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Pilibhit News: 116 करोड़ खर्च... आठ वर्ष बाद भी शुरू नहीं हुआ बाइपास
Fri, 12 Sep 2025 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 12 Sep 2025 01:13 AM IST
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बाइपास के टनकपुर हाईवे के पास बने फ्लाईओवर पर बंद रास्ते के बीच से गुजरते बाइक सवार। संवाद
पीलीभीत। असम हाईवे से टनकपुर हाईवे को जोड़ने वाला 11 किमी लंबा बाइपास सरकारी हीलाहवाली के चलते आठ वर्ष बीतने के बाद भी शुरू नहीं हो सका है। कई बार बाइपास शुरू करने की कवायद में अड़चनों के बाद अब फ्लाईओवर का एप्रोच मार्ग बनाने में विभागीय लापरवाही बरती जा रही है। वहीं, फ्लाईओवर की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आठ वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग की ओर से 116 करोड़ की लागत से असम नेशनल हाईवे को टनकपुर हाईवे से जोड़ने के लिए 11 किलोमीटर लंबा बाइपास का निर्माण शुरू किया गया था। कुछ दिन बाद गायगोझ गांव के पास रेलवे क्राॅसिंग होने की वजह से काम अटक गया।लंबे समय तक कार्य रुकने के बाद रेलवे व सेतु निगम के तालमेल से गायगोझ गांव के करीब फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करा दिया गया।
जब फ्लाईओवर बनकर तैयार हो गया तो टनकपुर हाईवे से पहले बाइपास पर रेलवे की दूसरी क्राॅसिंग की वजह से अड़चनें आ गईं। काफी मशक्कत के बाद यहां दूसरा फ्लाईओवर बनाया गया। लगभग दो साल से बन रहे इस फ्लाईओवर का काम भी मार्च में पूरा हो गया है। वहीं, फ्लाईओवर का एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के चलते पांच माह से अटका हुआ है। सेतु निगम ने पीडब्ल्यूडी को संचालन के लिए एनओसी भी जारी की, लेकिन पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार समय काटते रहे। यही वजह रही कि 116 करोड़ के बाइपास संचालन में लगभग आठ साल गुजर गए है।
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एक दर्जन पेड़ भी सालों तक बने रोड़ा
पूरनपुर की ओर से बाइपास की शुरुआत से आगे तक एक दर्जन से अधिक पेड़ लगे थे। इसको कटवाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग से एनओसी ली। लेकिन हीलाहवाली के चलते इसे एक वर्ष तक नहीं काटा गया। इससे संचालन में रोक लगी रही। हाल ही में पीडब्ल्यूडी ने इन पेड़ों को कटवा दिया।
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आठ वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग की ओर से 116 करोड़ की लागत से असम नेशनल हाईवे को टनकपुर हाईवे से जोड़ने के लिए 11 किलोमीटर लंबा बाइपास का निर्माण शुरू किया गया था। कुछ दिन बाद गायगोझ गांव के पास रेलवे क्राॅसिंग होने की वजह से काम अटक गया।लंबे समय तक कार्य रुकने के बाद रेलवे व सेतु निगम के तालमेल से गायगोझ गांव के करीब फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करा दिया गया।
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जब फ्लाईओवर बनकर तैयार हो गया तो टनकपुर हाईवे से पहले बाइपास पर रेलवे की दूसरी क्राॅसिंग की वजह से अड़चनें आ गईं। काफी मशक्कत के बाद यहां दूसरा फ्लाईओवर बनाया गया। लगभग दो साल से बन रहे इस फ्लाईओवर का काम भी मार्च में पूरा हो गया है। वहीं, फ्लाईओवर का एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के चलते पांच माह से अटका हुआ है। सेतु निगम ने पीडब्ल्यूडी को संचालन के लिए एनओसी भी जारी की, लेकिन पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार समय काटते रहे। यही वजह रही कि 116 करोड़ के बाइपास संचालन में लगभग आठ साल गुजर गए है।
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एक दर्जन पेड़ भी सालों तक बने रोड़ा
पूरनपुर की ओर से बाइपास की शुरुआत से आगे तक एक दर्जन से अधिक पेड़ लगे थे। इसको कटवाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग से एनओसी ली। लेकिन हीलाहवाली के चलते इसे एक वर्ष तक नहीं काटा गया। इससे संचालन में रोक लगी रही। हाल ही में पीडब्ल्यूडी ने इन पेड़ों को कटवा दिया।

बाइपास के टनकपुर हाईवे के पास बने फ्लाईओवर पर बंद रास्ते के बीच से गुजरते बाइक सवार। संवाद