुफ्त करने के साथ बढ़ाईं आबपाशी दरें
आबपाशी में हर साल होगी दस प्रतिशत की रिकार्ड बढ़ोत्तरी

सपा सरकार ने सत्ता की बागडोर संभालने के साथ ही फसलों की सिंचाई मुफ्त कर किसानों को बड़ी राहत दी थी, लेकिन सरकार ने उसी दौरान सिंचाई के लिए आबपाशी की प्रति हेक्टेयर दरों में न केवल बढ़ोत्तरी कर दी, बल्कि हर साल दस प्रतिशत वृद्धि करने का भी निर्णय ले लिया था। मुफ्त सिंचाई की घोषणा से अभी तो किसान खुश हैं, लेकिन जब मुफ्त सिंचाई का आदेश हटेगा तो किसानों पर महंगाई का चाबुक भी जमकर चलेगा।  सपा सरकार ने शपथ लेने के बाद सर्वप्रथम किसानों को राहत देते हुए फसलों की सिंचाई को नि:शुल्क कर दिया था, लेकिन सिंचाई विभाग के राजस्व महकमे को पूर्व की भांति जमाबंदी तैयार कर भेजते रहने के निर्देश दिए गए थे। इससे सरकार पर एक बड़े घाटे का बोझ आ गया था। सरकार ने किसानों को सिंचाई मुफ्त करने के साथ प्रति हेक्टेयर सिंचाई की दरें भी काफी बढ़ा दी थीं। गत वर्ष 1422 फसली में आबपाशी की दरें न केवल बढ़ाई गईं हैं, बल्कि यह भी फैसला लिया गया था कि अब हर साल प्रति हेक्टेयर सिंचाई की दरों में दस प्रतिशत बढ़ोत्तरी की जाती रहेगी।

आबपाशी की सपा सरकार बनने से पूर्व और वर्तमान दरें
फसल        पूर्व दरें         वर्तमान दरें 
गेहूं          287 रुपये          1052 रुपये
धान         287 रुपये          1052 रुपये
ज्वार         99 रुपये           363 रुपये
चारा         156 रुपये         363 रुपये
गन्ना         474 रुपये         1734 रुपये
मेंथा         287 रुपये         1052 रुपये
लाही         212 रुपये        773 रुपये
आलू         384 रुपये        1304 रुपये
पलेवा         399 रुपये        363 रुपये 
हरी खाद     69 रुपये           253 रुपये
(उपरोक्त सभी दरें प्रति हेक्टयेर हैं)

सरकार बनते ही अभिलेखों में बढ़ा दी थीं दरें
सपा ने सरकार बनते ही पुरानी दरों को अभिलेखों में बढ़ा दिया था, लेकिन किसानों के लिए सिंचाई मुफ्त कर दी थी। हालांकि जमाबंदी लगातार बनाकर भेजी जाती रही। अब 1423 फसली में यह रकम शासनादेश के मुताबिक दस प्रतिशत और बढ़ा दी गई है। इसी तरह आगे भी हर साल फसली में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती रहेगी। सवाल यह है कि अभी तो सपा सरकार ने यह दरें अभिलेखों में ही बढ़ाई हैं और किसानों से इसकी वसूली भी नहीं की जा रही है लेकिन यदि प्रदेश सरकार ने घाटा पूरा करने के लिए आबपाशी वसूलने के पुन: आदेश दिए तो किसानों की आबपाशी की बढ़ी दरों से कमर ही टूट जाएगी। 
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हर साल किसानों की कितने रकबे की फसल सिंचित होती है, उसका पूरा ब्यौरा रखा जा रहा है। किसानों के नाम और रकबे सहित सिंचित फसलों के प्रति हेक्टेयर ब्यौरे के हिसाब से जमाबंदी कराई जा रही है और 1422 फसली से जो आबपाशी फसलों की निर्धारित की गई थी, उसमें हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती रहेगी।
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- सुरेंद्रपाल सिंह, जिलेदार, सिंचाई विभाग
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