मरीजों को मिलेगा हाईटेक इलाज

अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 22 Oct 2013 01:37 AM IST
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hitech treatment will get by patients

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नोएडा के सेक्टर-30 स्थित परास्नातक चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ बाल चिकित्सालय (चाइल्ड पीजीआई) में मरीजों को उच्चस्तरीय हाईटेक इलाज देने के लिए एमआरआई, सिटी स्कैन जैसी 184 मशीनों-उपकरणों को शामिल किया गया है।
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ये मशीनें दो चरणों में खरीदी जाएंगी। पहले चरण में 15 विभागों के उपकरणों की सूची तैयार कर इसे लखनऊ भेज दिया गया है।
जिसमें 350 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उपकरणों की खरीद-फरोक्त का कार्य तीन माह में पूरा किया जाएगा। इसमें रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी समेत अन्य विभागों को शामिल किया गया है।
चाइल्ड पीजीआई में अभी मरीजों को केवल परामर्श की ही सुविधा मिल रही है। जांच के लिए मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ता है।

वहीं, गंभीर मरीजों को दिल्ली रेफर किया जा रहा है। ऐसे में मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा देने के लिए उपकरणों की खरीदारी का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।

पीजीआई के निदेशक डॉ. एके भट्ट ने बताया कि, अस्पताल के लिए मंगाई जाने वाली मशीनें अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित होंगी।

जिसमें रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआई, सीटी स्कैन के अलावा एडवांस फीचर वाली स्पाइरल सीटी स्कैन मशीन को लगाया जाएगा।

पैथोलॉजी जांच के लिए लगेंगी 16 मशीनें
पैथोलॉजी विभाग में कुल 16 उपकरण लगाए जाएंगे। जिसमें डीएचएफ संबंधित जांच के एनलाइजर, 18 व 25 पैरामीटर के हैमेटोलॉजी यूनिट के अलावा ब्लड गैस एनलाइजर शामिल है।

हाइब्रिड कैथलैब बनाई जाएगी
कार्डियोलॉजी विभाग में टीएमटी, ईको कलर्ड ऑपलर के साथ आईसीसीयू व सीसीयू यूनिट में हाइब्रिड कैथलैब लगाई जाएंगी। यह लैब मल्टीस्पेशल सिस्टम पर आधारित है।

वीडियो ईजी ब्रेन मैपिंग टेस्ट होगा
न्यूरोलॉजी विभाग में वीडियो ईजी ब्रेन मैपिंग, ट्रांसक्लोनियर डॉपलर चेस्ट के लिए पीएफटी व वीडियो ब्रॉनकोस्कोप शामिल किया गया है।

इसके अलावा आईसीयू में लेरेगो स्कोप, आर्टिफिशिएल वेंटीलेटर, ईनएनटी विभाग में कुल छह उपकरण, ऑपथोलॉजी विभाग में यांग लेजर (केटरेक की झिल्ली अलग करने के लिए) के अलावा ग्रीन लेजर को शामिल किया गया है।

गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल की मिलेगी जानकारी
लेबर रूम में कार्डियो टोकोग्राफी का प्रयोग किया जाएगा। यह एक मल्टीस्पेशल यूनिट है। जिसके प्रयोग से गर्भ में पल रहे बच्चे के हार्ट के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी।

इस तकनीक का प्रयोग प्रदेश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि तीन माह में 15 विभागों के उपकरणों की खरीद-फरोख्त का कार्य पूरा किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण के उपकरणों की सूची भेजी जाएगी।
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