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क्रोध और अंहकार मनुष्य के पतन का कारण
Updated Sun, 17 Dec 2017 11:38 PM IST
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क्रोध और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण
खेकड़ा। आचार्य श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा क्रोध और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है, इसलिए मनुष्य को सदैव क्रोध अहंकार से दूर रहना चाहिए।
रविवार को क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित जय शांति सागर निकेतन जैन मंदिर में आचार्य श्री एक सौ आठ वसुनंदी जी महाराज संसघ सानिध्य में ऐलक श्री एक सौ पांच विज्ञान सागर जी महाराज का चौबीसवां दीक्षा दिवस महोत्सव आस्था पूर्वक परंपरागत ढंग से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया। इसके साथ ही अरुण जैन, मोनिका जैन ने कार्यक्रम स्थल पर ध्वजा रोहण किया । चित्र केअनावरण योगेश जैन, मन्नू जैन एवं सचिन जैन ने किया। साथ ही गुरू आगमन, मंच लोकार्पण, चित्र अनावरण, अतिथि सम्मान, श्रेष्ठी बहुमान, पिच्छिका परिवर्तन, गुरू भक्ति, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच भक्त जयजयकार कर झूम उठे। इसके बाद एक सौ आठ दीपों से आचार्य श्री की आरती आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया । भक्तों ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। आचार्य श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। उन्होंने कहा मनुष्य को दीन दुखी असहाय की सेवा कर अपने जीवन को सुखदायी बनाना चाहिए। दीन दुखी की सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा धर्म मार्ग पर ही हमेशा चलना चाहिए। तभी मानव कल्याण संभव है।
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खेकड़ा। आचार्य श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा क्रोध और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है, इसलिए मनुष्य को सदैव क्रोध अहंकार से दूर रहना चाहिए।
रविवार को क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित जय शांति सागर निकेतन जैन मंदिर में आचार्य श्री एक सौ आठ वसुनंदी जी महाराज संसघ सानिध्य में ऐलक श्री एक सौ पांच विज्ञान सागर जी महाराज का चौबीसवां दीक्षा दिवस महोत्सव आस्था पूर्वक परंपरागत ढंग से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया। इसके साथ ही अरुण जैन, मोनिका जैन ने कार्यक्रम स्थल पर ध्वजा रोहण किया । चित्र केअनावरण योगेश जैन, मन्नू जैन एवं सचिन जैन ने किया। साथ ही गुरू आगमन, मंच लोकार्पण, चित्र अनावरण, अतिथि सम्मान, श्रेष्ठी बहुमान, पिच्छिका परिवर्तन, गुरू भक्ति, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच भक्त जयजयकार कर झूम उठे। इसके बाद एक सौ आठ दीपों से आचार्य श्री की आरती आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया । भक्तों ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। आचार्य श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। उन्होंने कहा मनुष्य को दीन दुखी असहाय की सेवा कर अपने जीवन को सुखदायी बनाना चाहिए। दीन दुखी की सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा धर्म मार्ग पर ही हमेशा चलना चाहिए। तभी मानव कल्याण संभव है।