फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   कॉरिडोर तो इंसानों ने कब्जा लिया, लौटते भी तो कैसे नेपाली हाथी

कॉरिडोर तो इंसानों ने कब्जा लिया, लौटते भी तो कैसे नेपाली हाथी

Thu, 11 Jul 2019 02:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2019 02:43 AM IST
विज्ञापन
कॉरिडोर तो इंसानों ने कब्जा लिया, लौटते भी तो कैसे नेपाली हाथी
पीलीभीत। एक समय में नेपाली हाथी जिले के जंगल में आने के बाद कुछ दिन विचरण करके लौट जाते थे। वन विभाग के अफसर भी हाथियों की इस आवाजाही से गदगद रहते थे, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने ऐसा जाल बिछाया कि अब इनका आना आफत बन गया है। हाथियों के वासस्थल और आने-जाने के रास्ते (कॉरीडोर) पर कब्जे हो गए हैं। यही वजह रही कि इस बार नेपाल से आए दोनों हाथी भटक कर अमरिया, बहेड़ी, बरेली, रामपुर और रुद्रपुर उत्तराखंड तक जा पहुंचे। एक वनरक्षक समेत चार लोगों की जान ले ली। अब भी उन पर काबू कर पाना मुमकिन नहीं लग रहा। विभाग के इसके पीछे अपने तर्क हैं, लेकिन सच यही है कि अगर वासस्थल पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर संजीदगी बरती गई होती तो शायद आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। इतना सब हो जाने के बाद भी वन विभाग के अफसर बेसुध हैं। कागजों और बयानों में सारे इंतजाम किए जा रहे हैं। धरातल पर लोगों की आफत बरकरार है।
विज्ञापन

शारदा नदी के पार नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से सटा पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल क्षेत्र कभी नेपाली हाथियों का वासस्थल था। खुली सीमा होने के चलते हाथी जनपद सीमा में आकर, कई दिन रुकने के बाद वापस चले जाते थे। रमनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर एवं भूरा गोरख डिब्बी का क्षेत्र हाथियों का कॉरिडोर माना जाता था। जहां अक्सर हाथियों की मौजूदगी बनी रहती थी, लेकिन वर्षों पूर्व इलाके की वन भूमि पर अतिक्रमण शुरू हो गया। जिम्मेदारों की साठगांठ के चलते अतिक्रमण नासूर बन गया। अवैध कब्जेदारों ने हरे-भरे शीशम, खैर के जंगलों को नष्ट कर खेती करनी शुरू कर दी। हालांकि शुरुआती दौर में वन विभाग ने वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने की कोशिश भी की, कुछ अतिक्रमणकारियों के खिलाफ विभागीय केस भी दर्ज किए, लेकिन अतिक्रमण का दायरा बड़ा होने के चलते कार्रवाई ठंडे वस्ते में चली गई। इसके बाद संयुक्त सीमांकन की आड़ में अतिक्रमण का दायरा बढ़ता गया।
विज्ञापन


एक समय ऐसा भी रहा, सालों नहीं आए हाथी
एक समय ऐसा भी आया था जब इन हाथियों की दस्तक ही थम गई। इसका कारण कोई रुकावट या फिर विभाग की सख्ती नहीं, बल्कि अतिक्रमण ही अहम वजह रही। जब जंगल नष्ट हो गए तो हाथियों के लिए मात्र लग्गा भग्गा क्षेत्र का जंगल ही सुरक्षित बचा। जो सीमा पिलर नंबर 24 से लेकर 27 तक का क्षेत्र था। अतिक्रमण हो जाने के चलते इसके आगे 27 से 29 तक रामनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के इलाके में भी जंगली हाथियों का आवागमन रुका रहा। बीते चार सालों से अब दोबारा उनकी दस्तक शुरू हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाथियों के उत्पात मचाने के लगातार मिलते रहे संकेत
वासस्थल नष्ट होने की वजह से हाथी उत्पाती हो गए, इसके संकेत भी लगातार मिलते रहे। हाथियों खासकर उन्हीं स्थानों को निशाना बनाया, जहां पर पहले उनके वासस्थल हुआ करते थे। वहीं पर हो रही खेती को उजाड़ा जाता रहा। यह बात अफसरों ने भी कई बार स्वीकार की, लेकिन समाधान के ठोस कदम नहीं उठाए।

तीन साल पहले एक हाथी की हुई थी मौत
इधर तीन साल पूर्व करीब एक दर्जन हाथी लग्गा भग्गा क्षेत्र में पहुंचे, उन्होंने फिर धान, गन्ने की फसलों को नष्ट किया। इसके बाद भटककर आगे की ओर आए एक इनमें से एक हाथी की मौत हो गई थी। उसका शव नदी के किनारे बरामद हुआ था। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने मौके पर ही डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया। जिसमें मौत स्वाभाविक मानी गई।



वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को चिह्नित कराया जा चुका है। ये काफी पुराना है। लगातार इसका समाधान कराने को प्रयास भी जारी हैं। आला अधिकारियों को भी पत्राचार कर मदद मांगी गई है। कोर्ट में भी कुछ लोग इस मामले को लेकर चले गए। इससे भी कार्रवाई कुछ थमी रही। इसको संजीदगी से लिया जा रहा है, जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे।
- आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर पीलीभीत टाइगर रिजर्व

मुझे जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed