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लखनऊ में विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान से नवाजे गए डॉ. प्रणव
Updated Sun, 28 Jan 2018 06:57 PM IST
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लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. प्रणव शास्त्री को सम्मानित करते मुख्यमंत्री।
- फोटो : अमर उजाला
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पीलीभीत। उपाधि महाविद्यालय के हिंदी प्रवक्ता व साहित्यकार डॉ. प्रणव शास्त्री को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों प्राप्त हुआ। इससे पूर्व उन्हें वर्ष 2016 में संस्कृत सेवा के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा विशिष्ठ सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
लखनऊ स्थित हिंदी संस्थान में 22 जनवरी को हुए सम्मान समारोह में हिंदी भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य के लिए डॉ. प्रणव शास्त्री को विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें पचास हजार रुपये, श्रीफल, स्मृति चिंह व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। मालूम हो कि अध्ययन व अध्यापन को अपने जीवन का अभिष्ट अंग मानने वाले डॉ. प्रणव अब तक देश विदेश के 50 से अधिक सम्मान/पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। जिसमें साहित्य श्री, मैन ऑफ द ईयर, विद्या वारिधि, विश्व हिंदी सेवी सम्मान, तुलसी सम्मान, निराला सम्मान, भाषा रत्न सम्मान, भारती रत्न, यंग एचीवर्स आदि प्रमुख हैं। अब तक 15 विषयों में एमए के साथ-साथ हिंदी में पीएचडी व डी. लिट कर चुके बीस पुस्तकों के रचनाकार डॉ. प्रणव के करीब 400 शोध पत्र भी देश विदेश स्तरीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा वह थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका आदि देशों में हुए करीब 400 राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में शोधपत्र पढ़ चुके हैं। जोहांसबर्ग में हुए नवम विश्व हिंदी सम्मेलन व भोपाल में हुए दशम विश्व हिंदी सम्मेलन व बैंकाक में हुए 16वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में उनके शोधपत्र खासी चर्चा में रहे। डॉ. प्रणव की उपलब्धियों को देखते हुए 15 शोध पत्रिकाओं ने उन्हें संपादक मंडल का सदस्य, परामर्शक व विषय विशेषज्ञ बना रखा है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके शुभचिंतकों व समाजसेवियों ने उन्हें बधाई दी।
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लखनऊ स्थित हिंदी संस्थान में 22 जनवरी को हुए सम्मान समारोह में हिंदी भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य के लिए डॉ. प्रणव शास्त्री को विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें पचास हजार रुपये, श्रीफल, स्मृति चिंह व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। मालूम हो कि अध्ययन व अध्यापन को अपने जीवन का अभिष्ट अंग मानने वाले डॉ. प्रणव अब तक देश विदेश के 50 से अधिक सम्मान/पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। जिसमें साहित्य श्री, मैन ऑफ द ईयर, विद्या वारिधि, विश्व हिंदी सेवी सम्मान, तुलसी सम्मान, निराला सम्मान, भाषा रत्न सम्मान, भारती रत्न, यंग एचीवर्स आदि प्रमुख हैं। अब तक 15 विषयों में एमए के साथ-साथ हिंदी में पीएचडी व डी. लिट कर चुके बीस पुस्तकों के रचनाकार डॉ. प्रणव के करीब 400 शोध पत्र भी देश विदेश स्तरीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा वह थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका आदि देशों में हुए करीब 400 राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में शोधपत्र पढ़ चुके हैं। जोहांसबर्ग में हुए नवम विश्व हिंदी सम्मेलन व भोपाल में हुए दशम विश्व हिंदी सम्मेलन व बैंकाक में हुए 16वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में उनके शोधपत्र खासी चर्चा में रहे। डॉ. प्रणव की उपलब्धियों को देखते हुए 15 शोध पत्रिकाओं ने उन्हें संपादक मंडल का सदस्य, परामर्शक व विषय विशेषज्ञ बना रखा है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके शुभचिंतकों व समाजसेवियों ने उन्हें बधाई दी।
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