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सॉस के रूप में सप्लाई करता था ‘जहर’
Noida
Updated Mon, 05 Aug 2013 05:33 AM IST
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नोएडा। रेहड़ी, फूड कार्नर, कियोस्क या रेस्टोरेंट में टमेटो और चिली सॉस न ही खाएं तो बेहतर हैं। क्योंकि यह सॉस नकली भी हो सकता है, जो आपके के लिए किसी जहर से कम नहीं है। थाना सेक्टर-58 पुलिस ने नकली टमेटो और चिली सॉस पकड़ा है, जिसकी सप्लाई कई बड़े रेस्टोरेंट में भी होने वाली थी।
क्षेत्राधिकारी नगर द्वितीय विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मूलरूप से मुजफ्फर नगर, बिहार निवासी संतोष कुमार यादव को 3 अगस्त की रात सेक्टर-63 के एच ब्लॉक से पकड़ा है। उसके पास से 260 किलो (65 कैन) नकली सॉस बरामद हुआ है। खाद्य निरीक्षक द्वारा सॉस का सैंपल लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। पूछताछ में संतोष ने बताया कि वह दिल्ली के छोटा हसनपुर गांव, पटपड़गंज में किराए के मकान में रहता है और घर में ही यह सॉस बनाकर नोएडा में सड़क किनारे लगे स्टॉल से लेकर कई बड़े रेस्टोरेंट में बेचता है। गौरतलब है कि 3 अगस्त को सेक्टर-92 निवासी गिरीराज यादव ने संतोष के खिलाफ एक नामी कंपनी का चिली और टमेटो सॉस बताकर नकली सॉस बेच कर ठगी करने की शिकायत की थी।
ऐसे बनता था नकली सॉस
संतोष कुमार यादव ने बताया कि वह टमेटो सॉस कद्दू, आरारोट और लाल रंग मिलाकर बनाता था। जबकि चिली सॉस के लिए लाल की जगह हरा रंग इस्तेमाल करता था। चार केन 35 से 40 रुपये में तैयार हो जाते थे, जिसे दोगुने दाम पर बेचता था। उसने बताया कि शहर के कुछ नामी रेस्टोरेंट में भी वह इस सॉस की सप्लाई करता था। करीब डेढ़ महीने से वह इस धंधे को नोएडा में चला रहा था।
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सेहत के लिए खतरनाक
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि इस तरह का सॉस घातक होता है। रंगों से किडनी, लीवर और खून पर असर पड़ता है। खून में हीमोग्लोबिन का मात्रा कम हो जाती है। इतना ही नहीं, ऐसे सॉस में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जिससे टाइफाइड, कॉलरा, फूड प्वाइजनिंग और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां हो जाती हैं। साथ ही कहा सॉस का इस्तेमाल न ही करें तो बेहतर हैं।
मिलावटी सॉस की पहचान
रंग काफी गहरा होता है, रंग की अलग गंध पता लगती है।
स्वाद ज्यादा मीठा या अलग होता है, जिसे खाने पर जुबान का स्वाद खराब हो जाता है।
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क्षेत्राधिकारी नगर द्वितीय विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मूलरूप से मुजफ्फर नगर, बिहार निवासी संतोष कुमार यादव को 3 अगस्त की रात सेक्टर-63 के एच ब्लॉक से पकड़ा है। उसके पास से 260 किलो (65 कैन) नकली सॉस बरामद हुआ है। खाद्य निरीक्षक द्वारा सॉस का सैंपल लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। पूछताछ में संतोष ने बताया कि वह दिल्ली के छोटा हसनपुर गांव, पटपड़गंज में किराए के मकान में रहता है और घर में ही यह सॉस बनाकर नोएडा में सड़क किनारे लगे स्टॉल से लेकर कई बड़े रेस्टोरेंट में बेचता है। गौरतलब है कि 3 अगस्त को सेक्टर-92 निवासी गिरीराज यादव ने संतोष के खिलाफ एक नामी कंपनी का चिली और टमेटो सॉस बताकर नकली सॉस बेच कर ठगी करने की शिकायत की थी।
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ऐसे बनता था नकली सॉस
संतोष कुमार यादव ने बताया कि वह टमेटो सॉस कद्दू, आरारोट और लाल रंग मिलाकर बनाता था। जबकि चिली सॉस के लिए लाल की जगह हरा रंग इस्तेमाल करता था। चार केन 35 से 40 रुपये में तैयार हो जाते थे, जिसे दोगुने दाम पर बेचता था। उसने बताया कि शहर के कुछ नामी रेस्टोरेंट में भी वह इस सॉस की सप्लाई करता था। करीब डेढ़ महीने से वह इस धंधे को नोएडा में चला रहा था।
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सेहत के लिए खतरनाक
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि इस तरह का सॉस घातक होता है। रंगों से किडनी, लीवर और खून पर असर पड़ता है। खून में हीमोग्लोबिन का मात्रा कम हो जाती है। इतना ही नहीं, ऐसे सॉस में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जिससे टाइफाइड, कॉलरा, फूड प्वाइजनिंग और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां हो जाती हैं। साथ ही कहा सॉस का इस्तेमाल न ही करें तो बेहतर हैं।
मिलावटी सॉस की पहचान
रंग काफी गहरा होता है, रंग की अलग गंध पता लगती है।
स्वाद ज्यादा मीठा या अलग होता है, जिसे खाने पर जुबान का स्वाद खराब हो जाता है।