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Pilibhit News: पैंटून पुल नहीं बना... 150 किमी का चक्कर काटें या नाव की जोखिम भरी सवारी करें 60 हजार लोग
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शारदा नदी पर संचालित नाव से उस पार जाते लोग। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पूरनपुर ट्रांस शारदा क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों में रह रहे करीब 60 हजार लोग पैंटून पुल के अभाव में जान जोखिम में डालकर एक नाव से शारदा नदी पार कर रहे हैं। विकल्प के तौर पर ट्रांस शारदा क्षेत्र के लोग करीब डेढ़ सौ किलोमीटर घूमकर पलिया होते हुए आ-जा रहे हैं। यहां बता दें कि बारिश के बाद हर साल 15 नवंबर को पैंटून पुल बना दिया जाता है, लेकिन इस बार लापरवाह ठेकेदारों ने अब तक काम ही नहीं शुरू किया है।
हर साल बारिश के दौरान पूरनपुर तहसील क्षेत्र की ट्रांस शारदा की 16 ग्राम पंचायतों का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से टूट जाता है। किसी को आना भी होता है तो वह पलिया होकर पूरनपुर या जिला मुख्यालय आ पाता है। बरसात में पूरनपुर का सफर करीब 150 किलोमीटर का हो जाता है। बारिश के बाद नदी में पानी घटने पर अस्थायी पुल को 15 नवंबर से शुरू कर दिया जाता है। इस बार पुल को बनवाने में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। नदी पर अब तक पैंटून पुल नहीं बन सका है। इसके लिए शासन की ओर से 39.80 लाख रुपये का बजट भी जारी किया जा चुका है। सब कुछ होने के बाद भी पुल न बनने से क्षेत्र की करीब साठ हजार की आबादी के सामने मुख्यालय तक आवागमन की समस्या बनी हुई है। पुल केे लिए अक्तूबर से ही लोक निर्माण विभाग की ओर से कोशिश शुरू कर दी गई। दिक्कत यह आ रही है कि इस बार ठेकेदारों ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं।
तीन बार निरस्त हुए टेेंडर, अब चौथी बार कवायद
शारदा नदी पर करीब सवा सौ मीटर लंबे पैंटून पुल के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से पूर्व में तीन बार टेंडर प्रक्रिया की जा चुकी है। तीनों ही बार कोई फर्म इसमें शामिल नहीं हुई। इसके चलते टेंडर को निरस्त करना पड़ा। अब चौथी बार फिर से टेंडर निकाले गए हैं। इसमें मात्र एक फर्म ने ही टेंडर डाला है। कोरम पूरा न होने के कारण इस बार भी टेंडर प्रक्रिया टलने की आशंका बढ़ गई है। यहां बता दें कि नियमानुसार किसी कार्य के लिए कम से कम चार टेंडर होने चाहिए।
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नाव से कभी भी हो सकता है हादसा
ट्रांस शारदा क्षेत्र के लोग नाव से आ-जा रहे हैं। रोजाना आने-जाने वाले लोग नाव में मोटरसाइकिल, साइकिल आदि रख लेते हैं। इसके बाद दूसरी तरफ आते-जाते हैं। नियमानुसार, नाव में 15-16 लोग बैठने चाहिए, लेकिन इसमें 25 से भी ज्यादा लोग बैठ जाते हैं। चूंकि प्रशासन की तरफ से नाव मुहैया कराई गई है इसलिए किराया नहीं लिया जाता, लेकिन नाव पर भार ज्यादा होने के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है।
चौथी बार टेंडर निकाला गया है। यह 14 को खोला जाएगा और इसके बाद ही इसमें कोई निर्णय हो सकेगा।
- उदय नरायण, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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हर साल बारिश के दौरान पूरनपुर तहसील क्षेत्र की ट्रांस शारदा की 16 ग्राम पंचायतों का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से टूट जाता है। किसी को आना भी होता है तो वह पलिया होकर पूरनपुर या जिला मुख्यालय आ पाता है। बरसात में पूरनपुर का सफर करीब 150 किलोमीटर का हो जाता है। बारिश के बाद नदी में पानी घटने पर अस्थायी पुल को 15 नवंबर से शुरू कर दिया जाता है। इस बार पुल को बनवाने में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। नदी पर अब तक पैंटून पुल नहीं बन सका है। इसके लिए शासन की ओर से 39.80 लाख रुपये का बजट भी जारी किया जा चुका है। सब कुछ होने के बाद भी पुल न बनने से क्षेत्र की करीब साठ हजार की आबादी के सामने मुख्यालय तक आवागमन की समस्या बनी हुई है। पुल केे लिए अक्तूबर से ही लोक निर्माण विभाग की ओर से कोशिश शुरू कर दी गई। दिक्कत यह आ रही है कि इस बार ठेकेदारों ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं।
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तीन बार निरस्त हुए टेेंडर, अब चौथी बार कवायद
शारदा नदी पर करीब सवा सौ मीटर लंबे पैंटून पुल के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से पूर्व में तीन बार टेंडर प्रक्रिया की जा चुकी है। तीनों ही बार कोई फर्म इसमें शामिल नहीं हुई। इसके चलते टेंडर को निरस्त करना पड़ा। अब चौथी बार फिर से टेंडर निकाले गए हैं। इसमें मात्र एक फर्म ने ही टेंडर डाला है। कोरम पूरा न होने के कारण इस बार भी टेंडर प्रक्रिया टलने की आशंका बढ़ गई है। यहां बता दें कि नियमानुसार किसी कार्य के लिए कम से कम चार टेंडर होने चाहिए।
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नाव से कभी भी हो सकता है हादसा
ट्रांस शारदा क्षेत्र के लोग नाव से आ-जा रहे हैं। रोजाना आने-जाने वाले लोग नाव में मोटरसाइकिल, साइकिल आदि रख लेते हैं। इसके बाद दूसरी तरफ आते-जाते हैं। नियमानुसार, नाव में 15-16 लोग बैठने चाहिए, लेकिन इसमें 25 से भी ज्यादा लोग बैठ जाते हैं। चूंकि प्रशासन की तरफ से नाव मुहैया कराई गई है इसलिए किराया नहीं लिया जाता, लेकिन नाव पर भार ज्यादा होने के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है।
चौथी बार टेंडर निकाला गया है। यह 14 को खोला जाएगा और इसके बाद ही इसमें कोई निर्णय हो सकेगा।
- उदय नरायण, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी