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महंगा पड़ेगा सरकारी कॉलेज की सीट छोड़ना
Noida
Updated Tue, 17 Sep 2013 05:36 AM IST
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नोएडा। यूपी राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) की काउंसलिंग से सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की सीट पक्की कर उसे छोड़ना अब महंगा पड़ेगा। काउंसलिंग के जरिये सीट पाने वाले छात्रों के लिए सरकारी संस्थानों की अलॉटमेंट फीस (इनीशियल फीस) की रकम बढ़ाई जाएगी। फीस ज्यादा होने के चलते दाखिले के दो विकल्प रखने वाले छात्र या तो अलॉटमेंट नहीं कराएंगे या सीट नहीं छोड़ेंगे। इस नई व्यवस्था से निचली रैंक वाले छात्रों की सीट बेकार नहीं जाएगी। ऐसे छात्रों के कारण इस साल काफी सीट खाली हैं।
दरसअल, यूपी-एसईई के जरिये इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों की पहली प्राथमिकता प्रदेश के सरकारी संस्थान होते हैं। काउंसलिंग से सीट मिलने के बाद छात्र को सिर्फ 10 हजार रुपये की फीस जमा कर सीट पक्की करने का प्रावधान है। यह शुरुआती फीस होती है जिसे संस्थान की ट्यूशन फीस में शामिल कर लिया जाता है। आमतौर पर हाई रैंक वाले छात्रों के लिए एसईई काउंसलिंग से सरकारी कॉलेज मिलने के साथ-साथ आईआईटी या एनआईटी का विकल्प भी खुला रहता है। ऐसे छात्र दाखिले के दूसरे विकल्पों के लिए दस हजार रुपये का जुआ खेल जाते हैं, लेकिन इससे निचली रैंक वाले छात्र की सीट बेकार हो जाती है। इसलिए फीस बढ़ाई जाएगी ताकि छात्र आसानी से सीट न छोड़ पाए। गौतमबुद्ध टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जीबीटीयू) द्वारा इस व्यवस्था को यूपी-एसईई 2014 की परीक्षा और काउंसलिंग पर लागू किया जाएगा।
मौजूदा सत्र 2013-14 के बीटेक दाखिलों में कई छात्रों ने सरकारी कॉलेज की सीटें छोड़ दी हैं। कई छात्रों ने तो फीस भी वापस नहीं मांगी। इससे निचले रैंक के छात्रों को नुकसान हुआ। विश्वविद्यालय की योजना है कि अगली काउंसलिंग में इनीशियल फीस 20 से 30 हजार ली जाए, ताकि छात्र आसानी से सीट न छोड़ पाएं। -डीएस यादव, प्रोवीसी, जीबीटीयू
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दरसअल, यूपी-एसईई के जरिये इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों की पहली प्राथमिकता प्रदेश के सरकारी संस्थान होते हैं। काउंसलिंग से सीट मिलने के बाद छात्र को सिर्फ 10 हजार रुपये की फीस जमा कर सीट पक्की करने का प्रावधान है। यह शुरुआती फीस होती है जिसे संस्थान की ट्यूशन फीस में शामिल कर लिया जाता है। आमतौर पर हाई रैंक वाले छात्रों के लिए एसईई काउंसलिंग से सरकारी कॉलेज मिलने के साथ-साथ आईआईटी या एनआईटी का विकल्प भी खुला रहता है। ऐसे छात्र दाखिले के दूसरे विकल्पों के लिए दस हजार रुपये का जुआ खेल जाते हैं, लेकिन इससे निचली रैंक वाले छात्र की सीट बेकार हो जाती है। इसलिए फीस बढ़ाई जाएगी ताकि छात्र आसानी से सीट न छोड़ पाए। गौतमबुद्ध टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जीबीटीयू) द्वारा इस व्यवस्था को यूपी-एसईई 2014 की परीक्षा और काउंसलिंग पर लागू किया जाएगा।
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मौजूदा सत्र 2013-14 के बीटेक दाखिलों में कई छात्रों ने सरकारी कॉलेज की सीटें छोड़ दी हैं। कई छात्रों ने तो फीस भी वापस नहीं मांगी। इससे निचले रैंक के छात्रों को नुकसान हुआ। विश्वविद्यालय की योजना है कि अगली काउंसलिंग में इनीशियल फीस 20 से 30 हजार ली जाए, ताकि छात्र आसानी से सीट न छोड़ पाएं। -डीएस यादव, प्रोवीसी, जीबीटीयू
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