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एंबुलेंस सेवा में भी हो रहा खेल
ब्यूरो/पीलीभीत।
Updated Tue, 15 Mar 2016 11:46 PM IST
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37 एंबुलेंस दौड़ रही हैं जिले में
जिले में गरीबों को उनके दरवाजे तक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 108 और 102 एंबुलेंस सेवा की सुविधा दी जा रही है, लेकिन इसके जिम्मेदारों पर ही इस सेवा में खेल करने के आरोप लग रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के जरिए जिले में दो साल पहले 108 और 102 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। वर्तमान में यहां 15 एंबुलेंस 108 और 22 एंबुलेंस 102 सेवा से जुड़ी चल रही हैं। 108 एंबुलेंस के माध्यम से ट्रामा केसेज के मरीजों को अस्पताल लाया जाता है लेकिन इस एंबुलेंस का जिम्मा मरीजों को सिर्फ अस्पताल तक पहुंचाने का ही है। वहीं 102 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को प्रसव और जांच आदि के लिए अस्पताल लाने-ले जाने के लिए संचालित की जा रही है।
गर्भवती महिलाओं को लानेे में हो रहा खेल
एंबुलेंस सेवा की निगरानी सेहत महकमे के जिलास्तरीय अफसरों को सौंपी गई है, इसके बावजूद इसमें घपलेबाजी हो रही है। आरोप हैं कि एक से अधिक गर्भवती महिलाओं को एक ही एंबुलेंस से जिला अस्पताल तक लाया जाता है और अभिलेखों में उन्हें अलग-अलग लाना दर्शाया जा रहा है। बताते हैं कि एंबुलेंस का एक फेरा लगाने पर 720 रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लाना दिखाकर रकम हड़पी जा रही है। एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा ने बताया कि इसकी जानकारी महकमे के उच्चाधिकारियों को दी थी, लेकिन इस मामले में अभी क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी नहीं है।
ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। एंबुलेंस सेवा की रेंडम चेकिंग की जिम्मेदारी एनएचएम के डीपीएम को दी गई थी। यदि ऐसा कोई मामला है तो उसे दिखवाया जाएगा।
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-डॉॅ. ओपी सिंह, सीएमओ
फैक्ट फाइल-
- 200 किमी औसतन रोजाना दौड़ती है एक एंबुलेंस
- एक चालक, एक ईएमटी होता है एंबुलेंस में
- एक एंबुलेंस पर औसतन 55 से 60 हजार रुपये प्रति माह खर्च।
जिले में गरीबों को उनके दरवाजे तक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 108 और 102 एंबुलेंस सेवा की सुविधा दी जा रही है, लेकिन इसके जिम्मेदारों पर ही इस सेवा में खेल करने के आरोप लग रहे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के जरिए जिले में दो साल पहले 108 और 102 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। वर्तमान में यहां 15 एंबुलेंस 108 और 22 एंबुलेंस 102 सेवा से जुड़ी चल रही हैं। 108 एंबुलेंस के माध्यम से ट्रामा केसेज के मरीजों को अस्पताल लाया जाता है लेकिन इस एंबुलेंस का जिम्मा मरीजों को सिर्फ अस्पताल तक पहुंचाने का ही है। वहीं 102 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को प्रसव और जांच आदि के लिए अस्पताल लाने-ले जाने के लिए संचालित की जा रही है।
गर्भवती महिलाओं को लानेे में हो रहा खेल
एंबुलेंस सेवा की निगरानी सेहत महकमे के जिलास्तरीय अफसरों को सौंपी गई है, इसके बावजूद इसमें घपलेबाजी हो रही है। आरोप हैं कि एक से अधिक गर्भवती महिलाओं को एक ही एंबुलेंस से जिला अस्पताल तक लाया जाता है और अभिलेखों में उन्हें अलग-अलग लाना दर्शाया जा रहा है। बताते हैं कि एंबुलेंस का एक फेरा लगाने पर 720 रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लाना दिखाकर रकम हड़पी जा रही है। एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा ने बताया कि इसकी जानकारी महकमे के उच्चाधिकारियों को दी थी, लेकिन इस मामले में अभी क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी नहीं है।
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ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। एंबुलेंस सेवा की रेंडम चेकिंग की जिम्मेदारी एनएचएम के डीपीएम को दी गई थी। यदि ऐसा कोई मामला है तो उसे दिखवाया जाएगा।
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-डॉॅ. ओपी सिंह, सीएमओ
फैक्ट फाइल-
- 200 किमी औसतन रोजाना दौड़ती है एक एंबुलेंस
- एक चालक, एक ईएमटी होता है एंबुलेंस में
- एक एंबुलेंस पर औसतन 55 से 60 हजार रुपये प्रति माह खर्च।