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बनवसा बैराज से अचानक छोड़े गए 75 हजार क्यूसेक पानी ने शारदा उफनाई, पैंटून पुल बहा

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 May 2021 01:41 AM IST
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पूरनपुर (पीलीभीत)। बनवसा बैराज से छोड़े गए पानी से शारदा नदी अचानक उफना गई। पानी के तेज बहाव के साथ नदी पर बना पैंटून पुल बह गया। आसपास के निचले इलाकों में जलभराव हो गया। राहुलनगर गांव में पानी घुसने से लोगों को अपना सामान समेटना पड़ा। पुल बहने से तहसील मुख्यालय से शारदा नदी क्षेत्र के गांवों का आवागमन बंद हो गया। पूरनपुर तहसील जाने के लिए लोगों को 30 के बजाय 130 किलोमीटर की दूरी तय करने पड़ी।
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शारदा नदी में बनवसा बैराज से पानी छोड़ा जाता है। बृहस्पतिवार रात बनवसा बैराज से अचानक शारदा नदी में 75 हजार क्यूसेक पानी रिलीज किया गया, जिससे शारदा उफना गई। पानी बढ़ने से पूरनपुर तहसील क्षेत्र में शारदा नदी के धनारा घाट पर बना पैंटून पुल तेज धार के साथ तीन टुकड़ों में बंटकर बह गया, जो करीब चार किलोमीटर दूर गांव राहुलनगर के समीप जंगल में नदी किनारे फंसा मिला। पैंटून पुल बहने से तहसील क्षेत्र के शारदा पार इलाके में आने जाने का रास्ता बंद हो गया। यहां से पूरनपुर की दूरी करीब 30 किलोमीटर होगी। पैंटून पुल बहने से लोगों को पूरनपुर तहसील मुख्यालय जाने आने के लिए 30 के बजाय करीब 130 किमी की दूरी तय करनी होगी।

शारदा ऊफनाने से ग्राम राहुलनगर में पानी घुस गया। बाढ़ की आशंका से लोग घरेलू सामान समेटने लगे। शारदा नदी के किनारे कई गांव के लोग सब्जी, तरबूज, खरबूजा की फसल करते है। यहां होने वाली कई सब्जियां दिल्ली तक सप्लाई की जाती हैं। अबकी शारदा किनारे परवल, शिमला मिर्च, तरबूज, खरबूजा, लौकी, खीरा आदि फसलें खड़ी थीं। जो पानी के साथ बह गई।
पुल बहने से लाखों रुपये के नुकसान की उम्मीद
पिछले कई साल से शारदा दो धारों में बंटी हुई है, जिसकी वजह से दो पैंटून पुल बनाए जाते हैं। इस बार तीन पांटून पुल बनाए गए थे, जिनमें तीसरा 26 पैंटून पुल है, जो पानी छोड़े जाने से तेज धारा के साथ बह गया। इस पुल में छह सौ स्पीलपर लगाए गए थे, जिनमें से डेढ़ सौ स्लीपर शारदा में बहने की आशंका है। एक स्लीपर की कीमत 25 हजार रुपये बताई जा रही है।
पांटून पल से एक लाख लोगों का था आवागमन
शारदा पार इलाके में मुरैनिया गांधीनगर, शांतीनगर, राणा प्रतापनगर, कबीरगंज, विजयनगर, नहरोसा, श्रीनगर, कुठिया गुदिया, सिद्धनगर, भरतपुर, वमनपुर भागीरथ, रामनगर, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, अशोकनगर, शास्त्रीनगर सहित सोलह ग्राम पंचायतें हैं, जिमें एक लाख के करीब आबादी है। इस इलाके के लोगों का आना जाना पैंटून पुल से होकर था।
शारदा में बनवसा बैराज से अचानक पानी रिलीज किए जाने से पुल बह गया, जो राहुलनगर के समीप जंगल में नदी किनारे फंसा मिला है। नदी का पानी कम होने के बाद नुकसान पता लग सकेगा। पुल पखवाड़ा भर बाद हटाया जाना था। - मुकेश कुमार, जेई पीडब्ल्यूडी
जलस्तर बढ़ने के बाद शारदा पर बना पैंटून पुल बह गया। इसकी जानकारी मिलने पर पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को मौके पर भेजा गया है। मामले की जानकारी जुटाई जा है। ग्रामीणों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम
पलिया, मैलानी खुटार होकर जाना पड़ेगा पूरनपुर
पैंटून पुल बहने के बाद लोग आवागमन को लेकर चिंतित है। लोगों को पूरनपुर तहसील मुख्यालय जाने के लिए संपूर्णानगर, पलिया, मैलानी, खुटार होकर सफर करना पड़ेेगा। समय के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
चार पुल हुए थे स्वीकृत, एक बन सका
शारदा पार के लोगों को जाने आने के लिए अलग-अलग चार बड़े पांटून पुल स्वीकृत हुए थे। एक पैंटून पुल के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये मिले थे। अभी राणा प्रताप नगर के समीप पुल का निर्माण पूरा हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज, रामनगर-चंद्रनगर रास्ते पर और बाजार घाट में एसएसबी के कैंप के समीप पुल का निर्माण होना है। रामनगर से चंद्रनगर मार्ग पर पुल निर्माण तीन महीने पहले शुरू कर दिया गया था।
शारदा नदी पर पक्का पुल निर्माण न होने से तहसील, जिला मुख्यालय से क्षेत्र के लोगों का संपर्क आठ महीने कटा रहता है। लोगों को तहसील मुख्यालय आवागमन करने को घंटों सफर करना होता है। आवागमन को सीधे वाहन बसों या अन्य वाहनों की सुविधा न होने से भारी परेशानी होती है। - सुभाष चंद्र, आजाद नगर
बाढ़ के चलते क्षेत्र का जनजीवन अस्त व्यस्त रहता है। पैंटून पुल के अलावा क्षेत्र के विभिन्न रास्ते बाढ़ से खराब होने के चलते चार बड़े पुल बनाए जा रहे थे। मात्र एक पुल का निर्माण पूरा हो सका है। रास्ते खराब होने और जलभराव से लोगों को खासी दिक्कतें होती है। - शकील, कबीरगंज।
शारदापार में 17 ग्राम पंचायतें है। करीब एक लाख लोग रहते है। बाढ़ से तो लोग जूझते ही है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रही है। बिजली सप्लाई सहित कई सुविधाओं के लिए लखीमपुर के चक्कर काटने पड़ते है। अब दिक्कत और बढ़ गई। - अमित कुमार, श्रीनगर
ग्रामीणों की समस्याओं से किसी को खास सरोकार नहीं रहता। जगह-जगह फोटो खिंचवाकर दिखावा किया जाता है। चुनाव में भी क्षेत्र के विकास को खूब वायदे होते है। मगर बाद में सब भूल जाते है। बाढ़ से बचाव के काम तब शुरू होते है। तब बाढ़ आने का समय नजदीक आ जाता है। - उमेश यादव

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