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Pilibhit News: 1500 विस्थापित परिवार पा सकते हैं जमीन का मालिकाना अधिकार
Thu, 30 Jan 2025 12:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 30 Jan 2025 12:12 AM IST
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पीलीभीत। पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय जिले में पूर्वी पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए विस्थापितों के वारिसों को जमीन पर संक्रमणीय अधिकार मिलने की उम्मीद जगी है। इनका सर्वे और सत्यापन कर रिपोर्ट भेज दी गई है। प्रशासन ने करीब 1500 परिवारों को चिह्नित किया है।
उत्तराखंड के नानक सागर डैम के पास के विस्थापितों को भी जिले में बसाया गया था। 1960 में उत्तराखंड के नानक सागर बांध के विस्थापित आए थे। इसके बाद पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय भी विस्थापितों को जिले में बसाया गया। वर्ष 2019 में इनकी संख्या करीब 30 से 35 हजार थी। पूरनपुर, कलीनगर, सदर, अमरिया तहसील में इन्हें रहने व खेतीबाड़ी के लिए जमीन दी गई।
बताया जा रहा है कि विभाजन के समय उत्तराखंड के रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप से विस्थापितों को जिले में भेजा गया। उस समय करीब 1700 परिवारोंं को जमीन दी गई। यह भूमि गवर्मेंट ग्रांट एक्ट के तहत दी गई थी। अब इन विस्थापितों के वारिसों को जमीन का मालिकाना हक देने की जांच कराई गई है।
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मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय सिंह की अध्यक्षता में गठित टीम में शामिल पीलीभीत प्रशासन ने भी विस्थापितों का सर्वे और सत्यापन कराया। बांग्लादेश या फिर पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले परिवारों की जानकारी जुटाई गई। बताया जा रहा है कि 2100 से अधिक परिवार सामने आए हैं, इनमें करीब 1500 परिवार ऐसे हैं जिन्हें भूमि पर संक्रमणीय अधिकार मिल सकता है।
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कई विस्थापितों की जमीन वन विभाग में हो गई दर्ज
बताया जा रहा है कि रमनगरा के पास बसाए गए कुछ विस्थापितों की जमीन वन विभाग में दर्ज हो गई। गांव चंदिया हजारा में भी कुछ जमीन वन विभाग में शामिल हो गई है। इन स्थानों पर भी जमीन के मालिकाना हक की मांग की जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई है।
नानक सागर बांध के पास से आए थे करीब आठ सौ परिवार
नानक सागर बांध के पास से विस्थापित किए गए करीब 144 परिवार जिले में आए थे। सर्वे में 20 से अधिक परिवारों के वारिस सामने आए हैं। इन्हें कितनी जमीन दी गई थी, कितनी पर कब्जा है इसकी जांच की गई है।
वर्जन
वर्ष 1965 के समय के विस्थापितों को बसाने के साथ ही नानक सागर बांध के विस्थापितों को भी जिले में बसाया गया। इनकी जांच और सर्वे कराया गया है। जिन परिवारों के पास दस्तावेज हैं, उन्हें संक्रमणीय अधिकार मिल सकते हैं।
- संजय कुमार सिंह, डीएम
जांच कराई गई है। पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही स्थानों के विस्थापित परिवार हैं। पीलीभीत और लखीमपुर में खास बात यह है कि जो परिवार हैं, उनके पास दस्तावेज हैं, उनका रिकार्ड है। सर्वे हो चुका है। रिपोर्ट भेजी जा रही है। आगे शासन स्तर से निर्णय लिया जाएगा।
- आंजनेय सिंह, मंडलायुक्त मुरादाबाद
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उत्तराखंड के नानक सागर डैम के पास के विस्थापितों को भी जिले में बसाया गया था। 1960 में उत्तराखंड के नानक सागर बांध के विस्थापित आए थे। इसके बाद पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय भी विस्थापितों को जिले में बसाया गया। वर्ष 2019 में इनकी संख्या करीब 30 से 35 हजार थी। पूरनपुर, कलीनगर, सदर, अमरिया तहसील में इन्हें रहने व खेतीबाड़ी के लिए जमीन दी गई।
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बताया जा रहा है कि विभाजन के समय उत्तराखंड के रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप से विस्थापितों को जिले में भेजा गया। उस समय करीब 1700 परिवारोंं को जमीन दी गई। यह भूमि गवर्मेंट ग्रांट एक्ट के तहत दी गई थी। अब इन विस्थापितों के वारिसों को जमीन का मालिकाना हक देने की जांच कराई गई है।
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मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय सिंह की अध्यक्षता में गठित टीम में शामिल पीलीभीत प्रशासन ने भी विस्थापितों का सर्वे और सत्यापन कराया। बांग्लादेश या फिर पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले परिवारों की जानकारी जुटाई गई। बताया जा रहा है कि 2100 से अधिक परिवार सामने आए हैं, इनमें करीब 1500 परिवार ऐसे हैं जिन्हें भूमि पर संक्रमणीय अधिकार मिल सकता है।
कई विस्थापितों की जमीन वन विभाग में हो गई दर्ज
बताया जा रहा है कि रमनगरा के पास बसाए गए कुछ विस्थापितों की जमीन वन विभाग में दर्ज हो गई। गांव चंदिया हजारा में भी कुछ जमीन वन विभाग में शामिल हो गई है। इन स्थानों पर भी जमीन के मालिकाना हक की मांग की जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई है।
नानक सागर बांध के पास से आए थे करीब आठ सौ परिवार
नानक सागर बांध के पास से विस्थापित किए गए करीब 144 परिवार जिले में आए थे। सर्वे में 20 से अधिक परिवारों के वारिस सामने आए हैं। इन्हें कितनी जमीन दी गई थी, कितनी पर कब्जा है इसकी जांच की गई है।
वर्जन
वर्ष 1965 के समय के विस्थापितों को बसाने के साथ ही नानक सागर बांध के विस्थापितों को भी जिले में बसाया गया। इनकी जांच और सर्वे कराया गया है। जिन परिवारों के पास दस्तावेज हैं, उन्हें संक्रमणीय अधिकार मिल सकते हैं।
- संजय कुमार सिंह, डीएम
जांच कराई गई है। पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही स्थानों के विस्थापित परिवार हैं। पीलीभीत और लखीमपुर में खास बात यह है कि जो परिवार हैं, उनके पास दस्तावेज हैं, उनका रिकार्ड है। सर्वे हो चुका है। रिपोर्ट भेजी जा रही है। आगे शासन स्तर से निर्णय लिया जाएगा।
- आंजनेय सिंह, मंडलायुक्त मुरादाबाद