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बिजली बिल भरने के बावजूद बना है कर्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Wed, 18 May 2016 11:37 PM IST
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पीड़ित
- फोटो : pilibhit, beureu
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भले ही शेड्यूल के मुताबिक बिजली सप्लाई देने में विद्युत विभाग जनता की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका है, लेकिन बिल भुगतान कराने में एक कदम आगे चल रहा है। बिल जमा होने के बाद भी एक मजदूर पर हजारों का बकाया भुगतान दर्शा दिया गया है। एक साथ उसके नाम दो बिल जारी कर दिए गए हैं। इसकी शिकायत करने पर उसको जेल भिजवाने की धमकी दी जा रही है। पीड़ित ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
विद्युत विभाग की कार्यशैली की हकीकत को उजागर करने का एक मामला शहर से सटे गौहनिया गांव से सामने आया है। यहां के रहने वाले सुंदरलाल पुत्र गोविंदराम मजदूर कर परिवारीजनों का भरण पोषण करता है। उसके अनुसार वह विद्युत विभाग का वीपीएल कनेक्शन धारक है। उसका करीब बीस महीने का बिल जमा नहीं था, जिस पर उसकी आरसी काट दी गई थी। इसका पूरा भुगतान 31 मार्च 2016 को 7,420 रुपये अदा कर दिया गया। इसके बाद से उसकी कोई देनदारी बिजली विभाग के लिए नहीं थी। आरोप है कि अब बिजली विभाग की ओर से उसके नाम दो बिल और जारी कर दिए गए हैं, जिसमें एक 10,678 रुपये और दूसरा 28,142 रुपये का है। मंगलवार को बिल मिलते ही वह रोडवेज के पास बने अधिशासी अभियंता के कार्यालय में इसकी शिकायत करने पहुंचा, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई, बल्कि उसको आरसी कटने की बात कहकर जेल भिजवाने की धमकी दी जाने लगी। पीड़ित का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही से बिल जारी किए गए हैं। उसने मामले की जांच कराकर न्याय की मांग की है।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है कि गलती से बिल उनके नाम पर जारी हो गया हो। पीड़ित मुझसे आकर मिले, समाधान कराया जाएगा। उसको जेल भिजवाने की धमकी देने का आरोप बेबुनियाद है।
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- लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता (विद्युत विभाग)
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विद्युत विभाग की कार्यशैली की हकीकत को उजागर करने का एक मामला शहर से सटे गौहनिया गांव से सामने आया है। यहां के रहने वाले सुंदरलाल पुत्र गोविंदराम मजदूर कर परिवारीजनों का भरण पोषण करता है। उसके अनुसार वह विद्युत विभाग का वीपीएल कनेक्शन धारक है। उसका करीब बीस महीने का बिल जमा नहीं था, जिस पर उसकी आरसी काट दी गई थी। इसका पूरा भुगतान 31 मार्च 2016 को 7,420 रुपये अदा कर दिया गया। इसके बाद से उसकी कोई देनदारी बिजली विभाग के लिए नहीं थी। आरोप है कि अब बिजली विभाग की ओर से उसके नाम दो बिल और जारी कर दिए गए हैं, जिसमें एक 10,678 रुपये और दूसरा 28,142 रुपये का है। मंगलवार को बिल मिलते ही वह रोडवेज के पास बने अधिशासी अभियंता के कार्यालय में इसकी शिकायत करने पहुंचा, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई, बल्कि उसको आरसी कटने की बात कहकर जेल भिजवाने की धमकी दी जाने लगी। पीड़ित का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही से बिल जारी किए गए हैं। उसने मामले की जांच कराकर न्याय की मांग की है।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है कि गलती से बिल उनके नाम पर जारी हो गया हो। पीड़ित मुझसे आकर मिले, समाधान कराया जाएगा। उसको जेल भिजवाने की धमकी देने का आरोप बेबुनियाद है।
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- लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता (विद्युत विभाग)