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गुरु भक्त और भगवान के बीच दीवार नहीं, द्वार है : पंडित बृजेश पाठक
Sat, 10 Oct 2026 12:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। साहूकारा स्थित श्री राधा रमण मंदिर में श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित बृजेश पाठक ने कहा कि गुरु भक्त और भगवान के बीच दीवार नहीं, बल्कि द्वार होता है। गुरु का कार्य शिष्य को भगवान तक पहुंचाने का मार्ग दिखाना है। यदि कोई गुरु भक्त की निष्ठा भगवान से हटाकर स्वयं में लगाने का प्रयास करे तो ऐसे गुरु का त्याग कर देना चाहिए। उन्होंने राजा बलि और उनके गुरु शुक्राचार्य का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब शुक्राचार्य ने राजा बलि को भगवान वामन के समक्ष समर्पण करने से रोकने का प्रयास किया तो राजा बलि ने गुरु के प्रति सम्मान के साथ भगवान के प्रति अपनी निष्ठा को प्राथमिकता दी।
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पीलीभीत। साहूकारा स्थित श्री राधा रमण मंदिर में श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित बृजेश पाठक ने कहा कि गुरु भक्त और भगवान के बीच दीवार नहीं, बल्कि द्वार होता है। गुरु का कार्य शिष्य को भगवान तक पहुंचाने का मार्ग दिखाना है। यदि कोई गुरु भक्त की निष्ठा भगवान से हटाकर स्वयं में लगाने का प्रयास करे तो ऐसे गुरु का त्याग कर देना चाहिए। उन्होंने राजा बलि और उनके गुरु शुक्राचार्य का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब शुक्राचार्य ने राजा बलि को भगवान वामन के समक्ष समर्पण करने से रोकने का प्रयास किया तो राजा बलि ने गुरु के प्रति सम्मान के साथ भगवान के प्रति अपनी निष्ठा को प्राथमिकता दी।