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इन 19 आरोपियों को रिहा कराना चाहती है अखिलेश सरकार
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2013 11:31 AM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पांच जून को सुनवाई के दौरान आतंकी घटनाओं के आरोपियों से केस वापसी को लेकर ब्योरा तलब किया था।
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सरकार को यह बताने को कहा था कि क्या मुकदमे वापसी पर केंद्र से सहमति ली गई है?
आदेश के तहत शुक्रवार को राज्य सरकार की तरफ से सूबे के प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव कोर्ट में पेश हुए और 20 पन्ने का जवाबी हलफनामा दाखिल किया।
इसमें उन सात जिलों के 14 मामलों के 19 अभियुक्तों की सूची दी गई है, जिनसे सरकार मुकदमे वापस लेना चाहती है।
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राज्य सरकार की तरफ से पीआईएल का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल का कहना था कि राज्य सरकार को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत आरोपियों से मुकदमे वापस लेने अधिकार है।
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इसके लिए सरकार को केंद्र से सहमति लेने की जरूरत नहीं है और अगर सहमति की जरूरत पड़ेगी तो यह लोक अभियोजक द्वारा ली जाएगी।
याचियों के वकील हरिशंकर जैन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि चूंकि मुकदमे केंद्रीय कानून के तहत दर्ज हैं लिहाजा केंद्र की अनुमति लिया जाना जरूरी है।
अपर महाधिवक्ता का यह भी तर्क था कि ऐसे ही दो अन्य मामले पहले इलाहाबाद बेंच में खारिज हो चुके हैं इसलिए यह जनहित याचिका भी खारिज किए जाने योग्य है।
मामले की सुनवाई के समय अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी, राजबहादुर सिंह यादव मुख्य स्थायी अधिवक्ता आईपी सिंह भी मौजूद रहे।
याचियों के अधिवक्ता हरिशंकर जैन का तर्क था कि पिछले कुछ सालों से देश आतंकी घटनाओं का दंश झेल रहा है ऐसे में आतंक के आरोपियों से केसों को वापस लिया जाना कानून की मंशा के खिलाफ है।
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जैन के मुताबिक कोर्ट के 5 जून के आदेश के तहत सरकार की तरफ से उन आरोपियों की सूची पेश की गई, जिनसे मुकदमे वापस लेने की पहल की गई है।
उनका पूरा रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार ने यह सूची जवाबी हलफनामे के साथ पेश की। उधर केंद्र सरकार की तरफ से अधिवक्ता जयंत सिंह तोमर ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
इस पर कोर्ट ने फिलहाल मुकदमे वापसी के आदेश के अमल पर रोक लगाकर पक्षकारों को जवाब व प्रति उत्तर दाखिल करने का समय दिया है।
मामले और उनके आरोपी
1. वाराणसी केदशाश्वमेध थाने का 2006 का मामला। इसमें अभियुक्त शमीम उर्फ सरफराज पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम केतहत आरोप हैं। इसका मुकदमा वापसी का आदेश गत 5 मार्च को जारी हुआ।
2. गोरखपुर कैंट थाने का 2007 का मामला। इसके अभियुक्त मो. तारिक कासमी पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम आदि केतहत आरोप हैं। मुकदमा वापसी का आदेश गत 5 मार्च को जारी हुआ।
3. बिजनौर केनजीबाबाद थाने का 2002 का मामला। इसके अभियुक्त अहमद हसन उर्फ बाबू पर शासकीय गोपनीयता अधिनियम केतहत आरोप है। मुकदमा वापसी का आदेश गत 22 जनवरी का है।
4. लखनऊ केवजीरगंज थाने से संबंधित वर्ष 2007 का मामला। इसकेपांच अभियुक्तों मुख्तार हुसैन, मोहम्मद अली, अजीजुर्रहमान, नौशाद हाफिज व नुरुल इस्लाम से मुकदमा वापसी का आदेश गत 15 अप्रैल का है।
5. लखनऊ के हुसैनगंज थाने से संबंधित दो मुकदमों केअभियुक्त याकूब तथा नाका थाने से दो अन्य मुकदमों में अभियुक्त नासिर हुसैन से केस की वापसी का आदेश गत18 अप्रैल का है। इसी आदेश केतहत कैसरबाग थाने से संबंधित मामले केअभियुक्तों मो. कलीम व सैय्यद अब्दुल मोबीन से मुकदमा वापसी का निर्णय लिया गया।
6. कानपुर नगर केसचेंडी थाने केमामले में अभियुक्त इम्तियाज अली, बिठूर थाने केमामले की अभियुक्त सितारा बेगम तथा स्वरूपनगर थाने केमामले में अभियुक्त अरशद से मुकदमे वापसी का आदेश गत 18 अप्र्रैल का है।
7. रामपुर केगंज थाने से संबंधित मामले केअभियुक्तों-मकसूद, जावेद उर्फ गुड्डू व ताज मोहम्मद से मुकदमा वापसी का आदेश गत 18 अप्रैल का है।
8. बाराबंकी नगरकोतवाली थाने से संबंधित मामले केअभियुक्तों तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद (अब मृत) से मुकदमा वापसी का शासनादेश भी गत 18 अप्रैल का है।