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कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच विवाद
Noida
Updated Tue, 17 Sep 2013 05:36 AM IST
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ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर उद्योग विहार स्थित एक कंपनी में सोमवार सुबह प्रवेश करने से मना करने पर श्रमिकों और प्रबंधन के बीच विवाद हो गया। श्रमिकों ने कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस के आश्वासन पर श्रमिक शांत हुए। बाद में उन्होंने कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी को मांगों से संबंधित ज्ञापन देकर चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित समय पर कंपनी को चालू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करेंगे।
जानकारी के मुताबिक सूरजपुर उद्योग विहार में कोरटैक नाम की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी है। इसमें करीब छह सौ श्रमिक हैं। सोमवार को रोज की तरह श्रमिकों को लेने के लिए बस निर्धारित स्थान पर जब नहीं पहुंची तो वे स्वयं ही कंपनी पहुंच गए लेकिन गार्डों नेे उन्हें कंपनी में प्रवेश नहीं करने दिया। कारण पूछने पर गार्डों ने बताया कि कंपनी बंद हो गई है। इससे नाराज श्रमिकों ने कंपनी के गेट पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद सूरजपुर पुलिस मौके पर पहुंची। कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें बिना किसी सूचना के कंपनी से बाहर किया जा रहा है, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस के समझाने पर श्रमिक शांत हुए। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा और कंपनी में प्रवेश कराने की मांग की। डीएम ने कंपनी प्रबंधन से बात करने का आश्वासन श्रमिकों को दिया। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन के बीच गलतफहमी से विवाद हो गया था। प्रबंधन से बात करने पर पता चला कि कंपनी सात दिन के लिए बंद की गई है। इसके बाद श्रमिकों को फिर से काम पर ले लिया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक सूरजपुर उद्योग विहार में कोरटैक नाम की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी है। इसमें करीब छह सौ श्रमिक हैं। सोमवार को रोज की तरह श्रमिकों को लेने के लिए बस निर्धारित स्थान पर जब नहीं पहुंची तो वे स्वयं ही कंपनी पहुंच गए लेकिन गार्डों नेे उन्हें कंपनी में प्रवेश नहीं करने दिया। कारण पूछने पर गार्डों ने बताया कि कंपनी बंद हो गई है। इससे नाराज श्रमिकों ने कंपनी के गेट पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद सूरजपुर पुलिस मौके पर पहुंची। कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें बिना किसी सूचना के कंपनी से बाहर किया जा रहा है, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस के समझाने पर श्रमिक शांत हुए। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा और कंपनी में प्रवेश कराने की मांग की। डीएम ने कंपनी प्रबंधन से बात करने का आश्वासन श्रमिकों को दिया। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन के बीच गलतफहमी से विवाद हो गया था। प्रबंधन से बात करने पर पता चला कि कंपनी सात दिन के लिए बंद की गई है। इसके बाद श्रमिकों को फिर से काम पर ले लिया जाएगा।
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