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‘इमरजेंसी की सौ अनसुनी कहानियां’ पुस्तक का विमोचन
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पीलीभीत। आपातकाल के दौरान जिले में हुई घटनाओं पर आधारित पुस्तक ‘इमरजेंसी की सौ अनसुनी कहानियां’ का विमोचन मंगलवार को होटल ग्रांड शारदा में किया गया। पुस्तक के लेखक विश्वमित्र टंडन हैं। कार्य के मुख्य अतिथि मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान उनका कार्य क्षेत्र पीलीभीत रहा। वह यहां की घटनाओं से वाकिफ हैं।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि आपातकाल के दौरान वह पीलीभीत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक थे। संघ का प्रचारक होने की वजह से उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह 16 माह तक जेल में रहे थे। लेकिन लोगों का संघर्ष काम आया और आपातकाल का अंत हुआ। उन्होंने नाम लिए बगैर कई राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। कहा कि परिवारवाद का खत्म होना बहुत जरूरी है। काबिलियत के दम पर जो लोग आगे आते हैं, उनका स्वागत करना चाहिए। परिवार विशेष का होने के नाते किसी को जिम्मेदारी देना गलत है। इसी सोच से तानाशाही का जन्म होता है।
पुस्तक के लेखक लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन के कार्यक्रम प्रमुख विश्वमित्र टंडन ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इमरजेंसी के दौर में जो हुआ, वो आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे। इसी को देखते हुए पुस्तक का लेखन किया गया है। पिछले दो साल से इस पर काम चल रहा था। उन्होंने कहा कि अगर कोई कमी रह गई है, तो सुझाव दें, उसे अगले वर्ष दूसरे संस्करण में दूर किया जाएगा। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस पुस्तक में दो पहलू हैं। एक आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों पर हुई ज्यादतियां और दूसरा आरएसएस द्वारा चलाई गई भूमिगत गतिविधियों का ब्योरा।
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पुस्तक का विमोचन संयुक्त रूप से सांसद राजेंद्र कुमार अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक शम्सा, महामंत्री अश्वनी अग्रवाल ने किया।
इस मौके पर सेवानिवृत्त क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह, दामोदर दास गुप्ता, अरविंद सिंह, राजीव कुमार, सरयू प्रसाद रस्तोगी, सर्वजीत सिंह, अजय शम्सा आदि मौजूद रहे।
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सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि आपातकाल के दौरान वह पीलीभीत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक थे। संघ का प्रचारक होने की वजह से उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह 16 माह तक जेल में रहे थे। लेकिन लोगों का संघर्ष काम आया और आपातकाल का अंत हुआ। उन्होंने नाम लिए बगैर कई राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। कहा कि परिवारवाद का खत्म होना बहुत जरूरी है। काबिलियत के दम पर जो लोग आगे आते हैं, उनका स्वागत करना चाहिए। परिवार विशेष का होने के नाते किसी को जिम्मेदारी देना गलत है। इसी सोच से तानाशाही का जन्म होता है।
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पुस्तक के लेखक लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन के कार्यक्रम प्रमुख विश्वमित्र टंडन ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इमरजेंसी के दौर में जो हुआ, वो आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे। इसी को देखते हुए पुस्तक का लेखन किया गया है। पिछले दो साल से इस पर काम चल रहा था। उन्होंने कहा कि अगर कोई कमी रह गई है, तो सुझाव दें, उसे अगले वर्ष दूसरे संस्करण में दूर किया जाएगा। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस पुस्तक में दो पहलू हैं। एक आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों पर हुई ज्यादतियां और दूसरा आरएसएस द्वारा चलाई गई भूमिगत गतिविधियों का ब्योरा।
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पुस्तक का विमोचन संयुक्त रूप से सांसद राजेंद्र कुमार अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक शम्सा, महामंत्री अश्वनी अग्रवाल ने किया।
इस मौके पर सेवानिवृत्त क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह, दामोदर दास गुप्ता, अरविंद सिंह, राजीव कुमार, सरयू प्रसाद रस्तोगी, सर्वजीत सिंह, अजय शम्सा आदि मौजूद रहे।