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पत्थर के साथ मिलाई जा रही है देवहा नदी की रेत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sat, 25 Jun 2016 11:03 PM IST
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कलीनगर-रिछोला-पीलीभीत मार्ग का निर्माण तो 44 करोड़ की लागत से शुरू हो गया, लेकिन शुरूआती दौर में ही इस पर ऊंगलियां उठने लगी हैं। बताते हैं कि मार्ग पर बिछाए जा रहे पत्थरों के साथ देवहा नदी की रेत बड़े पैमाने पर मिलाई जा रही है। ऐसे में लोग इस मार्ग को पूर्व की भांति उखड़ने की आशंका जता रहे हैं।
जिला मुख्यालय तक सीधे आवागमन के लिए बने इस मुख्य मार्ग को करीब चार वर्ष पूर्व आरईएस ने बनाया था। उस दौरान लोगों ने मार्ग निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए घटिया निर्माण कार्य को लेकर प्रदर्शन भी किए थे, लेकिन असरदार ठेकेदारों के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई और मार्ग एक वर्ष में ही उखड़ गया था। बाद में तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी के निर्देश पर एक ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। पिछले चार वर्षों से दर्जनों गांवों के लोग इसी जर्जर मार्ग से जिला मुख्यालय आ जा रहे हैं। उधर, अब 44 करोड़ रुपये की लागत से इस मार्ग का निर्माण शुरू किया गया है। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को सौंपी गई।
उधर, जब ठेकेदार ने कार्य शुरू कराया तो इस कार्य में भी गड़बड़ियां सामने आने लगीं। बताते हैं कि मार्ग को चौड़ा करने के साथ जो पत्थर बिछाया जा रहा है, उसमें देवहा नदी की रेत मिलाकर डाली जा रही है। ठेकेदार के प्लांट पर सुबह पांच बजे से ही नदी की रेत से भरी ट्रालियां आने लगती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि जब पूर्व में मार्ग बनाया गया था तो उस दौरान बारिश हो गई थी और इस बार ठेकेदार पत्थर जो बिछा रहा है उस पर यदि अभी पेंटिंग करा दी गई तो इस बार भी इस मार्ग की दुर्दशा पहले की तरह हो जाएगी।
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जिला मुख्यालय तक सीधे आवागमन के लिए बने इस मुख्य मार्ग को करीब चार वर्ष पूर्व आरईएस ने बनाया था। उस दौरान लोगों ने मार्ग निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए घटिया निर्माण कार्य को लेकर प्रदर्शन भी किए थे, लेकिन असरदार ठेकेदारों के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई और मार्ग एक वर्ष में ही उखड़ गया था। बाद में तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी के निर्देश पर एक ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। पिछले चार वर्षों से दर्जनों गांवों के लोग इसी जर्जर मार्ग से जिला मुख्यालय आ जा रहे हैं। उधर, अब 44 करोड़ रुपये की लागत से इस मार्ग का निर्माण शुरू किया गया है। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को सौंपी गई।
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उधर, जब ठेकेदार ने कार्य शुरू कराया तो इस कार्य में भी गड़बड़ियां सामने आने लगीं। बताते हैं कि मार्ग को चौड़ा करने के साथ जो पत्थर बिछाया जा रहा है, उसमें देवहा नदी की रेत मिलाकर डाली जा रही है। ठेकेदार के प्लांट पर सुबह पांच बजे से ही नदी की रेत से भरी ट्रालियां आने लगती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि जब पूर्व में मार्ग बनाया गया था तो उस दौरान बारिश हो गई थी और इस बार ठेकेदार पत्थर जो बिछा रहा है उस पर यदि अभी पेंटिंग करा दी गई तो इस बार भी इस मार्ग की दुर्दशा पहले की तरह हो जाएगी।
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