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तीन साल में तीन गुना बढ़ गए दलित उत्पीड़न के मामले

Wed, 11 Apr 2018 07:40 PM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 07:40 PM IST
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तीन साल में तीन गुना बढ़ गए दलित उत्पीड़न के मामले
तीन साल में तीन गुना बढ़ गए दलित उत्पीड़न के मामले
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पुलिस ने समाज कल्याण विभाग को भेजे थे 259 प्रकरण
309.55 लाख की आर्थिक सहायता दी सरकार ने पीड़ितों को

महिपाल गंगवार
पीलीभीत। सुप्रीम कोर्ट तक चाहे जो आंकड़े पहुंचे हों, लेकिन दलित उत्पीड़न के मामले में पीलीभीत जिले की स्थिति बेहद गंभीर है। साल 2017 में दलितों के खिलाफ जुल्म-ज्यादती के मामलों में तीन साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। उत्पीड़न के आंकड़े तीन गुना से भी अधिक बढ़ गए हैं। ऐसे में योगी सरकार ने ही समाज कल्याण विभाग के जरिए 259 पीड़ितों के जख्मों पर 309.55 लाख का मरहम लगाया है। अलग-अलग थानों में दर्ज ये मामले शहर से लेकर देहात तक दलित समाज की महिलाओं के साथ हुई छेड़छाड़, हत्या, दुष्कर्म आदि घटनाओं से जुड़े हैं।
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज देशभर के दलित समाज के लोगों ने एससी-एसटी एक्ट को कथित रूप से कमजोर करने का हवाला देकर देश व्यापी प्रदर्शन किया। इस बीच जिले में दलित उत्पीड़न के मामले में चौकाने वाली सच्चाई समाने आई है। यहां तीन साल के मुकाबले बीते साल दलित उत्पीड़न के 259 प्रकरण दर्ज किए गए। उत्पीड़न के मामले वैसे तो थानों में रोजाना पहुंचते है, जिनमें कई बेबुनियाद होते हैं लेकिन शासन व मनवाधिकार आयोग की सख्ती के चलते पुलिस को मामले दर्ज करने पड़ते हैं। पीड़ित दलितों को उत्पीड़न के उन्हीं मामलों में आर्थिक मदद मिलती है, जिनमें पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर लेती है और उसके बाद समाज कल्याण विभाग से सिफारिश करती है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दलित उत्पीड़न की धाराओं में दर्ज हत्या, रेप, छेड़छाड़ जैसे मामलों में अलग-अलग धनराशि तय की गई है।
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दुष्कर्म के मामलों में इजाफा
आंकड़ों की बात करें तो बीते साल 2017 में जिले में गैंगरेप, दुष्कर्म के मामले का ग्राफ तीन साल के मुकाबले 80 फीसदी बढ़ा है। 2015 में दुष्कर्म व गैंगरेप के सिर्फ पांच ही मामले दर्ज हुए थे जो इस बार 55 तक पहुंच गई हैं। हत्या, छेछ़ छाड़, मारपीट आदि घटनाएं भी लगभग 70 फीसदी बढ़ी हैं। वहीं शासन ने दलित उत्पीड़न की प्रकृति के आधार पर मदद राशि तय की है। हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को आठ लाख तो दुष्कर्म के मामले में पांच लाख रुपये देने का प्रावधान है। पहली बार रिपोर्ट लिख जाने, दूसरी विवेचना पूरी होने पर तीसरी कोर्ट से फैसला आ जाने पर दी जाती है।
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259 को मिला मुआवजा
साल 2017 -18 में जिला पुलिस द्वारा विभिन्न थानों में दर्ज दलित उत्पीड़न के 259 मामलों में आर्थिक मदद के लिए समाज कल्याण विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। जिसमें हत्या के 11, दुष्कर्म के 55 और 193 अन्य तरीके से प्रताड़ित करने के मामले थे। जांच पड़ताल के बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा पीड़िता या उनके आश्रितों को 309.33 लाख रुपये बतौर मुआवाजा दिया गया।

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वर्जन-
पुलिस द्वारा भेजे गए विभिन्न मामलों की रिपोर्ट के आधार पर 259 पीड़ित दलितों को 309.55 लाख का मुआवजा दिया गया है। इनमें दुष्कर्म मामले के 55 पीड़ित भी शामिल है। दलित उत्पीड़न की प्रकृति के आधार पर राशि दी जाती है।
- राजेश शर्मा, समाज कल्याण अधिकारी
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साल/ हत्या/ दुष्कर्म/ अन्य/ कुल मामले/ मुआवाजा
2015-16 - 6 - 5 - 74 - 85 - 59.91 लाख
2016-17 - 10 - 19 - 130 - 159 - 97.74 लाख
2017-18 - 11 - 55 - 193 - 259 - 309.55 लाख
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