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88 फीसदी बच्चों का नहीं हो सका सामान्य टीकाकरण

Fri, 11 Jun 2021 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 12:23 AM IST
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children vaccination
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग का प्रतिरक्षण विभाग कोविड टीकाकरण के बारे में तो बड़े-बड़े दावे करता रहा लेकिन तीसरी लहर आने से पहले बच्चों के सामान्य टीकाकरण से हाथ खींचकर उनके लिए खतरा और बढ़ा दिया। लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे साल में मात्र 12 फीसदी टीकाकरण ही हो सका है। मई के बाद स्थिति और दयनीय हो गई है। एक जून से तो टीकाकरण भी नहीं कराया जा रहा है। टीकाकरण न होने के पीछे विभाग कोरोना को वजह बता रहा है।
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पोलियो, मीजल्स और हिपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए उन्हें जन्म के समय से ही 10 वर्ष तक की उम्र तक अलग-अलग टीके लगाए जाते हैं। जो बच्चे सामान्य टीकाकरण से छूट जाते हैं, उनके लिए राज्य सरकार के मिशन इंद्रधनुष के तहत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन टीकाकरण कराया जाता है ताकि सभी को टीकाकरण कराया जा सके।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च तक हर महीने जिले में 12 हजार से ज्यादा बच्चों को टीका लगाए जाने का दावा किया जा रहा है, मगर कोरोना की दूसरी लहर में यह अभियान पस्त पड़ गया। 2021-22 में शासन से 60322 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें सिर्फ अभी तक अप्रैल में 2818 और मई में 2249 बच्चों को टीका लगाया गया है। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के टीकाकरण से हाथ खींच लिए। और खुद को कोविड टीकाकरण में व्यस्त कर लिया है। इनमें खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे शामिल हैं। 15 मई के बाद से मिशन इंद्रधनुष के रंग और भी फीके पड़ते जा रहे हैं। जिले में अब तक मात्र 5067 बच्चों को ही टीके लग सके हैं, जबकि 55225 बच्चे अभी भी टीकाकरण से वंचित हैं।
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प्रतिरोधक क्षमता ही अच्छी नहीं होगी तो बच्चे कोरोना से कैसे लड़ेंगे जंग
आशंका जताई जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगी। लिहाजा यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों में जब दूसरी गंभीर बीमारियों से लड़ने लायक प्रतिरोधक क्षमता ही नहीं होगी तो वे कोरोना से कैसे लड़ेंगे। कहा जा रहा है कि कोरोना के दौर में बच्चों के टीकाकरण में और ज्यादा गंभीरता दिखाने की जरूरत थी ताकि उन्हें दूसरी बीमारियों से तो कम से कम सुरक्षित रखा जा सकता।
बेहद जरूरी है बच्चों का टीकाकरण
आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा वर्मा ने बताया कि टीकाकरण बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। इससे उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। टीके संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देते हैं। 12 से 24 महीने के बीच बच्चों को दो महीने, चार महीने, नौ महीने और 12 और 24 महीने के अंतराल पर टीका लगाया जाता है।

ये टीके लगते हैं बच्चों को
>> जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हिपेटाइटिस बी
>> जन्म से 6 सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वाइरस-1, आईपीवी-1पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
>> जन्म से 14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वाइरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
>> 9 से 12 महीने पर- मीजल्स-रुबेला-1, पीसीवी बूस्टर डोज, जापानी इंसिफेलाइटिस-1
>> 16 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजल्स-रुबेला-2, डीपीटी बूस्टर-1, जापानी इंसिफेलाइटिस-2
>> 5 से 10 वर्ष पर- डीपीटी बूस्टर-2
>> जन्म से 10 वर्ष पर- टिटनेस डिफ्थीरिया
नए वित्तीय वर्ष में अभी टीकाकरण पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है। इसका कारण यह है कि कोविड टीकाकरण में अधिकांश स्टाफ लगा हुआ है। जिस कारण टीकाकरण नियमित रूप से नहीं हो पा रहा है। इसके लिए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही टीकाकरण शुरू कराया जाएगा। - डॉ. आरबी सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, सीएमओ कार्यालय
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