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ऋण माफी के नाम पर ठगे गए गरीब किसान
Updated Mon, 25 Dec 2017 09:50 PM IST
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किसान
- फोटो : ANI
92 हजार में मात्र 35 हजार किसानों को ही मिला लाभ
ऋण मॉफी की उम्मीद में 57 हजार किसानों ने गुजार दिया साल
पीलीभीत। सरकार ने किसानों का ऋण माफ करने को ऋण मोचन योजना शुरू की। ढोल पीटा गया कि जिले के 92 हजार किसानों का एक लाख तक का ऋण प्रदेश सरकार माफ करेगी, लेकिन इस योजना में इतने लेकुना लगा दिए गए कि इसका लाभ कुल 35 हजार किसानों को ही मिल सका। शेष किसानों का लगभग पूरा साल उम्मीदों में ही गुजरता दिखाई दे रहा है। ऋण माफ होने की उम्मीद में बैंक लोन पर ब्याज और बढ़ गया। जिससे दोहरी मार झेलनी पड़ी। ऋण माफी को लेकर अब तक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
गरीबी की मार झेल रहे किसानों को राहत देने का आश्वासन देकर भाजपा ने प्रदेश में सरकार तो बना लेकिन किसानों को राहत देने का जो वादा किया वह उस पर पूरी तरह खरी नहीं उतरी। ऋण माफी के लिए ऋण मोचन योजना लागू की लेकिन इसके नियम इतने जटिल बनाए कि ज्यादातर किसान इसके क्षेत्र से बाहर हो गए। जिले में इस योजना के तहत बैंकों के माध्यम से 92 हजार किसानों का डाटा ऑनलाइन किया गया था। इनकी विभिन्न स्तर पर हुई जांच और कंप्यूटर पर लगे फिल्टर के बाद तीन चरणों में मात्र 35628 किसानों को ही इसका लाभ मिला। लाभ पाने वालों नाममात्र के ही ऐसे किसान हैं जिन्हें 75 हजार से एक लाख रुपये तक का लाभ मिला। इस ऋण माफी का सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों का हुआ जिन्होंने ऋण माफी की उम्मीद में उसे जमा नहीं किया जिससे उनके द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज की धनराशि और बढ़ गई। इस तरह उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ा।
नुकसान में रहे समितियों के सदस्य किसान
ऋण मोचन योजना में सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों का हुआ जो सहकारी समितियों के सदस्य थे साथ ही बैंकों से ऋण भी लिया था। ऐसे किसानों का डाटा कंप्यूटर में फीड तो किया गया, लेकिन दो जगह से ऋण बताकर कंप्यूटर ने उन्हें फिल्टर कर अयोग्य घोषित कर दिया।
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अब तक दर्ज हो चुकी 13 हजार शिकायतें
ऋण मोचन योजना में पात्रों का चयन होने के बाद से ही शिकायतों का सिलसिला चल रहा है। कृषि विभाग को अब तक 13 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। इसमें अधिकांश ऐसी हैं जिसकी जांच में किसानों द्वारा दो जगह से ऋण लेना बताया जा रहा है, लेकिन ऋण कहीं का भी माफ नहीं हुआ।
समय से ऋण अदा करने वाले हुए वंचित
ऋण मोचन योजना में उन किसानों को वंचित होना पड़ा जो ऋण लेने के बाद समय से उसकी अदायगी करते रहे। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लेने वाले ज्यादातर किसान गेहूं कटने पर अप्रैल मई में धनराशि जमा कर पुन: ऋण निकाल लेेते हैं। ऐसे में 31 मार्च 2016 के बाद धनराशि जमा कर पुन: ऋण लेने वाले इससे वंचित हो गए।
फैक्ट फाइल
ऋण मोचन में लाभान्वित किसान और धनराशि
चरण किसान धनराशि (करोड़ में)
प्रथम चरण 11018 72.86
द्वितीय चरण 13748 92.51
तृतीया चरण 10862 58.34
कुल 35628 223.71
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ऋण मॉफी की उम्मीद में 57 हजार किसानों ने गुजार दिया साल
पीलीभीत। सरकार ने किसानों का ऋण माफ करने को ऋण मोचन योजना शुरू की। ढोल पीटा गया कि जिले के 92 हजार किसानों का एक लाख तक का ऋण प्रदेश सरकार माफ करेगी, लेकिन इस योजना में इतने लेकुना लगा दिए गए कि इसका लाभ कुल 35 हजार किसानों को ही मिल सका। शेष किसानों का लगभग पूरा साल उम्मीदों में ही गुजरता दिखाई दे रहा है। ऋण माफ होने की उम्मीद में बैंक लोन पर ब्याज और बढ़ गया। जिससे दोहरी मार झेलनी पड़ी। ऋण माफी को लेकर अब तक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
गरीबी की मार झेल रहे किसानों को राहत देने का आश्वासन देकर भाजपा ने प्रदेश में सरकार तो बना लेकिन किसानों को राहत देने का जो वादा किया वह उस पर पूरी तरह खरी नहीं उतरी। ऋण माफी के लिए ऋण मोचन योजना लागू की लेकिन इसके नियम इतने जटिल बनाए कि ज्यादातर किसान इसके क्षेत्र से बाहर हो गए। जिले में इस योजना के तहत बैंकों के माध्यम से 92 हजार किसानों का डाटा ऑनलाइन किया गया था। इनकी विभिन्न स्तर पर हुई जांच और कंप्यूटर पर लगे फिल्टर के बाद तीन चरणों में मात्र 35628 किसानों को ही इसका लाभ मिला। लाभ पाने वालों नाममात्र के ही ऐसे किसान हैं जिन्हें 75 हजार से एक लाख रुपये तक का लाभ मिला। इस ऋण माफी का सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों का हुआ जिन्होंने ऋण माफी की उम्मीद में उसे जमा नहीं किया जिससे उनके द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज की धनराशि और बढ़ गई। इस तरह उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ा।
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नुकसान में रहे समितियों के सदस्य किसान
ऋण मोचन योजना में सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों का हुआ जो सहकारी समितियों के सदस्य थे साथ ही बैंकों से ऋण भी लिया था। ऐसे किसानों का डाटा कंप्यूटर में फीड तो किया गया, लेकिन दो जगह से ऋण बताकर कंप्यूटर ने उन्हें फिल्टर कर अयोग्य घोषित कर दिया।
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अब तक दर्ज हो चुकी 13 हजार शिकायतें
ऋण मोचन योजना में पात्रों का चयन होने के बाद से ही शिकायतों का सिलसिला चल रहा है। कृषि विभाग को अब तक 13 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। इसमें अधिकांश ऐसी हैं जिसकी जांच में किसानों द्वारा दो जगह से ऋण लेना बताया जा रहा है, लेकिन ऋण कहीं का भी माफ नहीं हुआ।
समय से ऋण अदा करने वाले हुए वंचित
ऋण मोचन योजना में उन किसानों को वंचित होना पड़ा जो ऋण लेने के बाद समय से उसकी अदायगी करते रहे। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लेने वाले ज्यादातर किसान गेहूं कटने पर अप्रैल मई में धनराशि जमा कर पुन: ऋण निकाल लेेते हैं। ऐसे में 31 मार्च 2016 के बाद धनराशि जमा कर पुन: ऋण लेने वाले इससे वंचित हो गए।
फैक्ट फाइल
ऋण मोचन में लाभान्वित किसान और धनराशि
चरण किसान धनराशि (करोड़ में)
प्रथम चरण 11018 72.86
द्वितीय चरण 13748 92.51
तृतीया चरण 10862 58.34
कुल 35628 223.71