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रोडवेज बसों में मुफ्त सफर के लिए खुद को दिव्यांग बना रहे स्वास्थ्य कर्मी

Fri, 22 Feb 2019 07:26 PM IST
Prashant Singh Prashant Singh
Updated Fri, 22 Feb 2019 07:26 PM IST
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रोडवेज बसों में मुफ्त सफर के लिए खुद को दिव्यांग बना रहे स्वास्थ्य कर्मी
पीलीभीत। आयुष्मान भारत योजना में अमीरों की गिनती गरीबों में कर उन्हें आयुष्मान कार्ड जारी करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत का एक ओर नया मामला सामने आया है। डॉक्टरों और कुछ कर्मचारियों ने खुद को अभिलेखों में दिव्यांग दिखाकर सरकारी सुविधाओं का लाभ पाने के लिए यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) बनवा ली है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा के लिए किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी इस गोरखधंधे से वाकिफ हैं, लेकिन कार्रवाई के सवाल पर खामोश हैं।
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सरकारी योजना कोई भी हो लेकिन भ्रष्ट अफसर और कर्मचारी कमाई का जरिया ढूंढ ही लेते हैं। मामला दिव्यांगों से जुड़ा है। केंद्र और प्रदेश सरकार दिव्यांगों के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं। इनका लाभ पाने के लिए सबसे आवश्यक दस्तावेज दिव्यांग प्रमाण पत्र होता है, इसे बनवाना जहां दिव्यांगों के लिए चुनौती बना हुआ है वहीं सरकारी डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी खुद को दिव्यांग दिखाकर आसानी से प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं। दरअसल, ये वे डॉक्टर और कर्मचारी हैं जो रोजाना बाहर से यहां आकर ड्यूटी करते हैं। दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे वे रोडवेज बसों और ट्रेनों में मुफ्त यात्रा का लाभ ले रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में इससे जुड़ी शिकायतें भी पहुंच रही हैं, लेकिन मामला विभाग से जुड़ा होने के चलते अफसर जांच करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
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खुद के साथ परिचितों का भी बनवा रहे दिव्यांग प्रमाणपत्र
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और डॉक्टर खुद को तो अभिलेखों में दिव्यांग दिखाकर रोडवेज बसों और ट्रेनों में मुफ्त यात्रा कर ही रहे हैं, अपने परिचितों को इसका लाभ दिलाने के लिए उनकी यूडीआईडी बनवा रहे है। इस खेल में कर्मचारी ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की भी मिलीभगत होने की बात सामने आई है। सूत्रों की मानें तो सीएमओ कार्यालय में तैनात दो कर्मचारियों के अलावा पूरनपुर में तैनात एक डॉक्टर और कई अन्य लोगों के दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। यह सभी रोजना घर से आने-जाने के दौरान रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ ले रहे हैं।
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इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। कोई लिखित शिकायत भी नहीं मिली है। दिव्यांगता के दस्तावेजों की जांच उपरांत ही यूडीआईडी जारी की जाती है। गड़बड़ी की शिकायत पर मामले की जांच कराने के साथ ही दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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