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Pilibhit News: करोड़ों की ठोकरें भी नाकाम, अब टहनियों और रेत के बोरों से रोकने की कोशिश
Wed, 10 Sep 2025 11:55 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 10 Sep 2025 11:55 PM IST
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कलीनगर। गोरख डिब्बी में शारदा सागर खंड के अभियंता अब करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई ठोकरों को बचाने के लिए टेंपरेरी उपायों का सहारा ले रहे हैं। इस इलाके में कटान रोकने को बनाई गई ठोकरें बरसात के अंतिम दौर में नदी के कटान की जद में आ गई। शुरूआती नुकसान को भांपते हुए अभियंताओं ने ठोकरों को बचाने के लिए आम की टहनियों, झाड़-झंखाड़ और सीमेंट के खाली बोरों में नदी की रेत भरकर लगाने की कवायद शुरू कर दी है।
तहसील क्षेत्र के नगरिया खुर्द कला ग्राम पंचायत से गोरखडिब्बी में शारदा सागर खंड की ओर से करीब पांच करोड़ की लागत से पत्थर की ठोकरे बनाई गई थी। ऐसा माना गया था कि इन ठोकरों के बनने से नदी इन इलाके में कटान नहीं करेगी, लेकिन बरसात के अंतिम समय में जलस्तर बढ़ने के बाद नदी ने ठोकरों को ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। गोरखडिब्बी में ठोकर संख्या 27 को नदी ने क्षतिग्रस्त किया था। इसके बाद जमीन का कटान भी शुरू हो गया था।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब मामूली कटान भी ठोकरों को चुनौती देने लगा तो इंजीनियरिंग की मजबूती पर सवाल उठना लाजिमी है। अभियंताओं ने ठोकरों के पीछे केवल नदी से निकाली गई रेत डलवा दी थी, जिस पर ग्रामीणों ने पहले ही आपत्ति जताई थी। हालांकि अभियंता इस काम को लखनऊ मुख्यालय से आए आदेश का हवाला देकर सही ठहराते रहे। अब हालात यह हैं कि करोड़ों की लागत से बने पत्थर के ठोकरों की रक्षा करने के लिए हरी-भरी डालियां और रेत से भरे बोरे लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर शारदा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ता है तो कटान और तेज हो सकता है और मौजूदा उपाय नाकाफी साबित होंगे। फिलहाल नदी का जलस्तर घट रहा है और कटान की गति थमी है, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि अगली बरसात में हालात और खराब हो सकते हैं। अधिशासी अभियंता पीके गौतम का कहना है कि ठोकरों के आसपास अस्थायी कार्य कराया जा रहा है। हालांकि अभी नदी से ठोकरों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है।
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शारदा के जलस्तर में गिरावट से कटान हुआ धीमा, किसानों को राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। शारदा नदी का जलस्तर खासा कम होने पर कटान की गति बहुत धीमी हो गई। इससे गांव हजारा, चंदिया हजारा, बिनौता ताल्लुके गजरौला, आजाद नगर सहित नदी किनारे के अन्य गांव के किसानों ने राहत की सांस ली। नदी गांव विनौता ताल्लुके गजरौला के समीप जंगल में कटान कर रही है। धु्रव कॉलोनी के समीप मंगलवार को शुरू हुआ बचाव कार्य बुधवार को मजदूरों के न आने से नहीं हुआ। राजस्व विभाग ने बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए घरों का सर्वे करना शुरू किया है। धु्रव कॉलोनी के समीप कटान रोकने को बाढ़ खंड की ओर से मंगलवार को बचाव कार्य शुरू कराए गए थे। दूसरे दिन बुधवार को मजदूरों के न आने से बचाव कार्य नहीं हो सके। इस बीच नदी का जलस्तर काफी कम होने से कटान की गति बहुत धीमी हो गई। इससे नदी किनारे के किसानों को राहत मिली है। नदी कब पेठे में जाएगी, अब किसानों इसका इंतजार है। गांव विनौता ताल्लुके गजरौला के समीप नदी धीमी गति से कटान कर रही है।
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तहसील क्षेत्र के नगरिया खुर्द कला ग्राम पंचायत से गोरखडिब्बी में शारदा सागर खंड की ओर से करीब पांच करोड़ की लागत से पत्थर की ठोकरे बनाई गई थी। ऐसा माना गया था कि इन ठोकरों के बनने से नदी इन इलाके में कटान नहीं करेगी, लेकिन बरसात के अंतिम समय में जलस्तर बढ़ने के बाद नदी ने ठोकरों को ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। गोरखडिब्बी में ठोकर संख्या 27 को नदी ने क्षतिग्रस्त किया था। इसके बाद जमीन का कटान भी शुरू हो गया था।
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क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब मामूली कटान भी ठोकरों को चुनौती देने लगा तो इंजीनियरिंग की मजबूती पर सवाल उठना लाजिमी है। अभियंताओं ने ठोकरों के पीछे केवल नदी से निकाली गई रेत डलवा दी थी, जिस पर ग्रामीणों ने पहले ही आपत्ति जताई थी। हालांकि अभियंता इस काम को लखनऊ मुख्यालय से आए आदेश का हवाला देकर सही ठहराते रहे। अब हालात यह हैं कि करोड़ों की लागत से बने पत्थर के ठोकरों की रक्षा करने के लिए हरी-भरी डालियां और रेत से भरे बोरे लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर शारदा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ता है तो कटान और तेज हो सकता है और मौजूदा उपाय नाकाफी साबित होंगे। फिलहाल नदी का जलस्तर घट रहा है और कटान की गति थमी है, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि अगली बरसात में हालात और खराब हो सकते हैं। अधिशासी अभियंता पीके गौतम का कहना है कि ठोकरों के आसपास अस्थायी कार्य कराया जा रहा है। हालांकि अभी नदी से ठोकरों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है।
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शारदा के जलस्तर में गिरावट से कटान हुआ धीमा, किसानों को राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। शारदा नदी का जलस्तर खासा कम होने पर कटान की गति बहुत धीमी हो गई। इससे गांव हजारा, चंदिया हजारा, बिनौता ताल्लुके गजरौला, आजाद नगर सहित नदी किनारे के अन्य गांव के किसानों ने राहत की सांस ली। नदी गांव विनौता ताल्लुके गजरौला के समीप जंगल में कटान कर रही है। धु्रव कॉलोनी के समीप मंगलवार को शुरू हुआ बचाव कार्य बुधवार को मजदूरों के न आने से नहीं हुआ। राजस्व विभाग ने बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए घरों का सर्वे करना शुरू किया है। धु्रव कॉलोनी के समीप कटान रोकने को बाढ़ खंड की ओर से मंगलवार को बचाव कार्य शुरू कराए गए थे। दूसरे दिन बुधवार को मजदूरों के न आने से बचाव कार्य नहीं हो सके। इस बीच नदी का जलस्तर काफी कम होने से कटान की गति बहुत धीमी हो गई। इससे नदी किनारे के किसानों को राहत मिली है। नदी कब पेठे में जाएगी, अब किसानों इसका इंतजार है। गांव विनौता ताल्लुके गजरौला के समीप नदी धीमी गति से कटान कर रही है।