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खस्ताहाल सरकारी और गैर सरकारी भवन गिरने की स्थिति में

Tue, 12 Aug 2014 05:30 AM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Tue, 12 Aug 2014 05:30 AM IST
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पीलीभीत। शहर में तमाम सरकारी और गैर सरकारी भवन दिख जाएंगे, मगर नगर पालिका को इसकी जानकारी नहीं है। बारिश के मौसम में गिरने की स्थिति में पहुंची ये इमारतें कभी भी लोगों की जान की दुश्मन बन सकती हैं, लेकिन नगर पालिका के अफसरों को इसकी परवाह नहीं है। न तो इन भवनों को चिहिन्त कर गिरवाया जा रहा है और न ही इनकी मरम्मत कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।
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जिला परिषद भवन में दरारें ही दरारें
होमगार्ड्स का कार्यालय टनकपुर रोड पर जिला परिषद के पुराने भवन में चल रहा है। भवन में जगह-जगह दरारें पड़ी हैं। जिससे बरसात में कमरों के अंदर भी पानी आता है। कई बार रिकॉर्ड भीग चुके हैं। यहां के अधिकारी-कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
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कंडम भवन में खोल दिया श्रम विभाग का ऑफिस
वर्ष 1865 में बना पुराना तहसील भवन खस्ताहाल हो चुका है। इसे पिछले साल कंडम भी घोषित कर दिया गया। इस पर तहसील कार्यालय को आयुर्वेदिक कॉलेज के पास नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन जिस भवन के कंडम होने से तहसील कार्यालय शिफ्ट किया गया, उसी भवन में चकबंदी और श्रम विभाग का कार्यालय खोलकर अफसरों-कर्मचारियों की जान-जोखिम में डाल दिया गया। यहां करीब 45 कर्मचारी कार्यरत हैं, इसके अलावा तमाम लोग इन ऑफिसों से जुड़े कार्य के सिलसिले में यहां आते हैं।
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अक्सर गिरता है बरेली गेट का से मलबा
पीलीभीत की पहचान कहे जने वाले बरेली एवं अन्य गेट रखरखाव के अभाव में बदहाल हैं। इसमें सबसे ज्यादा बुरा हाल बरेली गेट का है। पुराना और जर्जर होने के कारण गेट का मलबा अक्सर टूटकर सड़क पर गिरता है, लेकिन न तो इसे गिराया जा रहा है और न ही मरम्मत कराई जा रही है।

99 वर्ष पुराना है ड्रमंड कॉलेज
शहर में गौहनिया चौराहे के पास ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज का भवन अत्यधिक जर्जर हो चुका है। इस भवन का निर्माण तत्कालीन डीएम आर ड्रमंड ने 1915 में कराया था। 38.6 एकड़ भूमि पर बने इस भवन के तमाम कक्ष खस्ताहाल हो चुके हैं। बारिश के मौसम में यह कॉलेज जल निकासी न होने के कारण तालाब की शक्ल ले लेता है, इससे भवन की बुनियादें भी कमजोर हो चुकी हैं।

इन मोहल्लों मेें भी हैं खस्ताहाल भवन
शहर के मोहल्ला मदीना शाह, खैरुल्लाशाह, बुजकसाबान, मोहम्मद वासिल, शेर मोहम्मद, कबीर खां, अशरफ खां, मदीना शाह, फीलखाना, बेनी चौधरी, डालचंद्र और खुदागंज मोहल्लों में तमाम लोगों के निजी मकान बेहद खस्ता हालत में हैं।


पालिका एक्ट में शहर के जर्जर भवनों को चिन्हित करने या उन्हें गिराने की कोई जानकारी मेरे संज्ञान नहीं है। यदि कोई कार्यालय या संस्था किसी जर्जर भवन में चल रही है और इसमें हादसा होता है तो उसका उत्तर दायित्व संबंधित विभागाध्यक्ष का होता है।
रामप्रकाश, एसडीएम/प्रभारी ईओ
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