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राजस्व को लगा रहे चूना, सफर भी असुरक्षित

Fri, 22 Dec 2017 05:56 PM IST
Updated Fri, 22 Dec 2017 05:56 PM IST
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राजस्व को लगा रहे चूना, सफर भी असुरक्षित
transport - फोटो : amar ujala
परमिट 55 का, टैक्सी के नाम पर धड़ल्ले से दौड़ रहे कई वाहन
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नाकामी को मजबूरी का नाम देकर अफसर झाड़ रहे पल्ला


पीलीभीत। ट्रेन और बस की भीड़भाड़ से बचते हुए सफर को आसान बनाना हर कोई चाहता है। ऐसे में अधिकांश मामलों में लोग टैक्सी का सहारा लेना पसंद करते हैं, लेकिन इसमें सफर करने वाला कितना महफूज रहेगा, इसको लेकर लापरवाह नजरिया बरकरार है। बिना परमिट टैक्सी के नाम पर धड़ल्ले से वाहनों को दौड़ाया जा रहा है। यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से इसको सिरे से नजर अंदाज कर दिया गया है। शिकंजा कसने के लिए कोई चेकिंग नही कराई जाती।
गाड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ ही खरीदे गए चार पहिया वाहन को टैक्सी के रूप में चलाकर आमदनी करने वालों में भी इजाफा हुआ है। एलएच रोड, असम चौराहा, नौगवां चौराहा समेत कई इलाकों में अवैध टैक्सी स्टैंड भी बनाए जा चुके हैं। यहां पर दिन भर वाहनों से सवारी ढोने का सिलसिला चलता रहता है। इसकी जानकारी पुलिस, परिवहन के अधिकारियों को है, लेकिन नियमों का खुला उल्लंघन किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बिना टैक्सी परमिट के धड़ल्ले से वाहन किराए पर देकर चलाए जा रहे हैं। जिससे राजस्व की हानि हो रही है। सड़कों पर टैक्सी के रूप में खड़े वाहनों की कतार भले बेहद लंबी दिखाई दे, लेकिन परिवहन विभाग के अभिलेखों में टैक्सी परमिट चार पहिया वाहनों की संख्या इसके आगे बेहद हास्यास्पद है। मात्र 55 वाहन टैक्सी परमिट पर रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में साफ है कि बकाया वाहन राजस्व को चूूना लगा रहे हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग की कोई सख्ती दिखाई नहीं देती। उधर, अवैध तरीके से चलाए जा रहे इन वाहनों से सुविधा शुल्क लेने वसूलने के आरोप तो कई बार खाकी और परिवहन विभाग पर लगाए जा चुके हैं। आगरा, बरेली, लखनऊ आदि जनपदों में टैक्सी के भीतर संगीन अपराध होने पर सख्ती के बीते समय कई बार आदेश भी किए गए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है। इन वाहनों के चालकों का कोई डाटा मेनटेन नहीं किया जाता। ऐसे में सुरक्षित सफर का भरोसा देने वाला उनका चालक कोई अपराधी तो नहीं, इसकी चेकिंग भी नहीं कराई जाती। सिर्फ कागजों में कार्रवाई को सीमित कर अफसरों की वाहवाही लूटी जा रही है।
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जिले में करीब 55 वाहन टैक्सी परमिट पर दर्ज हैं। बकाया वाहनों की चेकिंग कराई जाती है। बड़ी समस्या यह है कि कई बार गाड़ी रोक चेक करते वक्त उसमें बैठी सवारी इस बात को छिपा जाती है, कि वह किराए पर टैक्सी कर जा रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई नहीं हो पाती। लोगों को भी चेकिंग के समय विभागीय टीम की मदद को आगे आना होगा, तभी तस्वीर बदल सकेगी।
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- राजेश कुमार गंगवार, एआरटीओ
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